अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

पं.बंगाल साम्प्रदायिक हिंसा, संघ व मीडिया


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    पिछले दिनों पं. बंगाल का उत्तरी 24 परगना जिले का भदुरिया ब्लाॅक व बशीरहाट साम्प्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गये। हिंसा की शुरूआत एक 17 वर्षीय हिंदू युवक द्वारा फेसबुक पर मोहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट से हुई। इसके पश्चात कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू बस्तियों पर हमला बोला गया और कई घरों में आग लगा दी गयी। एक व्यक्ति की इस हिंसा में मृत्यु हो गयी। 

    पं.बंगाल की यह घटना दिखलाती है कि देश में संघी ताकतों की बढ़त के साथ मुस्लिम साम्प्रदायिकता व कट्टरपंथ भी बढ़ रहा है। दोनों ही तरह की साम्प्रदायिकता अल्पसंख्यक व बहुसंख्यक दरअसल एक दूसरे को खाद पानी मुहैय्या कराती है। एक दूसरे की बढ़ती में मदद करती हैं। इसीलिए दोनों तरह की साम्प्रदायिकता का विरोध जरूरी है। आज देश में हिन्दुत्व साम्प्रदायिकता आक्रामक है। और इसको उछालने वाली संघी ताकतें सत्तासीन हैं। 

    पं. बंगाल की इस हिंसा को जो फिलहाल स्थानीय पैमाने की थी और जिस पर देर से ही सही पं. बंगाल सरकार ने काबू पा लिया। इस हिंसा का इस्तेमाल कर इसे पूरे बंगाल व देश के दूसरे हिस्से में हिंदू आबादी को भड़काने के जरिये के रूप में इस्तेमाल करने में संघी ताकतों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर बंगाल हिंसा की झूठी तस्वीरें प्रचारित कर देश भर में दंगों को भड़काने का प्रयास किया। गनीमत यह रही कि इनकी फर्जी पोस्टें समय रहते उजागर हो गयीं और यह हिंसा फैलने से रुक गयी। फिर भी इन संघी ताकतों की करतूतें यह दिखा देती हैं कि हिंसा के इन सौदागरों को कोई लाज शर्म नहीं है। ये कहीं आग लगी हो तो उसे बुझाने के बजाय और भड़काने का ही काम करते हैं। 

    भदतोष चटर्जी नामक व्यक्ति ने 2015 की भोजपुरी फिल्म ‘औरत खिलौना है’ की एक फोटो जिसमें एक भीड़ एक युवती की साड़ी खींच रही है को अपनी फेसबुक पर लगा उसे बंगाल में हिन्दू महिला के अपमान के तौर पर प्रदर्शित किया। इसी पोस्ट को खुद को भाजपा हरियाणा के राज्य कार्यकारिणी सदस्य बताने वाले विजेता मलिक ने इंस्टाग्राम पर शेयर कर बंगाल में हिन्दू औरतों की इज्जत से खिलवाड का वर्णन किया। इसी तरह गीता एस कपूर नाम से फेसबुक पर बांग्लादेश में हिन्दू महिला से हिंसा की फोटो पोस्ट कर उसे बंगाल के हाल के दंगों में घायल महिला के बतौर पेश किया। कपूर खुद को भाजपा महिला मोर्चा की नेता बताती हैं। इसी तरह अन्य भड़काऊ पोस्ट भी भेजी गयीं। (स्रोत -अल्ट न्यूज)

    आज सरकार की चापलूसी में डूबा पूंजीवादी मीडिया भी बंगाल की इस हिंसा की आग में घी डालने में पीछे नहीं था। जी न्यूज ने बंगाल को भारतीयों के लिए असुरक्षित व मुस्लिमों के लिए स्वर्ग घोषित कर दिया। पोस्ट कार्ड न्यूज ने पं.बंगाल को मिनी पाकिस्तान घोषित करते हुए कहा कि यहां कोई भी बम बनाकर जहां चाहे फेेंक सकता है। उसने बंगाल को आतंकवाद, जिहाद व लूट का हब घोषित कर दिया। एएमपी ने कहा कि बंगाल और भारत के नियमों की किताब अलग-अलग है इसलिए जब आप बंगाल आये तो बंगाल के नियमों का पालन करें। (स्रोतः अल्ट न्यूज)

    इस तरह मीडिया ने बंगाल को व ममता शासन को हिंदुओं के लिए असुरक्षित करार देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। 

    इस मामले में संघी कार्यकर्ता व पूंजीवादी मीडिया आज एक ही जमीन पर खड़े हो गये हैं। इन्हें झूठी तस्वीर, खबरें, वीडियो प्रसारित कर मुस्लिमों के खिलाफ, अपनी विपक्षी पार्टियों के खिलाफ दुष्प्रचार करने में कोई शर्म नहीं रह गयी है। ये चीख चीख कर कह रहे हैं कि बंगाल हिंसा के लिए क्यों नाट इन माई नेम के बैनर तले प्रदर्शन क्यों नहीं हो रहे जैसे जुनैद के मामले में हुए थे। 

    पं.बंगाल की साम्प्रदायिक हिंसा व मुस्लिम साम्प्रदायिक तत्वों की निन्दा की जानी चाहिए। दंगे के दोषियों को सजा भी मिलनी चाहिए। पर इसके साथ ही दंगों की आग में घी डालने वाले संघी कार्यकर्ताओं के साथ मीडिया ग्रुपों को भी कठघरे में खड़ा करना जरूरी है क्योंकि ये तो एक चिंगारी को भड़का पूरे देश में ही आग लगाना चाहते हैं। 

    ये वही लोग हैं जो हरियाणा में बजरंग दल का झण्डा लिये अमरनाथ आतंकी हमले का विरोध करते करते मुस्लिमों को पीटने लग जाते हैं। वे मुस्लिमों से जबरन ‘भारत माता की जय’ कहलवाने लगते हैं और खुद सबकी राष्ट्रभक्ति चेक करने पर उतारू हो जाते हैं। 

     पर आज जब देश की सत्ता पर स्वयं आग लगाने वाले बैठे हों तो वे अपने चहेतों पर कार्यवाही कैसे कर सकते हैं। इनको तो देश की न्यायप्रिय जनता ही सबक सिखा सकती है और वक्त आने पर जरूर सिखायेगी। 

Labels: लेख


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