अंक : 01-15 Sep, 2017 (Year 20, Issue 17)

रक्षाबंधन के नाम पर तुगलकी फरमान


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    भारत में जब से केन्द्र में नरेंद्र मोदी सरकार सत्तासीन हुई है तब से उसने मजदूरों-कर्मचारियों पर हमला बोला हुआ है। जहां एक ओर यह मजदूरों के ऊपर हमलावर है वहीं दूसरी ओर अपने संघी फासीवादी विचारों को सबके बीच स्थापित करने के लिये वह पूरा जोर लगा रही है। शिव भक्ति के नाम पर कांवड़ यात्रा को बढ़ावा देने से लेकर दशहरा, दिवाली आदि सभी हिन्दू त्योहारों का वह पूरा इस्तेमाल कर रही है। अपनी हिन्दुत्व की राजनीति के प्रभाव में मजदूरों-कर्मचारियों के एक हिस्से को भी लाने में उसे सफलता मिली है।

    इसी कड़ी में जब पिछले दिनों रक्षाबंधन का त्यौहार आया तो केन्द्रशासित राज्य दमन और द्वीव के संघी प्रशासक प्रफुल्ल कोडाभाई पटेल के निर्देश से एक सर्कुलर जारी हो गया कि 7 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन सभी ऑफिस-विभाग खुले रहेंगे और मिल जुलकर उचित समय पर रक्षाबंधन का त्यौहार मनायेंगे जिसके तहत सभी महिला कर्मचारी पुरुष सहयोगियों को राखी बांधेंगीं। इसके साथ ही कोई कर्मचारी अनुपस्थित न रहे इसके लिये उपस्थिति रिपोर्ट सरकार के पास भेजे जाने का भी फरमान सुना दिया गया।

    हालांकि 24 घण्टे के भीतर दूसरा नोटिफिकेशन जारी कर इस सर्कुलर को रद्द कर दिया गया। पर इस सर्कुलर के पीछे छिपी संघी मानसिकता ने सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों को परेशान कर दिया। यहां तक कि पुरुष-महिला, अधिकारी-कर्मचारी सभी इससे खफा थे। एक महिला अधिकारी ने कहा कि यह एकदम बकवास कदम है। सरकार कैसे निर्देशित कर सकती है कि मैं किसको राखी बांधू, किसको नहीं बांधू।

    संघ की पाठशाला में पढ़े गुजरात के पूर्व गृह मंत्री रह चुके प्रफुल्ल कोड़ाभाई पटेल अच्छी तरह जानते हैं कि कैसे संघी स्कूलों शिशुमंदिरों-विद्यामंदिरों में जबरन लड़के-लड़कियों को न केवल भाई-बहन बुलवाया जाता है बल्कि राखी भी बंधवाई जाती है। पटेल सरकारी विभाग को संघी स्कूल में बदलना चाहते थे। वे सोचते थे कि बच्चों की तरह कर्मचारी भी एक दूसरे को हिन्दू भाई-बहन मानने लग जायेंगे।

    ऐसा तुगलकी फरमान जारी करते हुये वे यह भी भूल गये कि ढेरों कर्मचारी दूसरे धर्मां के भी हो सकते हैं जिन पर हिन्दू त्यौहार थोपा नहीं जा सकता। या शायद जानबूझकर वे दूसरे धर्म वालों को भी इस त्यौहार को मनवाना चाहते हैं। अगर योगी आदित्यनाथ मदरसों में राष्ट्रगीत गाने व उसकी रिकार्डिंग का आदेश दे सकते हैं, मोहन भागवत रक्षाबंधन को राष्ट्रीय महत्व का त्यौहार घोषित कर सकते हैं तो पटेल रक्षाबंधन जबरन क्यों नहीं मनवा सकते।

    लड़कियों-महिलाओं को कमजोर मानने, उनकी रक्षा भाइयों के हवाले करने वाले इस त्यौहार का महिमामंडन कर भाजपा-संघ खुद ही अपना चरित्र उजागर कर रहे हैं कि वे कितने महिला विरोधी हैं।              -एक पाठक

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