अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

मालिक के दुर्व्यवहार ने कर्मचारी को बनाया कातिल


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    उत्तराखण्ड के नैनीताल जिले के रामनगर कस्बे में भारत गैस एजेंसी के मालिक की 22 जून को उसके गैस गोदाम में कार्यरत एक कर्मचारी नरेन्द्र सिंह कडाकोटी ने चाकू मार कर जान ले ली। अखबारों के मुताबिक गैस एजेंसी के मालिक ने कर्मचारी नरेन्द्र सिंह को एक दो बार सिलेण्डरों से गैस निकालने के आरोप में पकड़ा था और उसे नौकरी से निकाल दिया था। उससे पहले मालिक ने उसकी मोटरसाइकिल रख ली थी तथा उसे हिसाब के रूप में पैसे भी कम दिये।

    कर्मचारी नरेन्द्र सिंह अपनी मोटरसाइकिल छुड़वाने के लिए पुलिस के पास भी गया लेकिन पुलिसवालों ने उसे डांट डपटकर भगा दिया और मालिक से मिलने को कहा। हताश नरेन्द्र सिंह 22 जून को मालिक के पास गया और अपनी मोटरसाइकिल देने को कहा। मालिक द्वारा मना करने पर उसने अपनी जेब में रखे चाकू से मालिक पर वार किये और बाद में मालिक की अस्पताल जाते समय मौत हो गयी। नरेन्द्र सिंह ने पुलिस के सामने खुद समर्पण कर दिया।

    जब इस घटना के सम्बन्ध में दुकानों में काम कर रहे कर्मचारियों से बात की गयी तो घटना की तह में कुछ और बातें भी निकल कर सामने आयीं। जब मालिक ने उसको गैस चोरी के आरोप में पकड़ा तो उसके साथ मारपीट की थी और उसे धूप में मुर्गा बनाया था। नरेन्द्र सिंह अपने साथ किये गये इस दुव्र्यवहार से भी काफी खफा था। साथ ही दुकानों के कर्मचारियों ने दुकान मालिकों द्वारा कर्मचारियों के आम उत्पीड़न व अमानवीय शोषण की बात भी कही। कर्मचारियों के साथ दुकान मालिकों का व्यवहार काफी खराब रहता है और उनसे घर के तमाम छोटे मोटे कामों के अलावा कपड़े तक धुलवाने की बात सामने आयी। 

    इस घटना ने दरअसल दुकान कर्मचारियों के साथ हो रहे अमानवीय शोषण व उत्पीड़न की परतों को उघाड़कर रख दिया। दुकान कर्मचारियों का कोई संगठन न होने की स्थिति में कर्मचारी अपने साथ हो रहे शोषण व उत्पीड़न को किसी से कह भी नहीं सकते। श्रम विभाग व प्रशासन का रुख तो हमेशा उनके खिलाफ ही रहता है। श्रम विभाग के होते हुए भी न तो उनको उचित वेतन मिलता है और न ही छुट्टियां। अगर वे अपनी किसी शिकायत को लेकर पुलिस के पास जाते हैं तो वहां भी पुलिस मालिक का ही पक्ष लेती है।

    दरअसल नरेन्द्र सिंह कडाकोटी भी इसी स्थिति का शिकार हुआ। जब मालिक ने उसे गैस चोरी के इल्जाम में पकड़ा तो उसने नरेन्द्र सिंह को सबके सामने मारा पीटा और धूप में उसे मुर्गा बनाया। इसके बाद  मोटरसाइकिल जब्त करके और उसे वेतन के कम रुपये देकर मालिक ने नरेन्द्र सिंह कडाकोटी के दिल में उस घृणा को बहुत बढ़ा दिया जो सालों से मजदूरों व कर्मचारियोें में अपने मालिकों के प्रति उनके द्वारा किये जा रहे शोषण व उत्पीड़न से पैदा होती है। किसी संगठन के न होने की स्थिति में उसने यह कदम उठाया और मालिक को मारकर बदला ले लिया। अगर दुकान कर्मचारियों का कोई संगठन होता तो शायद इस स्थिति से बचा जा सकता था और नरेन्द्र सिंह को कातिल न बनना पड़ता। गैस एजेंसी में काम कर रहे अन्य कर्मचारियों के मुताबिक नरेन्द्र सिंह कडाकोटी का व्यवहार काफी अच्छा था और वह रोज गोदाम से पैसे जमा करने के लिए एजेंसी आता था तो सभी से बात करता था। 

    बेशक नरेन्द्र सिंह द्वारा किये गये इस कृत्य को उचित नहीं ठहराया जा सकता लेकिन कोई मजदूर ऐसे व्यवहार की तरफ तभी बढ़ता है जब उसे अपने शोषण-अन्याय से लड़ने का और कोई रास्ता नजर नहीं आता। शासन-प्रशासन व सरकारेें-पुलिस जितना ज्यादा पूंजीपरस्त होती जायेंगी मजदूरों का आक्रोश संगठित-स्वतः स्फूर्त हिंसा की ओर बढ़ने को उतना अधिक मजबूर होगा। नरेन्द्र सिंह द्वारा अंजाम दिये गये घटनाक्रम को इसी कड़ी में देखने की जरूरत है। एक पाठक, रामनगर

Labels: मजदूरों के पत्र


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