अंक : 16-31 JUL, 2017 (Year 20, Issue 14)

आॅटोमैक्स विनौला के मजदूरों का गेट बन्द कर यूनियन तोड़ने की साजिश


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    आॅटोमैक्स कम्पनी विनौला उद्योगिक क्षेत्र में 2007 से उत्पादन कर रही है। यह पहले लगभग 1984 से 2007 तक गुड़गांव में उत्पादन करा रही थी। यह कम्पनी ओमैक्स ग्रुप की कम्पनी है। ओमैक्स ग्रुप में 6-7 प्लांट हैं। ओमैक्स धारूहेडा, आॅटोमैक्स विनौला, ओमैक्स मानेसर व एक प्लांट बावल में है। कम्पनी रेलवे व अन्य सरकारी कम्पनियों के लिये पार्ट्स बनाती है। कम्पनी में काम काफी कठिन है लेकिन वेतन काफी कम या कहें न्यूनतम वेतन के लगभग ही है। मजदूरों के साथ काफी बुरा व्यवहार किया जाता है। कम वेतन अधिक काम व मैनेजमेंट के व्यवहार से तंग आकर आॅटोमैक्स के मजदूरों ने 2011 में यूनियन बनाई। आॅटोमैक्स की यूनियन का रजिस्ट्रेशन हिन्द मजदूर सभा ने करवाया था। कम्पनी में इस समय 300 के करीब स्थायी मजदूर हैं। 2 महीने पहले कम्पनी ने ठेका मजदूरों को काम से निकाल दिया था जो 150 करीब थे। उस समय यूनियन कोई विरोध नहीं का पाई थी। ये 10 से 15 साल पुराने ठेका मजदूर थे।

    कम्पनी ने कुछ समय पहले तालाबंदी की सूचना श्रम विभाग को दी थी। कुछ स्थानीय लोगों से सुनने में आता है मालकिन मैडम यहां होटल खोलना चाहती हैं। क्योंकि यह कम्पनी राष्ट्रीय राजमार्ग-8 व आगरा-द्वारका राष्ट्रीय राजमार्ग के चैक के पास स्थित है। यूनियन का मानना है कि मालिक यूनियन खत्म करना चाहता है ताकि बिना यूनियन के कम्पनी चलाई जाये। ताकि सभी कामों के लिये ठेका मजदूर रखकर भारी मुनाफा कमाया जा सके। आटोमैक्स कम्पनी में 10-20 साल पुराने मजदूर हैं लेकिन ज्यादातर मजदूरों का वेतन 10 से 30 हजार के आसपास है।

    जब से मोदी सरकार आई है तब से मालिकों के हौंसले सातवें आसमान पर हैं। वे हर जगह यूनियन को तोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। कुछ समय पहले आॅमैक्स धारूहेडा में यह प्रयास हो चुके हैं। यहां भी 15-20 साल पुराने 388 ठेका मजदूरों को एक झटके में निकाल दिया था तब भी ट्रेड यूनियनें कोई प्रतिरोध नही कर पाई थीं। 23 जून को आटोमैक्स विनौला में चुनाव हुये और 24 जून को मजदूरों का गेट बन्द कर दिया गया। 24 जून को ही रात 12 बजे अरहेस्टी बावल के मजदूरों पर लाठी चार्ज किया गया। 

    यहां भी हिन्द मजदूर सभा की यूनियन थी। आज हर जगह मालिक तोड़-फोड़ में लगे हैं। हर जगह मजदूरों का दमन जारी है। आज ट्रेड यूनियनों को मिलजुल कर संघर्ष करना होगा ताकि मालिकों को पीछे धकेला जा सके। आॅटोमैक्स के लगभग सभी स्थायी मजदूरों ने ग्रामीण बैंक से कर्ज ले रखा है जो शादी, बच्चों की पढ़ाई या मकान के लिए लिया गया था। मालिकों ने अचानक कम्पनी बंद करने की सूचना देकर मजदूरों को परेशान कर दिया है। ज्यादातर मजदूर 30-45 साल के हैं इनको अब कहां काम मिलेगा? कैसे कर्ज चुकायेंगे? कम्पनी मालिक की मनमानी से मजदूर काफी परेशान हैं। 

    आज हर यूनियन की यह समस्या है कि वह केवल स्थायी मजदूरों की यूनियन है जो ज्यादातर संख्या में कम होते हैं। ठेका मजदूर यूनियन से बाहर रहते हैं इसलिए आजकल ज्यादातर यूनियनें कमजोर हैं। ठेका मजदूरों को साथ लिए बगैर वे मालिकों से टक्कर नहीं ले सकतीं और न ही वे कोई मजबूत संघर्ष कर सकती हैं। आज जरूरत बनती है कि सभी मजदूरों को यूनियन का सदस्य बनाया जाये और मिलजुल कर संघर्ष किया जाये। 

    आॅटोमैक्स के मजदूर 24 जून से ही न्याय की आस में 24 घण्टे कम्पनी गेट पर बैठे हैं। मालिक पुलिस को पैसा खिलाकर कुछ मशीन व माल निकाल चुका है। पुलिस ने मजदूरों पर लाठीचार्ज करके मशीनें व माल निकलवाकर मालिकपरस्ती का ही परिचय दिया है। कम्पनी में रेलवे का प्रोडक्शन जारी है जिसमें ठेकेदार के 500 मजदूर लगे हैं। 12 जुलाई को ट्रेड यूनियनों की गुड़गांव के कमला नेहरू पार्क में बैठक है जिसमें आगे के संघर्ष की रणनीति बननी है।  गुड़गांव संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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