अंक : 01-15 Jan, 2018 (Year 21, Issue 01)

एस.पी.एम. आटो काम्प मजदूरों का संघर्ष जारी :चाय बायकाट पूर्णतया सफल


Print Friendly and PDF

    मानेसर, गुड़गांव स्थित एस.पी.एम.आटो काम्प सिस्टम प्रा.लि.यूनियन बनाने को लेकर जारी संघर्ष अब काफी तीखा हो चुका है। 21 दिसम्बर को जबकि मजदूरों के सामूहिक मांग पत्र पर श्रम विभाग में वार्ता होनी थी, कम्पनी के भीतर एक के बाद एक तीनों शिफ्टों के मजदूरों ने चाय का बायकाट कर अपनी एकता को खुलकर प्रदर्शित कर दिया। 20 दिसम्बर को प्रबंधन की लापरवाही और मुनाफे की हवस के कारण हुई दुर्घटना में एक मजदूर की उंगली कट चुकी थी। इस कारण मजदूरों के गुस्से की वजह से प्रबंधक एवं सुपरवाइजर पहले ही घबराए हुये थे। ऐसे में यकायक इस चाय बायकाट ने प्रबंधन में हड़कम्प मचा दिया। किसी सुपरवाइजर अथवा प्रबंधन की हिम्मत नहीं पड़ी कि वो इस पर मजदूरों से कुछ कहे।

    21 दिसम्बर को पूरा दिन लघु सचिवालय में मॉक ड्रिल चलती रही और वार्ता नहीं हो सकी। 22 दिसम्बर को पुनः सहायक श्रमायुक्त ने दोनों पक्षों को बुलाया लेकिन इस दिन भी वार्ता बेनतीजा ही समाप्त हुई।

    25 दिसम्बर को प्रबंधन ने योजनाबद्ध तरीके से पुनः मजदूरों पर हमला किया। 3 मजदूरों को मानेसर थाने में बिठा लिया गया। प्रबंधन इन मजदूरों पर कंपनी के भीतर मारपीट का झूठा आरोप लगाकर इन्हें पहले ही निलंबित कर चुका था साथ ही उसने थाने में मजदूरों के खिलाफ तहरीर भी दी हुई थी। थाने में पुलिस और भाड़े के गुण्डों ने इन मजदूरों को डराया धमकाया। थाना प्रभारी ने मुकदमा दर्ज कर जेल भेज देने की धमकी दी। लेकिन ये मजदूर बिलकुल भी नहीं डरे। इसी दौरान प्रबंधन के इस हमले का जबाव देते हुए कंपनी के भीतर ‘बी’ शिफ्ट के मजदूरों ने चाय बायकाट कर दिया। मजदूर बेहद गुस्से में थे। मजदूरों के नेतृत्व ने कंपनी के भीतर के इस तनावपूर्ण माहौल की सूचना सहायक श्रमायुक्त को दी और समझाया कि यदि इस तरह से मजदूरों को परेशान किया जायेगा तो इसके परिणाम घातक भी हो सकते हैं। सहायक श्रमायुक्त ने सतर्कता का परिचय देते हुए तत्काल प्रबंधन को समझाया तत्पश्चात प्रबंधकों ने स्वयं थाने जाकर गिरफ्तार मजदूरों को छोड़ने को कहा। रिश्वतखोर थाना प्रभारी ने तुरंत ही मजदूरों को छोड़ दिया। इस तरह अपने इस हमले में भी प्रबंधन ने मुंह की खाई। मजदूरों के हौंसले बुलंद हैं। प्रबंधन का हर हमला उनकी एकता को मजबूत बना रहा है। उनकी परिपक्वता को बढ़ा रहा है। वे पूंजीपति के साथ पुलिस प्रशासन, श्रम विभाग एवं गुण्डों के घृणित गठजोड़ का पूरी बहादुरी एवं धैर्य के साथ मुकाबला कर रहे हैं। एस.पी.एम. के मजदूर राजसत्ता के चरित्र को सैद्धान्तिक रूप से भी समझ रहे हैं व आजकल लेनिन की पुस्तिका ‘‘राज्य के बारे में ’’ का अध्ययन कर रहे हैं।                                                                       -गुड़गांव संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
पोस्ट बाक्स न.-6
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375