अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

महिन्द्रा के तीनों प्लांटों व ऐरा मजदूरों का साझा संघर्ष जारी है


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महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा- महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के मजदूरों के विगत 26 दिन धरने के बाद 93 मजदूरों को प्रबंधन ने वापस काम पर बुला लिया है। परन्तु 60 मजदूरों को ‘काम नहीं है’ कह कर 26 जून 2017 से गेटबंद कर दिया गया है। इनमें से ज्यादातर ऐसे मजदूर हैं जिन्होंने प्रबंधन के मनमुताबिक महाराष्ट्र की शिवसेना की यूनियन के साथ हुए समझौते पर सहमति जताई थी। ये 60 मजदूर भी ए एल सी कार्यालय रुद्रपुर में धरने पर बैठे हैं। ए.एल.सी. महोदय मजदूरों को धरना खत्म करने को कह रहे हैं। 

    महिन्द्रा के तीनों प्लांटों के मजदूरों ने किच्छा में जुलूस प्रदर्शन किये हैं जिससे प्रशासन से सांठ गांठ कर प्रबंधन ने फैक्टरी परिसर से 200 मी. तक धारा 144 लगवा दी है। इससे पूर्व कार्यबहाली का छलावा कर प्रबंधन केवल एक हफ्ते ही काम करवा रहा है। इस बीच मजदूरों ने अपने आंदोलन का एक वीडियो बनाकर यू ट्यूब पर अपलोड कर दिया है और कारपोरेट को भी भेज दिया है। इससे प्रबंधन काफी परेशान है। आंदोलन क्रमिक अनशन व धरने के रूप में चल रहा है। इसके अलावा मोर्चा द्वारा लिये गये कार्यक्रमों में महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा के मजदूरों की सक्रिय भागीदारी रही। 

महिन्द्रा सीआईआई- महिन्द्रा सीआईआई के दोनों प्लांटों के मजदूर भी यूनियन को मान्यता दिलवाने और मांगपत्र पर वार्ता करवाने के लिए संघर्षरत हैं। उनका संघर्ष धरना, क्रमिक अनशन, कैंटीन बहिष्कार, काला फीता व मौन व्रत के रूप में चल रहा है। चार मजदूर नेताओं के निलम्बन के दौरान घरेलू जांचकर्ता का मजदूरों द्वारा विरोध (प्रबंधन के प्रति पक्षधरता के खिलाफ) किया जा रहा है। डीएलसी में वार्ता अभी नहीं चल रही है। डीएलसी का कहना है कि दोनों पक्ष अपना-अपना प्रयोजन दे दो तभी वार्ता होगी। इस पर प्रबंधन ने 4500 रुपये (1500 रुपये प्रतिवर्ष) तीन साल के लिए व मजदूर पक्ष ने एक साल का 6 हजार दो साल का 9हजार तीन साल का 12 हजार रुपये बढ़ोत्तरी की बात की है। 

    इस बीच प्रबंधन द्वारा 8 जुलाई को द्विपक्षीय वार्ता की गयी जो बिना किसी परिणाम के समाप्त हो गयी। अब प्रबंधन का कहना है, कि 15 जुलाई को आखिरी बार वार्ता होगी। उसके बाद कोई बात नहीं करेंगे। इससे पूर्व मजदूरों ने 3 जुलाई को शाम 5 बजे कम्पनी के गेट के बाहर प्रबंधन का पुतला चैकी पुलिस के विरोध के बावजूद फूंका। चार निलम्बित मजदूर नेताओं की घरेलू जांच चल रही है। जिसकी तीन तारीख लग चुकी हैं। मजदूरों का कहना है कि पहले हमें कम्पनी का स्थाई आदेश (स्टैण्डिंग आर्डर) दिया जाये तब ही हम जांच कार्यवाही में सहयोग कर सकते हैं। इसके लिए प्रबंधन टाल मटौली कर रहा है। अब 19 जुलाई तक स्टैण्डिग आर्डर देने की बात कर रहा है। इसी बीच प्रबंधन ने ए एल सी के माध्यम से मजदूर प्रतिनिधियों को यह कह कर कि आपका मांगपत्र डीएलसी चला गया है धरना हटाने का नोटिस 11 जुलाई को दे दिया है। जबकि मजदूरों का धरना यूनियन की मान्यता के लिए चल रहा है। महिन्द्रा सीआईई के दोनों प्लांटों के मजदूरों ने भी मोर्चों के द्वारा लिए गये कार्यक्रमों मे बढ़चढ़ कर भागीदारी की है। अभी इनका संघर्ष जारी है। 

ऐरा- सिडकुल पंतनगर में ऐरा के मजदूरों को चार माह से वेतन न मिलने, 1 जुलाई से ट्रांसफर, फैक्टरी में बिजली, पानी व साफ सफाई नहीं होने से संबंधित संघर्ष के अलावा यूनियन का आंतरिक संघर्ष (यूनियन को बहुमत के हिसाब से न चलाने, कार्यकारिणी  व आम सभा की मीटिंगों का महत्व को न समझना आदि) चल रहा है। कम्पनी पलायन करने की योजना बना रही है। ऐसे में संघर्ष बढ़ाने के लिए दिक्कतें हैं। इसके अलावा मंत्री मेटालिक्स में मांग पत्र के लिए विगत कई सालों से संघर्ष चल रहा है। ऐसे ही आॅटोलाइन व एलजीबी कम्पनियों में भी संघर्ष चल रहा है।

    कलेक्ट्रेट रुद्रपुर में जिला प्रशासन द्वारा विगत डेढ़ दो साल से धारा 144 लगाकर मजदूरों को धरना प्रदर्शन करने से वंचित किया जा रहा है। जिला प्रशासन द्वारा हिटलरी तेवर अपनाकर मजदूरों के लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचला जा रहा है। हालांकि भाजपा, कांग्रेस सहित तमाम राजनीतिक पार्टियों के धरने बदस्तूर कलेक्ट्रेट में चलते रहते हैं, इनसे जिला प्रशासन को कोई भी समस्या नहीं है। इससे साफ जाहिर है कि ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन को मजदूरों के ही धरना प्रदर्शन से दिक्कत है। इसकी भी मजबूत जमीन रही है। विगत समयों में मजदूर विशाल जमावडे़ रैली की शक्ल में कलेक्ट्रेट में एकत्रित होकर अपना आक्रोश जताते रहे हैं। जिला प्रशासन इसी असहज स्थिति से बचना चाह रहा है। 

    ऐरा मजदूरों को विगत 4 माह से वेतन न मिलने से मजदूरों के बच्चे भुखमरी की स्थिति में पहुंच चुके हैं और उनका स्कूल छूटने की स्थिति उत्पन्न हो गयी। मरता क्या न करता की स्थिति में मजदूरों के बच्चों को सड़क पर उतरना पड़ा। इंकलाबी मजदूर केन्द्र के साथियों के निर्देशन पर 30 जून 2017 से धारा-144 को तोड़कर छोटे-छोटे बच्चे व महिलायें कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे हैं। 4 जुलाई 2017 की मजदूर महापंचायत व महिलाओं-बच्चों के आंदोलन के दबाव में एएलसी रुद्रपुर को वेतन रिकवरी को आरसी काटनी पड़ी। परन्तु जिला प्रशासन द्वारा आरसी की वसूली करने की हीलाहवाली जारी है। 5 जुलाई 2017 को महिलाओं व बच्चों ने अन्य यूनियनों के साथ में मिलकर रुद्रपुर शहर में जुलूस निकाला, 7 जुलाई को मानव श्रृंखला बनाकर कलेक्ट्रेट का घेराव, 12 जुलाई को कुमाऊं कमिश्नरी नैनीताल में प्रदर्शन किया। 

    जिला प्रशासन इस हद तक नीच हरकतों में उतर आया है कि उसने कलेक्ट्रेट स्थित सार्वजनिक शौचालय में ताला लगा दिया ताकि महिलायें व बच्चे धरना खत्म कर दें। बच्चों ने इसे मुद्दा बनाया और तुरंत इसका भंड़ाफोड़ किया। जिला प्रशासन महिलाओं व छोटे-छोटे बच्चों को खुले में शौच करने को मजबूर करने का घृणित कृत्य कर रहा है। अगले ही दिन से शौचलाय का ताला खोलना पड़ा। पुलिस द्वारा जेल भेजने की धमकी व डीएम, एसडीएम की नसीहतों का बच्चों व महिलाओं पर कोई असर नहीं हुआ। धारा 144 तोड़कर अभी भी कलेक्ट्रेट में धरना जारी है। 

    बच्चों व महिलाओं के द्वारा धारा 144 तोड़कर जिला प्रशासन को कानून का पाठ पढ़ाया जा रहा है। इसका सिडकुल की यूनियनों के भीतर अत्यन्त सकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।   

    इन सब संघर्षों को एकजुट करने के लिए मजदूरों के मोर्चे ‘सिडकुल संयुक्त मोर्चा’ द्वारा पहलकदमी लेकर 4 जुलाई को ए.एल.सी. कार्यालय पर मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया है। इसके प्रचार के लिए पोस्टर व पर्चा निकाला गया था। 

    मौजूदा समय में मजदूर आंदोलन में मजदूर अपनी समस्याओं के लिए यूनियन बनाते हैं। उसके माध्यम से अपनी मांगें प्रबंधन के सामने रखते हैं। प्रबंधन इसके विरोध में श्रम विभाग व प्रशासन से मिलकर मजदूरों की एकता व मनोबल तोड़ने के लिए तमाम तिकड़म भिड़ाने लगते हैं। श्रम विभाग वार्ताओं में कोई नतीजा नहीं निकाल पाया है। और मामलों को ट्रिब्यूनल व लेबर कोर्ट में डालकर लम्बा खींच कर खत्म करवाने का काम करता है। प्रबंधन भी मजदूर नेताओं को निलम्बित करता है। झूठे मुकदमे लगाता है। 

    ऐसे में मजदूर आंदोलन को आज के समय में नये तौर तरीके निकालने होंगे। एक फैक्टरी के संघर्ष को संकुचित दायरे से आगे बढ़ाते हुए व्यापक तौर पर सभी मजदूरों व अन्य मेहनतकशों तक फैलाने की जरूरत है। साथ ही प्रबंधन व पूरी व्यवस्था का भण्ड़ाफोड़ कर शासन व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़ा करने की जरूरत है कि ये पूंजीपतियों के लिए काम करते हैं या मजदूरों के पक्ष में काम करते हैं। रुद्रपुर संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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