अंक : 01-15 Jan, 2018 (Year 21, Issue 01)

घोर जन विरोधी है यू.पी. कोका


Print Friendly and PDF

    उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की सरकार ने 20 दिसम्बर को एक घोर जनविरोधी व दमनकारी कानून यू.पी. कोका विधानसभा सत्र में पेश कर दिया। योगी सरकार की कैबिनेट इसे एक पखवाड़ा पूर्व सर्वसम्मति से पास कर चुकी थी। योगी सरकार का यह कानून- ‘उत्तर प्रदेश संगठित अपराध नियंत्रण कानून’ (यू.पी. कोका), महाराष्ट्र सरकार द्वारा लागू ‘महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण कानून’ (मकोका) की तर्ज पर तथा ‘टाडा’ व ‘पोटा’ जैसे कानूनों की तरह ही घोर दमनकारी कानून है। 

    यू.पी.कोका कानून के मुख्य प्रावधानों को देखकर इसके दमनकारी चरित्र का पता चल जाता है जो इस प्रकार हैं- 

1. यू.पी.कोका कानून के तहत गिरफ्तार व्यक्ति अपनी गिरफ्तारी के 6 माह तक जमानत पर रिहा नहीं हो सकता।

2. इस कानून के प्रस्तावित प्रावधानों के तहत किसी व्यक्ति को पुलिस पूछताछ (बंद कमरे में पूछताछ) के बाद भी 30 दिन की रिमांड पर ले सकती है। शक के आधार पर भी जिन्हें हिरासत में लिया गया हो उन्हें भी जल्दी जमानत नहीं मिल सकेगी। 

3. इस कानून के तहत दोषी घोषित व्यक्ति को न्यूनतम 3 साल और अधिकतम उम्र कैद व फांसी की सजा भी दी जा सकती है। इसके साथ 5 लाख से 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान भी प्रस्तावित कानून में है। प्रस्तावित कानून के तहत आरोप पत्र (चार्ज शीट) दाखिल करने की अवधि 90 दिन से बढ़ाकर 180 दिन करने की सिफारिश की गयी है। 

4. प्रस्तावित कानून में सुबूत की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष से हटाकर अभियुक्त (आरोपी) पर डाल दी गयी है। यह मौजूदा फौजदारी कानून के सर्वथा विपरीत है जिसमें किसी आरोपी को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता है जब तक साक्ष्य व सुबूतों के आधार पर न्यायालय उसे दोषी न करार दे। यही किसी जनवादी न्याय प्रणाली का मूलभूत तकाजा है। लेकिन प्रस्तावित नए कानून के अस्तित्व में आने के बाद आरोपी को पहले से दोषी मान लिया जायेगा। खुद को निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी खुद आरोपी की होगी। 

5. पुलिस के सामने किया गया कुबूलनामा (स्वीकारोक्ति या कंफेशन) अंतिम माना जायेगा। यह भारतीय दंड विधान (सी.आर.पी.सी.) के उलट है जिसमें केवल मजिस्ट्रेट के सामने दिये गये बयान को ही कुबूलनामा या कंफेशन माना जा सकता है वह भी जब वह स्वेच्छा से दिया गया हो।

6. आरोपी को पहचानने के लिए नए प्रस्तावित कानून में पुलिस शिनाख्त परेड की जगह वीडियो या फोटो (छाया चित्रों) से पहचान सकती है जिन्हें आसानी से छेड़ा (टैंपर किया) जा सकता है।

7. यू.पी.कोका के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार व्यक्ति को जेल की हाई सिक्युरिटी एरिया में रखा जायेगा। आरोपी से उसके रिश्तेदार या सम्बन्धी केवल जिला मजिस्ट्रेट की आज्ञा से ही जेल में मुलाकात कर सकेंगे। केवल मेडिकल बोर्ड की संस्तुति पर ही आरोपी को बीमार होने पर अस्पताल में रुकने की इजाजत होगी और वह भी मात्र 36 घंटों तक ही। 

8. यू.पी.कोका कानून के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अधिकार दिये गये हैं। प्रस्तावित कानून में राज्य को इस बात का अधिकार दिया गया है कि वह केस की सुनवायी के लिए गठित विशेष अदालत की सहमति लेकर आरोपियों या कथित ‘अपराधी समूह’ के लोगों की सम्पत्ति जब्त कर सकता है। 

9. नया कानून राज्य को इस बात की इजाजत देता  है कि वह अदालत द्वारा दोषी करार देने के बाद अभियुक्त की सम्पत्ति की कुर्की कर सकता है। प्रस्तावित कानून में पुलिस को इस बात की इजाजत दी है कि वह आरोपियों के टेलीफोन, इलेक्ट्रोनिक माध्यमों या मौखिक बातचीत को रिकार्ड या इंटरसेप्ट कर उन्हें अदालत में सुबूत के बतौर पेश कर सकती है।

10. प्रस्तावित कानून में एक प्रावधान पत्रकारों को ‘संगठित अपराध’ के बारे में कुछ भी प्रकाशित करने से पहले उचित प्रशासनिक अधिकारी से अनुमति लेने की बात करता है। बिल में प्रावधान है कि ऐसी कोई भी जानकारी जो आरोपी या कथित आरोपी समूह को फायदा पहुंचाने वाली हो, किसी जानकारी अथवा डाॅक्यूमेन्ट को प्रकाशित करने अथवा प्रसारित करने से पहले पत्रकारों को इस सम्बन्ध में सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना अनिवार्य है। 

    उपरोक्त बातों की रोशनी में हम देखते हैं कि यू.पी.कोका कानून किस कदर जनविरोधी है और दमनात्मक है। इस कानून का दुरूपयोग अल्पसंख्यकों, दलितों व मजदूरों के खिलाफ हो सकता है। टाडा का उदाहरण इस मामले में एक मिसाल है जिसमें 99 प्रतिशत मामले झूठे साबित हुए। योगी सरकार से इससे भिन्न किसी चीज की उम्मीद करना बेमानी है। मजदूर-मेहनतकश जनता व जनवादी न्यायप्रिय लोगों को इस दमनकारी कानून का पुरजोर विरोध करना होगा।  

Labels: राष्ट्रीय


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
पोस्ट बाक्स न.-6
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375