अंक : 16-31 Jan, 2018 (Year 21, Issue 02)

पाकिस्तान में विरोघ प्रदर्शनों की लहर


8 वर्षीया मासूम की बलात्कार व हत्या


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    बीते दिनों पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 8 वर्षीया मासूम लड़की जैनब की बलात्कार के पश्चात हत्या कर दी गयी। जैनब अपने घर के पास ट्यूशन पढ़ने गयी थी जहां से उसे अगवा कर लिया गया। उसकी लाश 4 दिन बाद एक पुलिस कांस्टेबल को कूढ़े के ढेर से मिली।

    इस घटना की खबर लगते ही पाकिस्तान में पंजाब प्रांत में विरोध प्रदर्शनों की लहर सी आ गयी। जैनब के जनाजे में भारी संख्या में लोेग शामिल हुए। जनाजे से लौटते समय भीड़ हिंसक हो उठी और उसने प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालयों को घेर लिया व तोड़-फोड़ शुरू कर दी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। इसमें दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गयी व कई घायल हो गये। प्रदर्शनकारियों के इस दमन से लोगों का सरकार व पुलिस के प्रति आक्रोश और बढ़ गया। करांची के प्रेस क्लब पर भी भारी तादाद में लोगों ने इकट्ठा होकर जैनब के हत्यारे की गिरफ्तारी की मांग की। 

    तमाम अभिनेता, टी वी एंकर सरीखे सेलिब्रेटी अलग-अलग तौर तरीकों से जैनब की हत्या व बलात्कार के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। जैनब अंतिम सीसीटीवी फुटेज में एक व्यक्ति के साथ जाते दिखलाई पड़ रही है। उस व्यक्ति का स्केच भी जारी कर दिया गया है इसके बावजूद अभी तक पुलिस हत्यारों को गिरफ्तार करने में नाकाम रही है। 

    पंजाब के इस इलाके में पिछले एक वर्ष में इस तरीके की यह 12वीं घटना है। लोगों को शक है कि इसके पीछे कोई गिरोह सक्रिय है जिसे पकड़ने में पुलिस असफल साबित हो रही है। पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ ने लोगों के आक्रोश को देखते हुए इस मामले में शीघ्र हत्यारों की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों पर भी कार्यवाही कर लोगों के आक्रोश को शांत करने का प्रयास किया जा रहा है। 

    ढेरों पढ़े-लिखे लोग फेसबुक व ट्विटर पर जैनब की बलात्कार व हत्या के खिलाफ आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं। कुछ लोग पुलिस की असफलता व लड़कियों की सुरक्षा का सवाल उठा रहे हैं तो कुछ लड़कियों को ‘खराब स्पर्श’ के प्रति शिक्षित करने की जरूरत पर बल दे रहे हैं। ढेरों हत्यारों को क्रूरतापूर्वक फांसी की मांग कर रहे हैं। कुछ लोग पाकिस्तान में इस्लामिक कट्टरपंथ में महिलाओं के दोयम दर्जे को मुद्दा बना रहे हैं। 

    इस तरह इस स्वयं स्फूर्त संघर्ष में लोगों का नजरिया समस्या की तह में जाने के बजाय ऊपरी रूपों तक का बना हुआ है। वे ऊपरी लक्षणों को ही कारण मान ले रहे हैं। पूंजीवादी मीडिया व सरकार उन्हें यहीं तक देख पाने का नजरिया देती है। लोग यह देख पाने में असफल हैं कि अगर पाकिस्तान के युवा आज लड़कियों के प्रति गलत नजरिये का शिकार बन रहे हैं तो ऐसा क्योें है? क्या चीज पाकिस्तान के लड़कों-पुरुषों को महिलाओं को उपभोग वस्तु के बतौर देखने की ओर ठेल रही है? अगर इस सवाल की गहराई में लोग जायेंगे तो पायेंगे कि मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था व उसकी उपभोक्तावादी संस्कृति समस्या के मूल में है। यही संस्कृति स्त्री शरीर को उपभोग वस्तु के बतौर पेश कर रही है। पूंजीवादी संस्कृति के प्रसार के चलते ‘खाओ पीओ मौज करो’ की धुन में लोग महिलाओं को इंसान का दर्जा देने के बजाय मौज मस्ती का साधन मानने लगे हैं। कोढ़ में खाज का काम इस्लामिक कट्टरपंथ की महिलाओं के प्रति दोयम दर्जे की धारणा कर रही है। वह महिलाओं-लड़कियों को घर-बुर्के में कैदकर सुरक्षित करना चाहती है पर वास्तविकता यही है कि इससे महिलायें अधिक आसानी से शिकार बनायी जा रही हैं। अभी पाकिस्तान की बहुलांश जनता इस समझ पर खड़ी नहीं है और इसलिए पूंजीवाद व इस्लामिक कट्टरपंथ का विरोध नहीं कर रही है पर देर सबेर वह इसी ओर बढ़ेगी। 

Labels: नारी जगत


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