अंक : 01-15 Jan, 2018 (Year 21, Issue 01)

काकोरी के शहीदों की याद में विभिन्न कार्यक्रम


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    लालकुंआ (उत्तराखण्ड) 17 दिसम्बर को काकोरी काण्ड के शहीदों की शहादत को याद करते हुए परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास), प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र (प्रमएके) व इंकलाबी मजदूर केन्द्र (इमके) ने संयुक्त रूप से इलाके में पर्चा वितरित करते हुए साईकिल रैली व नुक्कड़ सभा का आयोजन किया। मशहूर रंगकर्मी गुरूशरण सिंह के नाटक ‘हवाई गोले’ का मंचन किया गया। 

    साईकिल रैली लालकुंआ, बिन्दुखत्ता व आस-पास के इलाकों में निकाली गयी। सभा में वक्ताओं ने कहा कि अशफाक उल्ला खां, राम प्रसाद बिस्मिल, रोशन सिंह व राजेन्द्र नाथ लाहिडी को ब्रिटिश हुकूमत ने फांसी पर लटका दिया था। काकोरी के शहीद ब्रिटिश हुकूमत का शासन उखाड़कर बराबरी पर आधारित समाज बनाना चाहते थे। इनकी शहादत के 90 साल बाद भी इन शहीदों के सपने पूरे नहीं हुए हैं। गोरे अंग्रेजों की जगह काले अंग्रेजों अम्बानी-अदाणी, टाटा-बिरला जैसे पूंजीपतियों ने ले ली है। यही लोग देश की सारी सम्पदा के मालिक बने हुए हैं। कुछ अमीरों की दौलत लगातार बढ़ती जा रही है तो वहीं दूसरी ओर आज भी लाखों लोग गरीबी और भुखमरी के कारण असमय ही दम तोड़ रहे हैं। आजादी के आंदोलन में देश के इन क्रांतिकारियों ने साझी शहादत देकर अंग्रेजों की बांटो और राज करो की नीति का पुरजोर विरोध किया था। 

    ब्रिटिश शासकों की तर्ज पर देश की वर्तमान संघी सरकार जाति-धर्म के नाम पर देश को बांट रही है। किसी पर भी संघी गुण्डे खान-पान, वेश-भूषा के नाम पर हमला कर रहे हैं। अभिव्यक्ति की आजादी व निजता के अधिकार जैसे अधिकार कुचले जा रहे हैं। जो भी इनके खिलाफ बोलता है, संघर्ष करता है, उनको देशद्रोही जैसे शब्दों से नवाजा जा रहा है। राष्ट्रवाद की नई-नई मनमुताबिक परिभाषाएं गढ़ी जा रही हैं। 

    जब देश अंग्रेजों से संघर्ष कर रहा था तब से संघियों का इतिहास उनके साथ सटने का रहा है, उन्हीं की तर्ज पर ये देश को बांट रहे हैं। ऐसे में अशफाक-बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों को समाज में स्थापित करने की जरूरत है। इन्हीं की तर्ज पर हिन्दू-मुस्लिम एकता कायम कर कौमी एकता भाईचारे जैसी कमेटियां समाज में बनाने की जरूरत है। 

रामनगर (उत्तराखण्ड)- 19 दिसम्बर को इंकलाबी मजदूर केन्द्र, पछास, प्रमएके द्वारा लखनपुर चुंगी स्थित पार्क पर एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में इन शहीदों को स्थापित कर मौजूदा समय में फैलाये जा रहे साम्प्रदायिक वैमनस्य से लड़ने का संकल्प लिया गया। 

रुद्रपुर (उत्तराखण्ड)- 19 दिसम्बर को इमके, इंटरार्क मजदूर संगठन के कार्यकर्ताओं ने ट्रांजिट कैम्प रुद्रपुर में प्रभातफेरी निकाली और सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र के प्रवेश द्वार पर एक सभा की। 

काशीपुर (उत्तराखण्ड)- इमके, प्रमएके व पछास द्वारा 17 दिसम्बर को स्थानीय पंत पार्क में सभा आयोजित की गयी। सभा के पश्चात जुलूस भी निकाला गया। 

हरिद्वार (उत्तराखण्ड)- 17 दिसम्बर को काकोरी के शहीदों की याद में स्थानीय मजदूर बस्ती रावली महदूद में प्रभात फेरी निकाली गयी। 

हल्द्वानी (उत्तराखण्ड)- हल्द्वानी में 16 दिसम्बर को वनभूलपुरा बस्ती में तथा 19 दिसम्बर को मजदूर बस्ती दुमवाढूंगा में पछास, प्रमएके, क्रालोस व इमके के कार्यकर्ताओं ने नुक्कड़ नाटक ‘हवाई गोले’ का मंचन किया। 

मऊ (उ.प्र.)- 19 दिसम्बर को इमके व क्रालोस द्वारा संयुक्त तौर पर एक जुलूस निकाला गया। 

बरेली (उ.प्र.)- 17 दिसम्बर को काकोरी के शहीदों को याद करते हुए एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। 

    इन सभी जगहों पर उपरोक्त कार्यक्रमों से पूर्व, व्यापक स्तर पर इस अवसर पर जारी पर्चे का वितरण किया गया।    

                                                                                                                                          -विशेष संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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