अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

लिउद्मिला पब्लिचेंको का अमेरिकी अवाम के समक्ष दिया गया भाषण


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(द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हिटलर द्वारा सोवियत संघ पर हमला करने के बाद सोवियत संघ और अमेरिकी व ब्रिटिश शासकों के बीच यह समझौता हुआ था कि अमेरिकी व ब्रिटिश फौजें हिटलर के विरुद्ध युद्ध में दूसरा मोर्चा पश्चिम की तरफ से खोलेंगी। लेकिन अमेरिकी व ब्रिटिश सरकारें दूसरा मोर्चा खोलने के सवाल पर हीला-हवाली कर रही थीं। इन सरकारों पर वहां की जनता का दबाव डालने के उद्देश्य से सोवियत सरकार ने इन देशों में नौजवानों, ट्रेड यूनियनों और साहित्यकारों के प्रतिनिधिमंडल भेजे थे। प्रस्तुत भाषण लिउद्मिला पब्लिचेंको का है जिसे उन्होंने अक्टूबर, 1942 में अमेरिकी जनता के बीच दिया था। वे निशानेबाज थीं और उस समय तक उन्होंने 309 जर्मन नाजियों को खत्म किया था। वे अमेरिकी सोवियत नौजवानों के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के तौर पर गयी थीं। 

    यहां उनके भाषण के प्रमुख अंशों को दिया जा रहा है-सम्पादक)


    आपने मुझसे सर्वप्रथम दूसरा मोर्चा की तात्कालिकता के बारे में कुछ कहने के लिए कहा है। निसंस्देह इससे ज्यादा महत्वपूर्ण और कुछ नहीं है। दूसरे मोर्चे को खोलना ही एकमात्र रास्ता है जिससे हम दुश्मन पर तेजी से विजय पा सकते हैं, उस दुश्मन पर जो न सिर्फ मेरे देश की बल्कि अमेरिका, ब्रिटेन और चीन सभी संयुक्त राष्ट्रों की आजादी के लिए खतरा है। दूसरे मोर्चे के बारे में चर्चा बहुत है। हमारे लोग अभी भी इस पर उम्मीद कर रहे हैं तथा इंतजार कर रहे हैं-लेकिन उन्हें आश्चर्य हो रहा है कि चर्चा कार्यवाही में कब तब्दील होगी। एक बात को स्पष्टतया समझना होगा। हम दूसरे मोर्चे की मांग इसलिए नहीं कर रहे हैं कि हम कमजोर हैं न इसलिए कर रहे हैं कि हमें अपनी खुद की शक्ति में भरोसे का अभाव है, बल्कि इसलिए कर रहे हैं कि हम चाहते हैं कि इस खूनी युद्ध का ज्यादा जल्दी से अंत हो। आप सोचंे कि कितना अधिक खून बहाया जा चुका है, कितना अधिक विनाश और भय फैल चुका है। निर्दोष लोगों-बूढ़ों और बच्चों पर कितनी अधिक निर्दयता और यंत्रणा बरपा की गयी हैं। जितनी जल्दी से इस दानव फासीवाद को नष्ट किया जायेगा, उतना कम खून बहेगा-और इसका मतलब आपके खून के साथ-साथ हमारे खून से है।

    बिना दूसरे मोर्चे के जो प्रत्येक दिन गुजरता है वह आपके लिए खतरे को बढ़ा देता है। यह उस कीमत को बढ़ा देता है जो बाद में हिटलरवाद की पराजय के लिए आपको चुकानी पड़ेगी। आप इस बात को याद रखें कि ठीक इस समय हिटलर की सभी सेनाओं का 9/10 हिस्सा हमारे देश में लगा हुआ है और इसमें सिर्फ जर्मनी की सेना नहीं है। हिटलर ने समूचे यूरोप से हंगरी, डेनमार्क, इटली, रोमानिया, फिनलैंड से अपनी सेनाएं इकट्ठी की हैं। यह समय हमारी सेनाएं और कमजोर हो जाने से पहले, यूरोप में धावा बोलने का समय है। 

    स्तालिनग्राद हमारे लिए और आपके लिए महत्वपूर्ण बिंदु है। मैं जानती हूं कि हमारे लोग लड़ रहे हैं और वे लड़ना उसी तरह जारी रखेंगे जैसे उन्होेंने पहले ओडेसा में, पहले स्वास्तोपोल में, पहले लेनिनग्राद में किया था। यह कभी न भूलें कि लड़ने के प्रत्येक दिन का हमारे साझे ध्येय के लिए क्या अर्थ है। इन सभी शहरों की तमाम सड़कें जर्मन लाशों से भरी हुई और भर रही-भरी पड़ी हैं। जर्मन लड़ाई के मैदान से अपने घायलों को जल्दी से नहीं हटाते, जैसा कि हम करते हैं। वे अपने खुद के घायल लोगों के शरीरों के ऊपर से गुजरकर आगे बढ़ जाते हैं। स्तालिनग्राद में वे ऐसा ही कर रहे हैं। अमेरिका में यह अपने लिए महत्वपूर्ण है कि हम इतने अधिक दुश्मनों को मार रहे हैं। हां, हम ऐसा करना जारी रखेंगे। लेकिन हमसे चमत्कारों की उम्मीद न करें। हजारों की संख्या में हमारे लोग भी मर रहे हैं। पश्चिम की तरफ से प्रहार को बिना किसी देरी के हमारे साथ तालमेल बनाकर करना होगा। यह सही है कि हमें आपकी जनता से युद्ध आपूर्ति और दवाओं की मदद मिली है, जिसके लिए हम बहुत आभारी हैं। लेकिन जितने बड़े पैमाने पर लड़ाईयां चल रही हैं वैसी तुलनात्मक तौर पर हमारे महान इतिहास में कभी भी नहीं देखी गयी हैं। और बाहर से हमें जो मदद मिल रही है वह पर्याप्त नहीं है। तकनीकी और भौतिक मदद ही आज पर्याप्त नहीं है। हमें मदद की जरूरत लोगों की है- मैदान में लड़ने वाले हमारे सहयोगियों की सेनाओं की जरूरत है। 

    मैं यह महसूस करने को मजबूर हूं कि अमेरिकी आवाम अभी भी युद्ध के प्रति और इसका वास्तव में क्या अर्थ है, के प्रति उदासीन है। मैं विश्वास नहीं करती कि अमेरिकी आवाम पूरे तौर पर समझती है। कि युद्ध कैसा होता है। अभी तक आपमें से अधिकांश सिर्फ इसे एक असुविधा के बतौर बिना गैसोलिन के रहने, आप द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीनी की मात्रा में थोड़ी कटौती महसूस करते हैं। आप नहीं जानते कि अपने चारों ओर बम गिरना कैसा होता है। आप नहीं जानते कि हिटलरवादी जानवरों द्वारा बच्चों की हत्या देखना, महिलाओं और लड़कियों को रौंदते जाते देखना कैसा होता है। आप नहीं जानते कि आपके खुद के साथियों के जले हुए शरीर को, जलाकर और यातना देकर ऐसा बना दिया गया हो जिन्हें पहचानना भी मुश्किल हो, पाकर कैसे लगता है। आप नहीं जानते कि ऐसे बहादुर और बेहतर लोग जिन्हें आप जानते हैं, उन्हें सड़क के किनारे लटकते हुए देखकर कैसा लगता है। आप नहीं जानते कि जर्मनों से फिर से जीते इलाके में बूढ़े लोगों के लिए बने घर के भीतर घुसना कैसा होता है। जैसा कि मैं ओडेसा के नजदीक सोवरखोज इल्यिचका में गयी थी। यह प्रभात बेला थी, और सूर्य निकल रहा था। हम वहां लोगों को आजाद करने के लिए गये। लेकिन वहां हमें बूढ़े लोगों के शव मिले जिन्हें गोली मारी गयी और यातना दी गयी थी, उनको टुकड़ों में काटा गया था, उन्हें ग्रेनेड से उड़ाया गया था। 

    108 लोग, वे सभी बूढ़े और बीमार थे। और वे हिटलरवादी ऐसे बहशी थे कि सभी बूढ़ी औरतों का बलात्कार किया गया था। इस तरह की बातें किसी समय आपके साथ हो सकती हैं यदि हिटलर और विजयें हासिल करता जाता है। 

    और तब भी बहुत सारे अमेरिकी युद्ध के बारे में अभी भी सोचते हैं कि वह ऐसी चीज है जो कहीं सुदूर में हो रहा है, जहां रूसी और जर्मन एक दूसरे से लड़ रहे हैं। लेकिन हम आपकी आजादी के लिए भी लड़ते हैं। हम यूरोप के सभी देशों की आजादी के लिए, संयुक्त राष्ट्रों की आजादी के लिए लड़ते हैं और हम अकेले लड़ रहे हैं। 

    कुछ लोग जिनसे मैंने बात की, वे इस तरह सोचने वाले लगे कि महासागर किसी किस्म की बाधा है। मैं सोचती हूं कि यह एक सड़क की तरह है। आपके अच्छी अमेरिकी डामर सड़कों की तरह यह शायद उससे बेहतर है। आप इसके भीतर से के साथ-साथ इसके ऊपर से जा सकते हैं। हिटलर ने पनडुब्बियां आपके तटों पर भेजी हैं, उन्हें देखें। आपके खुद के पास महासागर के बड़े हिस्से हैं, आपके पास इसके ऊपर उड़ान भरने का स्थान है, और समुद्र के भीतर चलने का रास्ता है। मैं सोचती हूं कि यूरोप में दूसरा मोर्चा खोलने के लिए आपके पास विस्तृत राजमार्ग है। 

    हमने हमेशा आप अमेरिकी लोगों की महान लड़ने के गुणों की प्रशंसा की है। आपने अपनी क्रांति और गृह युद्ध में आजादी के लिए गौरवमयी लड़ाई लड़ी थी। ऐसी लड़ाई की परंपरा होना अच्छी बात है। लेकिन हम महसूस करते हैं कि जैसे आपने अतीत में लड़ा था उसी तरह आजादी के लिए आपको इस समय भी लड़ना चाहिए। हिटलर सिर्फ सोवियत संघ के लिए खतरा नहीं है, वह आपके लिए भी खतरा है। मैं आपके समाचार पत्रों को पढ़ती हूं और मैं उनमें आपके देश के लिए व्यापक खतरे के बारे में कुछ भी लिखा हुआ नहीं देखती। उनमें सिर्फ स्तालिनग्राद के लिए खतरे की चर्चा रहती है। लेकिन वह आपके लिए भी खतरा है। अमेरिकी लोगों को हम यह कैसे समझा सकते हैं? लिखना और बातें करना पर्याप्त नहीं है अपनी आवाज को ऊंची करके चिल्लाओ, उन बच्चों और बूढ़े लोगों के बारे में बताओ, लाखों-लाख हिटलर के शिकार लोगों के बारे में बताओ और जो उनको झेलना पड़ा है उसके बारे में बताओ।

    और आपको उसी तरह से दुश्मन से घृणा करना सीखना चाहिए जैसे हमने किया है। घृणा हमारे पास एकदम तुरंत नहीं आयी। हम शांतिप्रिय लोग हैं और हमें घृणा करना सीखना पड़ा। लेकिन तीव्र घृणा हमारे भीतर उस समय उठी जब हमने देखा, अपनी आंखों से देखा कि हिटलरी जानवर क्या कर सकते हैं। अब हम दुश्मन से इतनी अधिक घृणा करते हैं कि उसके भीतर डर समा जाय। जब आप बाहर अपनी पोस्ट पर होते हैं तब आप जानते हैं कि या तो आप या तो आपका दुश्मन मारा जाना है। आज हमारी पूरी जनता यह जानती है। 

    जब से मैं यहां आयी हूं अक्सर मुझसे पूछा गया है कि जब मैं एक जर्मन को मारती हूं तो मैं कैसा महसूस करती हूं। एक नाजी को मारने के बाद मैं वैसे ही महसूस करती हैं जैसा एक शिकार अपने शिकार जानवर को मारकर करता है। प्रत्येक बार जब मेरी गोली किसी नाजी को मार गिराती है तो मैं महसूस करती हूं कि मैंने जिंदगियां बचायी हैं। कोई भी व्यक्ति जिसके देश को नाजियों ने अपने पैरोें तले रौंद दिया है वह इसे अच्छी तरह जानता है। क्योंकि नाजी लोग बच्चों, महिलाओं और बूढ़े लोगों को मार डालते हैं। अपने देश में एक भी नाजी को जिंदा रहने देने का अर्थ अपने खुद के लोगों की हत्या को बढ़ावा देना है। सिर्फ मरे हुए नाजी पर यह भरोसा किया जा सकता है कि निर्दोष लोगों का कोई नुकसान नहीं होगा। प्रत्येक हिटलरवादी जब मारा जाता है वह मानव जाति की मुक्ति की राह में एक आगे का कदम होता है। 

    मुझसे अपने खुद के जीवन के बारे में लिखने को कहा गया है। यदि यह हमारे लोगों के बारे में और हमारे वर्तमान संघर्ष के बारे में बेहतर समझदारी बनाने की दिशा में किसी भी तरह मददगार हो तो मैं यह करने में खुश हूंगी। यह मेरी कहानी है। 

    मैं एक उक्रैनी हूं। मैं कियेव के पास बेलाया त्सेरकोव कस्बे में 26 वर्ष पहले पैदा हुई थी। मेरी एक छोटी बहन वालेन्तीना है, जो इस समय गोला-बारूद बनाने वाली फैक्टरी में काम करती है। मुझे यह कहने में गर्व है कि वह स्टाफ में सबसे अच्छे मजदूरों में से एक समझी जाती है। मेरी मां एक अध्यापक थी। जब क्रांति हुई थी तब मेरे पिता पेत्रोग्राद की एक फैक्टरी में मजदूर थे। उन्होंने क्रांति में और गृहयुद्ध में भी हिस्सा लिया था। हमारी विजय के बाद और जब देश में स्थायित्व आ गया, उनको एक अधिशासी का काम दिया गया जिसमें उन्हें उक्रैन में जगह-जगह जाने की जरूरत थी। हम सभी उनके साथ यात्रा करते थे। मेरी शुरूआती पढ़ाई प्रत्येक वर्ष एक नये शहर के एक नये स्कूल में होती थी। लेकिन इस चैतरफा यात्रा ने मुझे बहुत कुछ सिखाया और मैंने अपनी स्कूली शिक्षा औसत से डेढ़ वर्ष पहले पूरी कर ली। और यह इसके बावजूद था कि मैं एक लड़कानुमा या बल्कि अपनी कक्षा में शरारती थी। शायद मैं अपने अध्यापकों के लिए एक चुनौती थी।

    मैं सभी किस्म के खेलों की शौकीन थी और लड़कों वाले सभी खेल खेलती थी और लड़के किसी भी चीज में आगे न निकल जायें। मैं हमेशा यही कोशिश करती थी। इसी से मैं निशानेबाजी की ओर मुड़ गयी। जब एक पड़ोस का लड़का निशानेबाजी में अपनी शेखी बघारने लगा तो मैंने उसे दिखाने के लिए तय किया कि लड़की भी उतना ही बेहतर कर सकती है। इसलिए मैं बहुत अभ्यास करने लगी। 

    जब मैं 18 वर्ष की थी तो हम अंततः कियेव में रहने लगे। मुझे यह चुनाव करना था कि मैं पढ़ाई जारी रखूं या काम करूं। मैंने फैक्टरी में काम का चुनाव किया और हथियारों के संयंत्र में काम पा गयी। मैं कुशल टर्नर हो गयी। जब मैं फैक्टरी में थी तब मैंने अपनी खेलकूद की गतिविधियां जारी रखीं और निशानेबाजी करती रही। इस समय एक मजेदार वाकया हुआ। एक दिन मेरे मित्र मुझे पास की एक निशानेबाजी करने की जगह पर खींचकर ले गये। वहां बारह पुरूस्कारों की घोषणा की गयी। वहां आमतौर पर स्थिर और चलायमान लक्ष्य थे। मैंने 15 गोलियां खरीदीं और सभी बारह पुरूस्कार जीत लिये। वह व्यक्ति जो उसको संचालित कर रहा था, चिंता और आश्चर्य से उस समय पीला पड़ गया जब उसने एक के बाद दूसरे पुरूस्कार मेरे हाथों में इकट्ठा देखे। उसके द्वारा 12 वां पुरूस्कार मिलने के बाद मुझे उस पर दुख हुआ और मैंने सारे पुरूस्कार उसे वापस कर दिये। 

    कुछ साल फैक्टरी में बिताने के बाद मुझे सैनिक इंजीनियरिंग स्कूल में भर्ती होने का मौका दिया गया। लेकिन उस समय युद्ध और सैनिक मामले मेरे विचारों से बहुत दूर थे। मेरी रूचि इतिहास में थी और 1937 में मैंने कियेव विश्वविद्यालय में प्रवेश ले लिया। मैं एक विद्वान, एक अध्यापक बनने का स्वप्न देखती थी। 

    विश्वविद्यालय में पहले की तरह मैंने अपनी खेलकूद की गतिविधियां जारी रखीं। मैं धावक और पोलबाल्ट फेंकने वाली के साथ-साथ निशानेबाज थी। खुद को गोली चलाने में पूर्ण करने के लिए मैंने एक निशानेबाजी के स्कूल में दाखिला ले लिया। 

    जब युद्ध छिड़ा तब मैं ओडेसा शहर में थी। मैं अपने शोध के सिलसिले में वहां गयी थी। जिस खास क्षण में जर्मन आक्रमण हुआ उस समय मैं एक सेेनीटोरियम में थी जहां बीमारी के बाद स्वास्थ्य लाभ के लिए मैं गयी हुई थी। जब मैंने यह खबर सुनी तो मैंने बीमार महसूस करना बंद कर दिया। जब मैंने सेनीटोरियम से रुखसत करने की डाक्टरों से सिफारिश की तो उन्होंने मना कर दिया। मैं उस समय यह नहीं महसूस करती थी कि तर्कों और अपीलों का यह समय है। मैं जानती हूं कि उनकी तुलना में युद्ध ने मेरा ज्यादा इलाज कर दिया था। इसलिए मैं चुपचाप वहां से निकल गयी। 

    वे सेना में लड़कियों को नहीं लेंगे इसलिए मैंने भर्ती होने के लिए सभी किस्म की चालाकियों को इस्तेमाल किया। लेकिन अंततः मैंने इसका इंतजाम भी कर लिया। सबसे पहले नष्ट करने वाला स्क्वाड नामक स्वयंसेवी दस्तों में से एक में मैंने काम किया। ये दस्ते मोर्चे के पास शहरों और जिलों के नजदीक जर्मन पैराशूटों को मारने के लिए गठित किये गये थे। मेरे दस्ते को बाद में नियमित लाल सेना की इकाई में विलय कर दिया गया। मैं 25 वीं चादायेव डिवीजन की सदस्य थी। 

    नाजी दो रोमानियाई भाड़े के सैनिकों ने मुझे निशानेबाज बनने में मदद की। मुझसे कहा गया कि इसमें सफल होने को सिद्ध करने के लिए मुझे रोमानियाई लोगों के ग्रुप पर अपनी कुशलता प्रदर्शित करनी है। जब मैंने दो को मार गिराया तो मुझे स्वीकार कर लिया गया। ये दो लोग मेरे आंकड़ों में शामिल नहीं हैं क्योंकि ये मेरे परीक्षण के निशान थे। 

    मुझे यह स्वीकार करना होगा कि गोलीबारी के मेरे प्रथम वास्तविक बपस्तिमा में मैं डर गयी थी। मैं जर्मन गोलीबारी के दायरे में थी और मैं अपने मशीनगनरों के ऊपर चिल्ला उठी थी कि जवाबी गोलियों से मेरा सुरक्षा घेरा करें और मुझे बचायें। लेकिन जल्दी ही मैं स्थिरचित्त और शांतचित्त होना सीख गयी थी। ये ऐसे गुण हैं जो हमारे निशानेबाजों में होने चाहिए। मेरा निशानेबाज का आंकड़ा उस समय शुरू हुआ जब मैंने तीन लोगों की जर्मन स्काउटिंग पार्टी को रोक दिया। किसी निश्चित बिंदु पर जर्मनों ने सफाया करने वाला जाल बिछा रखा था, जिसे वे बिना किसी बाधा के पूरा करने को कटिबद्ध थे। जब उन्होंने सोचा कि अब कोई भी जिंदा नहीं बचा है, उन्होंने इन स्काउटों को यह देखने के लिए आगे भेजा कि वे अब उस स्थान पर कब्जा सुरक्षित तरीके से कर सकते हैं। मैंने उनको देख लिया और उनको खत्म करने के लिए पूछा। इजाजत मिलने के बाद मैं उस जगह पर गयी जिससे कि उनको घेरे में ले सकूं। मैंने उन तीन में दो को मार गिराया। तब से मेरा आंकड़ा शुरू हुआ जो इस समय 309 है।

    निशानेबाजी खतरनाक होती है क्योंकि हम शिकार करने वाले के साथ ही शिकार भी होते हैं। किसी निशानेबाज की उपस्थिति सेना के मनोबल को गिरा सकती है और हर तरह के हथियारों से केंद्रित हमला करके उससे छुटकारा पाने के लिए सब कुछ किया जाता है। जब उसकी ठीक स्थिति का पता चल जाता है तो तोपखाने तक का भी इस्तेमाल किया जाता है या उसके विरुद्ध वे अपने खुद के निशानेबाज तैनात करते हैं। मेरी कार्यवाहियों का बड़ा हिस्सा दुश्मन के निशानेबाजों के साथ टकरावों का रहा है। 

    खुली और कठिन स्थितियों में लगातार 15 से 20 घंटों तक रहने के लिए बहुत धैर्य और इच्छाशक्ति की जरूरत होती है और जब आप अपनी स्थिति में रहते हो तो बहुत कठोरता से अपने को रखना होता है। अपने को इतना नियंत्रण में रखना होता है कि एक भी गोली या आवाजाही बेकार न जाये। किसी भी चूक का मतलब मौत होता है। आपका दिन भोर से पहले शुरू होता है जिससे कि अपने अड्डे पर पहुंचकर वहां प्रकाश होने के पहले अपना छलावरण तैयार कर लें और रात हो जाने के बाद आपका दिन समाप्त होता है जिससे कि अंधेरे के कवच में आप वापस लौट आयें।

    नाजी शिकारियों ने अक्सर मेरा पीछा किया है। जर्मन निशानेबाज से मेरी एक टकराहट तीन दिन तक चली थी। यह मौत का शिकार था। यदि हम दोनों में से किसी को यह संदेह होता था कि उसकी स्थिति का दूसरे को पता चल गया है तो वह अपनी स्थिति बदल लेता था। वह मेरे जीवन के सबसे तनावभरे अनुभवों में एक था। अंततः उसने एक ऐसी चाल चली जो उसके लिए खतरनाक हो गयी।

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    हां, यह खतरनाक काम है, लेकिन जैसे-जैसे मैं गोलाबारी और जर्मन कार्यनीति की अभ्यस्त होती गयी चीजें बेहतर होती गयीं। मैं चार बार घायल हुई, दो बार तो घातक रूप से। मेरी नाक के ठीक ऊपर घाव के निशान है। यह चौथा घाव था। जब हम सेवास्तोपाल को खाली करवा रहे थे उसी दौरान यह हुआ था। चार घावों के अलावा मुझे गोले की आवाज से धक्का लगा था जिससे थोड़़े समय के लिए मेरा सुनना प्रभावित हुआ था, लेकिन मोर्चे की अग्रिम कतारों में मेरा इलाज हुआ और मैं ठीक हो गयी और कार्यवाही में डटी रही।

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    सेवास्तोपोल के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है। युद्धों के इतिहास में ऐसा कुछ नहीं है जिससे कि सेवास्तोपोल की सुरक्षा की तुलना की जा सके। हम 10 जर्मनों के मुकाबले एक रूसी थे। 1500 हवाई जहाज प्रत्येक दिन इस लम्बे समय से तकलीफें झेल रहे शहर पर उड़ते थे। हवा लगातार तोप के गोलों और गोलों के धमाकों से भरी हुई थी। धूल और बर्बादी के बादल छाये हुए थे। न तो हमारे पास पर्याप्त गोला-बारूद था और न ही योजना फिर भी हम डटे हुए थे। शहर का अस्तित्व खत्म हो गया था। वहां खंडहरों के पहाड़ के सिवाय कुछ भी नहीं बचा था। तब भी हम डटे हुए थे। खंडहरों के बीच हम लड़ रहे थे। हम प्रत्येक इमारत के पीछे से गोली चला रहे थे। प्रत्येक ढाल और ढूह के पीछे से गोली चला रहे थे।..........

    मैं सोवियत नौजवानों के प्रतिनिधि के तौर आपके देश आयी हूं। मैं उम्मीद करती हूं कि मेरी इस यात्रा के कुछ उपयोगी परिणाम निकलेंगे। मैं इस समय चुपचाप बैठे रहने से परेशान हूं जब हिटलरवादियों के विरुद्ध लड़ाई में हमारे देश के प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक चीज की जरूरत है मैं वापस जाने के लिए बेचैन हूं। बाद में जब शांति आ जायेगी तब मैं चाहती हूं कि आपके खूबसूरत देश की यात्रा करूं और बहुत सारी चीजों को देखूं जिनको देखने का अभी समय नहीं है और मैं थोड़ा बहुत लुत्फ उठाऊं और आपके लोगों को बेहतर जान सकूं। 

    लेकिन अभी इसका समय नहीं है। शायद तब आपके लोग मुझे बेहतर जान सकेंगे। इस समय मुझे थोड़ा बहुत जिज्ञासा के साथ देखा जा रहा है। मैं समाचारपत्रों की हेडलाइनों का विषय बनी हुई हूं। सोवियत संघ में मैं एक नागरिक के बतौर, एक लड़ाकू के बतौर, अपने देश के एक सैनिक के बतौर देखी जाती हूं। हां, मैं वापस जाने को बेचैन हूं। मेरे आंकडे़ में 309 हिटलरवादी हैं। लेकिन मेरे आंकड़े अभी समाप्त नहीं हुए हैं। मेरा काम अभी समाप्त नहीं हुआ है। 

    अंत में, अमेरिकी महिलाओं के लिए मेरा विशेष संदेश है। मैं चाहूंगी कि वे सर्वप्रथम हमारी माताओं के बारे में जानें। सोवियत माताएं अपने बच्चों को बेहद प्यार करती हैं। मैं जानती हूं कि मेरी मां मुझे कितना अधिक प्यार करती हैं- और तब भी वह मुझे लिखती हैंः ‘‘मैं किसी भी चीज की तुलना में तुम्हें देखना चाहती हूं लेकिन विजय होने से पहले तक तुम घर मत आओ।’’ और जब मोर्चे पर उनके पुत्र मारे जाते हैं हमारी माताएं दुख मनाने के लिए रोती नहीं। वे और कठिन मेहनत से काम करती हैं। सोवियत माताएं अपने पुत्रों को मोर्चे पर भेजती हैं। यदि आवश्यक हुआ तो पुत्रियों को भी भेजती हैं। उनकी आंखों में आंसू नहीं होते। वे जानती हैं कि यह जरूरी है। हालांकि महिलाएं हमारे सशस्त्र बलों का नियमित हिस्सा नहीं हैं। फिर भी बहुत सारी एक या दूसरे तरीके से लड़ रही हैं। ऐसे बहुत से मामले हैं जहां माताएं और बेटे मोर्चे पर छापामार लड़ाकू हो गये हैं। हमारी महिलाएं युद्ध से बहुत पहले पूर्ण समानता के आधार पर रहती रही हैं। सोवियत रूस में क्रांति के पहले दिन से ही महिलाओं को पूर्ण अधिकार मिल गये थे। सबसे महत्वपूर्ण बातों में एक यह है कि प्रत्येक महिला की अपनी विशिष्टता होती है। यही वह बात है जो उन्हें पुरुषों की तरह वस्तुतः स्वाधीन बनाती है। सोवियत महिलाओं को पूर्ण स्वाभिमान मिला हुआ है क्योंकि मानव के बतौर उनके सम्मान को स्वीकार किया जाता है। हम जो भी करते हैं, हमारा समाज महज महिला के बतौर नहीं बल्कि एक व्यक्ति के व्यक्तित्व के बतौर, एक मानव के बतौर किया जाता है। यह एक बहुत बड़ा शब्द है। हम अपने लिंग की वजह से कोई भी सीमा नहीं महसूस करतीं। यही कारण है कि इस युद्ध में महिलाओं ने बहुत स्वाभाविक तौर पर पुरुषों के बगल में अपना स्थान ले लिया है। हमारे पास इसकी परम्परा भी है जिसको हम जारी रखे हुए हैं।....हमारी महिलाओं ने सिद्ध कर दिया है कि वे पुरुषों की तरह मशीनों और तकनीक पर भी दक्षता हासिल कर सकती हैं, कि हमारे पास पुरुषों की तरह ही इच्छा शक्ति और दृढ़ निश्चय है, कि हम अपने दुश्मनों को उसी तरह मार सकते हैं जैसे पुरुष मार सकते हैं। बहुत सारे अमरीकियों को यह आश्चर्यजनक लगता है कि महिलायें लड़ाई में जायें। वे सोचते हैं कि ऐसा लगता है कि युद्ध ने उनको एक ऐसे विशिष्ट किस्म के जीव में तब्दील कर दिया है जो पुरुष और महिला के बीच का है। लेकिन हम अब भी स्त्री हैं। हम अभी भी सुंदर कपड़े पहन सकती हैं और उचित समय व स्थान पर अपने नाखूनों में पालिश लगा सकती हैं। हम पहले की तरह ही महिला और मानव बनी हुयी हैं। कुल बात यह है कि युद्ध ने हमें और ज्यादा कठोर बना दिया है। 

    लड़ाई के मोर्चे के पीछे महिलाओं ने लगभग पूर्णतया मशीनों में पुरुषों का स्थान ले लिया है। वे ताला बनाने वाली, टर्नर, लोकोमोटिव इंजीनियर, खनिक हैं। इस समय वे सभी वे काम कर रही हैं जिन्हें पुरुषों की विशेषज्ञता माना जाता था- और वे उत्पादकता को 5 गुना से 10 गुना तक बढ़ाने में भी सफल रही हैं। वे जानती हैं कि वे उसी उद्देश्य के लिए काम कर रही हैं, जिसके लिए हम कर रहे हैं यानी अपनी विजय के लिए, अपनी सेना के लिए, अपनी अपनी आजादी के लिए। 

    और हमारे साझे ध्येय के लिए लड़के(नुमा) वाली सभी रूसी महिलाओं की तरफ से मैं ख्वाहिश व्यक्त करती हूं कि अमेरिकी महिलाओं को हमारी महिलाओं की तरह मशीनों पर पुरुषों का स्थान लेना चाहिए, कि हमारी महिलाओं की तरह अमेरिकी महिलाओं को समझना चाहिए कि उनके पुत्र और पति मोर्चे पर सार्वभौमिक आजादी के लिए लड़ रहे हैं कि उन्हें हमारे साझे दुश्मन की पराजय- हिटलरवाद को खत्म करने में - तेजी के साथ और मदद करनी चाहिए। और ऐसी मदद सिर्फ दूसरे मोर्चे को खोलने के जरिए ही हो सकती है। अमेरिकी महिलाओं को यह समझना होगा कि यदि इस समय दूसरा मोर्चा नहीं खोला जाता, तो संयुक्त राज्य अमेरिका को बाद में और बड़ी तकलीफों तथा नुकसान का सामना करना पड़ेगा। 

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