अंक : 01-15 Jan, 2018 (Year 21, Issue 01)

मॉक ड्रिल


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    21 दिसम्बर को लघु सचिवालय (गुड़गांव) में एक मॉक ड्रिल थी। यह मॉक ड्रिल भूकम्प आ जाने अथवा आग लग जाने की अवस्था में बचाव हेतु की जाने वाली कार्यवाही की प्रशासनिक रिहर्सल थी। इस दिन पुलिस, प्रशासन के उच्च अधिकारियों समेत पूरा प्रशासनिक अमला लघु सचिवालय में मौजूद था। फायर बिग्रेड की गाड़ियों के सायरन बज रहे थे, ‘घायलों’ एवं मृतकों को ‘दुर्घटना स्थल’ से निकालने की कवायद चल रही थी। सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक भी इस मॉक ड्रिल को उत्सुकतावश देख रहे थे जबकि मीडियाकर्मी इस पूरी कार्यवाही को कवर कर रहे थे।

    इसी दिन लघु सचिवालय में एक ओर ‘मॉक ड्रिल’ चल रही थी दूसरी ओर एस.पी.एम. आटो काम्प सिस्टम प्रा.लि. के मजदूरों के सामूहिक मांग पत्र पर श्रम विभाग में सहायक श्रमायुक्त सर्किल-6 में वार्ता होनी थी। सुबह से ही मजदूर लघु सचिवालय स्थित कैन्टीन के सामने वाले पार्क में एकत्र होने शुरू हो गये दूसरी तरफ प्रबंधन के भाड़े के गुण्डे भी लघु सचिवालय के प्रांगण में जमा होने लगे। जब दोपहर का एक बजते-बजते काफी संख्या में मजदूर इकट्ठा हो गये तो सहायक श्रमायुक्त ने पहले वार्ता के लिये 4ः30 बजे का समय नियत कर दिया। प्रबंधन एवं ए.एल.सी. महोदय सोच रहे थे कि शाम 4ः30 बजे तक मजदूरों की संख्या कम हो जायेगी और केवल कुछ नेतृत्वकारी मजदूर बचेंगे और शाम होते-होते लघु सचिवालय भी करीब-करीब खाली हो चुका होगा। ऐसे में प्रबंधन के भाड़े के गुण्डे नेतृत्वकारी मजदूरों को सबक सिखा देंगे। मजदूरों ने इस षड़यंत्र को भांप लिया। अब उनकी संख्या घटने के बजाय बढ़ने लगी साथ ही उनका गुस्सा भी। ‘ए’ शिफ्ट के मजदूर अपनी ड्यूटी पूरी कर सीधे लघु सचिवालय पहुंच गये। वार्ता के लिये निर्धारित समय पर 70-80 मजदूर धड़धड़ाते हुये सीढ़ियां चढ़ते हुये चौथी मंजिल स्थित श्रम विभाग में पहुंचे। मजदूरों की संख्या और तेवर देखकर भाडे़ के गुण्डे अपनी औकात में आ गये और मजदूरों से दूर-दूर ही रहे। एक चाय की दुकान के पास चुपचाप खडे़ प्रबंधक गण की भी अब वार्ता में आने की हिम्मत नहीं हुई और सहायक श्रमायुक्त महोदय भी वक्त की नजाकत को समझते हुये किसी मीटिंग में इतना व्यस्त हो गये कि लौटकर अपने आफिस में आये ही नहीं। मजदूर करीब 45 मिनट तक उनके कार्यालय के बाहर उनका इंतजार करते रहे तत्पश्चात सभी धड़धड़ाते हुये सीढ़ियों से नीचे उतरे और सड़क के एक ओर जमा हो गये। थोड़ी ही देर में उसी सड़क से ‘एक्स मुनीम आफ एक्स सरपंच’ 15-20 लम्पट तत्वों के साथ गर्दन झुकाकर मजदूरों की सलामी लेते हुये निकल गये। 

    अगले दिन अखबारों में खबर थी कि ‘भूकम्प एवं आग में बचाव की अपनी मॉक ड्रिल में प्रशासन फेल हो गया’। जबकि इसी दिन एस.पी.एम.के मजदूर अपनी मॉक ड्रिल में पूरी तरह सफल रहे, हालांकि यह खबर सभी अखबारों से गायब थी।

Labels: रिपोर्ट


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