अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

वर्गीय एकता को व्यापक बनाना होगा


अरहेस्टी मजदूरों का संघर्ष


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    बावल(हरियाणा)/ अरहेस्टी इण्डिया लि. बावल (हरियाणा) के 170 निलम्बित मजदूरों ने दिनांक 6 जुलाई 2017 को रेवाड़ी(हरियाणा) के उपायुक्त कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन कर बिना शर्त काम पर वापस लिये जाने की मांग की। हालांकि प्रशासन ने एक बार फिर कोरा आश्वासन दिया, जिससे मजदूरों में तीखा आक्रोश है। प्रदर्शन में गुड़गांव, मानेसर, धारूहेड़ा, बावल के बहुत से यूनियन प्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की। 

    गौरतलब है कि विगत 11 जून को अरहेस्टी के प्रबंधन ने यूनियन के उपप्रधान पर गुण्ड़ों से जानलेवा हमला करवाया था। इस हमले में मजदूर नेता की दोनों टांग टूट गयी, एक हाथ टूट गया एवं सिर में भी गंभीर चोट है। मजदूरों ने प्रबंधकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करवाई, लेकिन अपनी वर्गीय पक्षधरता स्पष्ट करते हुए पुलिस ने कोई कार्यवाही नहीं की। इस पर आक्रोशित मजदूर 21 जून को काम बंद कर अपनी-अपनी मशीनों पर बैठ गये। उन्होंने दिन-रात की बैठकी हड़ताल शुरू कर दी। इस पर प्रबंधन और पुलिस प्रशासन ने मिलकर और भी अधिक दमनात्मक रुख अपनाया और 24 जून की रात 12 बजे एस.पी. की कमान में आंसू गैस की गाड़ियां, रबड़ की बुलेट, लाठियां, हेलमेट....इत्यादि से सुसज्जित 500 से भी अधिक पुलिसकर्मियों ने हड़ताल पर बैठे मजदूरों पर हमला बोल दिया। उन्हें बुरी तरह मारा-पीटा और गिरफ्तार कर लिया। हालांकि जनदबाव में मजदूरों को निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया, लेकिन प्रबंधन ने 170 मजदूरों को निलंबित कर दिया। 

    पुलिस-प्रशासन और प्रबंधन का खुला गठजोड़ खुली गुण्डागर्दी पर उतारू है। पूंजीपति किसी भी हद तक जाकर अरहेस्टी से यूनियन को  खत्म कर देना चाहता है। 

    देश-दुनिया का पूंजीपति आज अपने मुनाफे की राह में किसी भी बाधा को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। यूनियन बनाना मजदूरों का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन पूंजीपतियों की निगाह में मजदूरो के अधिकार और देश के संविधान की कोई कद्र नहीं है। वह तो केन्द्र में मौजूद अपनी सरकार के जरिये श्रम कानूनों को विघटित कर कानूनी रूप से भी मजदूरों को अधिकारविहीनता की स्थिति में धकेल रहा है। आज छुट्टे पूंजीवाद के इस दौर में मजदूर आंदोलन के दमन के लिए पूरी राज्य मशीनरी का एकदम नंगे रूप में उतर आना सामान्य बनता जा रहा है। मारुति सुजुकी, मानेसर के नेतृत्वकारी मजदूरों को उम्रकैद इसका साफ उदाहरण है। आज अरहेस्टी, आॅटोमैक्स, मार्क एग्जास्ट, आइसिन....इत्यादि कंपनियों के आंदोलनरत मजदूर राज्य मशीनरी के पूंजीवादी एवं दमनात्मक चरित्र से बखूबी वाकिफ हो रहे हैं। दूसरी तरफ सीटू, एटक, एच.एम.एस. सरीखे केन्द्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन पूंजीपति वर्ग के इस हमले के सामने असहाय साबित हो रहे हैं। 

    आज छुट्टे पूंजीवाद के इस दौर में पूंजीपति वर्ग के हमले का मुकाबला मजदूर महज एक फैक्टरी के स्तर पर और उसमें भी स्थायी, कैजुअल और ठेका मजदूर के बंटवारे के साथ नहीं कर सकते हैं। अपने बीच के इन बंटवारों को मिटाकर एवं वर्ग के स्तर पर संगठित होकर ही मजदूर पूंजीपति वर्ग के हमलों का मुकाबला कर सकते हैं। अरहेस्टी समेत तमाम अन्य फैक्टरियों के आंदोलनरत मजदूरों को वर्गीय एकता के महत्व को समझना होगा।              गुड़गांव संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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