अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

बरेली शहर निवासियों को मिला एक नया मेयर


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    बरेली की जनता ने 15 वर्ष के बाद भाजपा के नये मेयर उमेश गौतम को चुना है जो बरेली के एक यूनिवर्सिटी के मालिक हैं और मिशन हाॅस्पिटल के मालिक हैं।

    शपथ ग्रहण के बाद उन्हें माननीय प्रधानमंत्री ने कुछ मंत्र देने के लिए दिल्ली बुला लिया। अतः जब से जनाब बरेली आये हैं तब से उन्होंने चैन नहीं लिया है। बरेली को स्मार्ट सिटी के नम्बर लाने में असफल रहे डा.आई.एम.तोमर के बाद नये मेयर उमेश गौतम ने कसम खाई है कि हम बरेली को स्मार्ट सिटी बनने में नम्बर 100 दिलवायेंगे। और शुरू कर दिया बरेली को स्मार्ट बनाने का काम और नगर निगम की टीम बनाकर शहर के सभी रोड़ों से अतिक्रमण हटाने के लिए टीम गठित कर दी गयी और अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया। पुलिस फोर्स व होमगार्ड को लेकर गरीब ठेले वालों को रौंद दिया गया। इसके बाद मध्यम वर्ग के बाजार में टीम पहुुंची। वहां पर नगर निगम की टीम मय फोर्स के फेल हो गयी। तब फिर मेयर साहब को पीएसी साथ रखने के लिए आदेश देना पड़ा। और अब पूरी तानाशाही के साथ रोड से अतिक्रमण हटाया जा रहा है और शहर में स्वच्छ शहर के नाम पर रैली निकाली गयी। रैली निकालने के लिए दिन सुबह से दोपहर ढाई बजे तक के लिए बाजार बंद कराया। जाने कितने ठेले-फड़ वालों की रोजी छीनी गयी। 

    साथ ही हाईकोर्ट ने एक निर्णय दिया था जिसमें लिखा है फड़, रेहड़ी वालों को जब तक कहीं जगह न दी जाये तब तक उन्हें हटाया नहीं जाये। लेकिन मेयर साहब हाईकोर्ट के निर्णय को भी नहीं मान रहे हैं और बेशर्मी से फड़-रेहड़ी वालों को उजाड़ रहे हैं। 

    मजे की बात यह है कि जिस व्यक्ति ने अपने अस्पताल का साढ़े तीन करोड़ का टैक्स अभी नहीं दिया हो वह शहर के बड़े नामचीन लोगों से टैक्स वसूल रहा है और उनका ढोल बजवा रहा है और पोल खोल आंदोलन चलाने की धमकी दे रहा है। 

    पोल खोल की धमकी से कई बड़े बकायेदार नगर निगम पहुंचे और टैक्स भी जमा किया गया। पोल खोल से कुछ फायदा जरूर हुआ है लेकिन अतिक्रमण अभियान अभी अपनी चरम सीमा पर चल रहा है। इस अभियान को अभी कहीं से कोई चुनौती नहीं मिली है। गरीब फड़-रेहड़ी वाले असंगठित होने की वजह से कुछ नहीं कर पा रहे हैं। केन्द्र, राज्य व नगर निगम में सरकार बनने के बाद भाजपा पूरी तानाशाही से काम कर रही है। ये पार्टी यह भूल गयी है जो जनता सिर पर बैठाती है वह धूल भी चटाती है। इस देश की जनता जल्दी ही संगठित होकर इन्हें धूल चटायेगी। - एक पाठक, बरेली  

Labels: मजदूरों के पत्र


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