अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

यूरोपीय संघ - जापान का मुक्त व्यापार समझौता


Print Friendly and PDF

    पिछले दिनों यूरोपीय संघ व जापान के शासक आपस में मुक्त व्यापार समझौता करने पर सहमत हो गये। इस समझौते को अमेरिका की ट्रम्प सरकार के संरक्षणवादी कदमों के जवाब के बतौर प्रचारित किया जा रहा है। 

    इस समझौते के लिए पिछले 4 वर्षों से बातचीत चल रही है। अभी भी इसको लागू करने के लिए यूरोपीय संघ के प्रत्येक देश व जापान की संसदों से पारित होना पड़ेगा। इस समझौते से 64 करोड़ आबादी वाले ये देश जो दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद का 30 प्रतिशत उत्पादित करते हैं और विश्व व्यापार में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, आपस में जुड़ जायेंगे। यह अपने आप में अभी तक का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है। इससे पहले तक अमेरिका के नेतृत्व वाला उत्तरी अमेरिका मुक्त व्यापार समझौता(नाफ्टा) सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र था। इस तरह नाफ्टा की टक्कर में यह सबसे बड़ा व्यापार क्षेत्र अस्तित्व में आ जायेगा। 

    मुक्त व्यापार समझौते के तहत यूरोपीय संघ व जापान के बीच परस्पर व्यापार में सीमाकर शून्य या बेहद कम कर दिया जायेेगा। फिलहाल आॅटोमोबाइल व डेयरी उत्पाद पर सीमाकर कम करने का प्रस्ताव है। इससे जापानी आॅटो निर्माता कम्पनियां यूरोप में व यूरोप की डेयरी उत्पाद कम्पनियां जापान में अपना माल आसानी से बेच सकेंगी। 

    इस समझौते से यूरोप के कृषि क्षेत्र में रोजगार व मुनाफा बढ़ने की उम्मीद व जापान की आॅटो कम्पनियों के मुनाफे में वृद्धि की उम्मीद लगायी जा रही है। हालांकि वास्तविकता यह है कि यूरोप का कृषि क्षेत्र प्रतियोगिता व सब्सिडी कटौती से त्रस्त है  कृषि क्षेत्र में रोजगारों की संख्या लगातार गिर रही है। 

    जब अमेरिका की ट्रम्प सरकार ने ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप (टीपीपी) को खारिज कर दिया  तो जापानी प्रधानमंत्री ने ठहरावग्रस्त जापानी अर्थव्यवस्था को गति देने के उद्देश्य से यूरोपीय संघ की ओर समझौते का रुख किया। ट्रांस पैसेफिक पार्टनरशिप अमेरिका, जापान व दस अन्य देशों के बीच होने वाला व्यापार समझौता था।

    इस समझौते से यूरोपीय संघ जर्मनी के नेतृत्व में अमेरिका पर अपनी निर्भरता को घटाने का भी प्रयास कर रहा है। अमेरिका की संरक्षणवादी बातों से यूरोप के देशों की कम्पनियों को अपना मुनाफा गिरने की उम्मीद है। 

    जैसा कि ऐसे सभी व्यापार समझौतों से होता है कि दुनिया में व्यापार के लिए बने ब्लाॅकों में व्यापार संघर्ष तेज हो जायेगा। इस समझौते का लाभ यूरोप व जापान की बहुराष्ट्रीय कम्पनियां ही उठायेंगी। उनके मालों की आवाजाही अधिक सुगम हो जायेगी। बहुर्राष्ट्रीय निगमों को मिले इस लाभ से मजदूरों-मेहनतकशों पर हमला बोलने की इनकी क्षमता बढ़ जायेगी। उदारीकरण-वैश्वीकरण के इस दौर में हो रहे सभी मुक्त व्यापार समझौते मजदूर वर्ग के जीवन को और दुष्कर बना रहे हैं। 

    अपनी बारी में ये समझौते दिखला रहे हैं कि उत्पादक शक्तियां अब वैश्विक पैमाने पर एकीकृत हो रही हैं। समाजवाद के निर्माण के हिसाब से ये आगे बढ़ा हुआ कदम है पर अपनी बारी में पूंजीवाद में ये समझौते मजदूरों-मेहनतकशों का ही शोषण-उत्पीड़न बढ़ा रहे हैं। इसीलिए इनका विरोध किया जाना चाहिए।   

Labels: अन्तराष्ट्रीय


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
पोस्ट बाक्स न.-6
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375