अंक : 01-15 Sep, 2017 (Year 20, Issue 17)

महिन्द्रा सी.आई.ई. के मजदूरों का वेतन वृद्धि व यूनियन की मान्यता का समझौता सम्पन्न


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    101 दिन चले संघर्ष के बाद 26 अगस्त को महिन्द्रा सी.आई.ई. के मजदूरों का समझौता हो गया है। समझौता ए.डी.एम. व ए.एल.सी. की मध्यस्थता में हुआ। समझौते के अनुसार मुख्यतः वेतन वृद्धि 3 साल के लिए 5000 रुपये जिसका 60 प्रतिशत पहले साल व दूसरे, तीसरे साल 20-20 प्रतिशत बढ़ेगा। समझौता 1 जनवरी 2017 से लागू होगा। एरियर का भुगतान जनवरी 2018 में किया जाएगा। 10 मजदूर प्र्रतिनिधियों (निलंबित) की जांच ए.डी.एम. की मॉनिटरिंग में 45 दिन में पूरी होगी। 

    संघर्ष की कड़ी में 12 जुलाई के नैनीताल प्रदर्शन के बाद किसी प्रकार की सार्थक पहल प्रबंधन द्वारा न दिखाने के विरोध में मजदूरों ने 18 जुलाई से 2 घण्टे टूल डाउन शुरू कर दिया। इसके जबाव में प्रबंधन ने पंतनगर प्लांट से हेमचन्द्र, दीपक, हीरा व चन्द्र मोहन और लालपुर प्लांट से देवेन्द्र व भीम को निलंबित कर दिया। लालपुर प्लांट के मजदूरों ने एच.आर. का घेराव कर निलंबन पर जवाब तलब किया। प्रबंधन ने कहा कि जांच होगी तब पता चलेगा और मजदूरों को टूल डाउन खत्म करने को धमकाया। शाम को ही मजदूरों ने आम सभा कर टूल डाउन को 21 जुलाई से 3 घण्टे करने का फैसला लिया। फिर किच्छा शहर में जुलूस निकाला। 20 जुलाई को कम्पनी में पुलिस बुला कर टूल डाउन खत्म करने का दबाव बनाया गया। 21 जुलाई को पुनः जिला प्रशासन पंतनगर व किच्छा के एस.डी.एम., ए.एस.पी., सी.ओ., ए.एल.सी., महिन्द्रा एंड महिन्द्रा का प्लांट हेड, ए.डी.एम. साहब के नेतृत्व में लालपुर प्लांट में मजदूरों को डराने-धमकाने पहुंच गये। मजदूर टूल डाउन पर डटे रहे। उल्टा मजदूरों ने प्रबंधन पर समझौता न करने के बदले मजदूर प्रतिनिधियों को बाहर करने का आरोप लगाया। 23 जुलाई को मजदूरों ने तीनों प्लांटों (महिन्द्रा सी.आई.ई., पंतनगर व लालपुर और महिन्द्रा एंड महिन्द्रा मेन प्लांट) की संयुक्त आम सभा की और उसमें संघर्ष को आगे बढ़ाने के लिए रणनीति बनाई गयी। 25 जुलाई को ए.एल.सी. की मध्यस्थता में त्रिपक्षीय वार्ता हुयी जो असफल रही। प्रशासन के कहने पर मजदूरों ने 29 जुलाई से टूल डाउन हड़ताल वापस ले ली। परन्तु इसके बाद भी प्रबंधन पर कुछ सकारात्मक असर नहीं पड़ा। इस बीच मजदूर केवल धरने पर शान्तिपूर्वक बैठे रहे। फिर पुनः 17 अगस्त को एक आम सभा की गयी क्योंकि 18 अगस्त से हड़ताल का नोटिस दिया गया था। आम सभा में आन्दोलन के लिए रणनीति बनायी गयी। 18 अगस्त से कम्पनी के दोनों प्लांटों में टूल डाउन हड़ताल शुरू कर दी गयी। प्रबंधन ने पुलिस बुला ली परन्तु मजदूरों ने काम नहीं किया। 20 को इतवार था। उस दिन छुट्टी थी अगले दिन जैसे ही मजदूर काम पर गये तो उनसे टूल डाउन हड़ताल में शामिल नहीं रहने का शपथ पत्र भरकर ही अन्दर आने को कहा गया। इस पर मजदूर भड़क गये और गेट पर धरने पर बैठ गये। दोनों प्लांटों पर मजदूरों ने गेट जाम कर दिया। पंतनगर प्लांट में दोपहर बाद प्रबंधन ने पुलिस से लाठी चार्ज करवा कर गेट खुलवा लिया। प्रशासन ने चालाकी से मजदूर प्रतिनिधियों को वार्ता के बहाने बुला लिया। वार्ता में कोई भी परिणाम नहीं निकला। दोपहर बाद पंतनगर प्लांट के सभी 38 मजदूर लालपुर प्लांट के मजदूरों के साथ में हो गये। शाम लगभग 6-6ः30 बजे पुलिस सभी लगभग 120 मजदूरों को गिरफ्तार कर पुलिस लाइन ले आयी और कम्पनी का गेट खुलवा दिया। प्रबंधन ने कम्पनी के अन्दर सोने और खाने का इंतजाम कर दिया था ताकि जो भी मजदूर (ठेका का) कम्पनी के अन्दर आ जाए तो उसे यही पर रोक कर काम करवाया जाए। उस दिन ठेका मजदूरों को सुबह 4 बजे ही ड्यूटी पर बुला लिया गया था। 

    पुलिस लाईन में सिडकुल संयुक्त मोर्चे के अध्यक्ष के साथ ही अन्य लोग भी पहुंच गये थे। ए.डी.एम. से बात होने पर कहा गया कि अगर ये मजदूर गेट बंद नहीं करेंगे तब इनको छोड़ दिया जाएगा। देर शाम लगभग 9-9ः30 बजे सभी मजदूरों को छोड़ दिया गया। फिर सभी मजदूर ए.डी.एम. साहब से मिलने गये। उन्होंने मजदूरों से मीठी-मीठी बातें की। कहा कि मेरी मैनेजमेन्ट से बात हो गयी है बिना शपथ पत्र के ही सभी लोगों को सुबह ड्यूटी पर ले लेंगे। निलंबित मजदूरों व वेतन वृद्धि के लिए बातचीत जारी रहेगी। अगले दिन 22 अगस्त को मजदूर जब ड्यूटी पर गये तो मैनेजमेन्ट ने बिना शपथ पत्र (गुड कन्डक्ट बान्ड) के काम पर नहीं लेने की बात कही साथ ही दो अन्य मजदूरों के निलंबन की बात बताई। सभी मजदूर ए.एल.सी. कार्यालय पर आ गये। उधर ए.डी.एम. साहब ने वार्ता के लिए बुला लिया। लाठीचार्ज के विरोध में सिडकुल की विभिन्न यूनियनें एकत्र हो गयी थीं। परन्तु महिन्द्रा सी.आई.ई. के मजदूरों का नेतृत्व प्रशासन के बहाव में आ गया वो सोचने लगे कि अगर हम कोई भी कार्यवाही करते हैं तो कहीं प्रबंधन नाराज न हो जाए। इस कारण बना हुआ पुतला नहीं फूंका गया। 23 अगस्त को मजदूरों ने कम्पनी गेट पर बारिश के बीच धरना दिया 24 को धरना, वार्ता विफल रही फिर शाम को रुद्रपुर ए.एल.सी. से डी.एम. कोर्ट तक जुलूस निकाला गया जिसमें अन्य यूनियनें भी शामिल रहीं। अंततः 26 अगस्त को समझौता हो गया है। 

वार्ता में पेंच :- वार्ता में मजदूर चाहते थे कि लालपुर प्लांट के साथ पहले समझौता हो जाए फिर अगला मांग पत्र एक साथ लगे। प्रबंधन अलग-अलग चाहता था। (समय सीमा दो साल या तीन साल) दूसरा, मजदूर पक्ष 10 मजदूरों के निलंबन को कह रहा था लेकिन प्रबंधन 12 मजदूरों के निलंबन की बात पर अड़ा था। मजदूर पक्ष निलंबित मजदूरों की बिना जांच कार्यबहाली की बात कर रहा था उनका कहना है कि प्रबंधन मांगपत्र को ठंडा करने के लिए इस तरह की कार्यवाही करता रहा है। प्रबंधन का कहना था कि जांच के बाद जो रिपोर्ट आयेगी उसके आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी। 

सिडकुल संयुक्त मोर्चे की भूमिका :- उक्त आंदोलन के दौरान ही मोर्चे का गठन होता है। यह मोर्चा लगातार सक्रिय रही यूनियनों से मिलकर बना है और बनने के साथ ही इसने आंदोलन में योजनाबद्ध तरीके से अपनी भूमिका बनायी है। महिन्द्रा के तीनों प्लांटों व ऐरा के संघर्षरत मजदूरों के अलावा मांगपत्र पर संघर्षरत यूनियनों की मांगें भी उठाई गयी हैं। मोर्चे द्वारा किये गये कार्यक्रमों से प्रशासन को एक कमेटी का गठन खानापूर्ति के लिए करना पड़ा, इस बीच कई कम्पनियों में मांगपत्र पर चल रही वार्ताएं सफलतापूर्वक सम्पन्न हुयीं। महिन्द्रा सी.आई.ई. के मौजूदा आन्दोलन में भी मोर्चे ने बैठकें बुलाना, प्रदर्शन करना व वार्ताओं के माध्यम से मामला हल करवाने की भरसक कोशिश की जिसका कुछ हद तक सकारात्मक असर पड़ा। मौजूदा समय में मोर्चे के संघर्ष को सरकार व व्यवस्था पर सवाल खड़े करने की ओर ले जाने की जरूरत है। 

    महिन्द्रा सी.आई.ई. की यूनियन ने पूर्व में प्रबंधन को हावी होने और चालबाजियों में फंसकर काफी कमजोर समझौते किये हैं। कुछ हद तक इस कमी को दूर करने, दो प्लांटों के मजदूरों को एक ही यूनियन में शामिल करवाने में एक हद तक कामयाब हुये हैं। उससे भी आगे बढ़कर तीनों प्लांटों की एकता के मौजूदा प्रयास भी सकारात्मक हैं। महिन्द्रा के मजदूरों को कानूनों के ऊपर निर्भर रह कर ही लड़ने के बजाय सरकार, प्रशासन व पूरी व्यवस्था का भण्डाफोड़ करते हुये मजदूर एकता व जुझारु संघर्ष को भी अपनाने की जरूरत है। सामूहिक नेतृत्व स्थापित करने की जरूरत है।               रुद्रपुर संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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