अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

पाकिस्तान: निजीकरण और श्रम कानूनों को लागू करवाने के लिए मजदूरों-कर्मचारियों का प्रदर्शन


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    जैसा कि इस वर्ष के शुरूआत में ही यह स्पष्ट हो गया था कि नये साल की शुरूआत मजदूर-कर्मचारी अपने संघर्षों व विरोध प्रदर्शनों से कर रहे हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तान में भी जनवरी माह के मध्य से ही मजदूरों-कर्मचारियों के विरोध प्रदर्शन शुरू हो गये हैं। यह विरोध प्रदर्शन सरकार की निजीकरण की नीतियों और श्रम कानूनों को लागू करवाने को लेकर हैं। 

    21 जनवरी को करांची प्रेस क्लब के सामने नेशनल ट्रेड यूनियन फेडरेशन ने प्रदर्शन किया और मांग की कि गदानी शिपयार्ड, खानें, टेक्सटाइल और दूसरे कारखानों में मजदूरों के साथ जो दुर्घटनायें हो रही हैं उसको लेकर सरकार कार्यवाही करे ताकि ऐसी दुर्घटनायें न हों।            1,नवम्बर 2016 को गदानी शिपयार्ड में एक जहाज के आॅयल टैंकर को तोड़ते समय आग लग गयी थी जिसके कारण 10 मजदूर मारे गये थे और दर्जनों मजदूर घायल हो गये थे। यह सब इस वजह से भी हुआ था कि जहाज को तोड़ने वाली जगह पर जो सुरक्षा उपकरण वहां होने चाहिए थे वे वहां नहीं थे। इसी तरह 11 सितम्बर 2012 को बाल्दिया में अली एण्टरप्राइजेज में लगी आग में 260 मजदूर मारे गये थे। उनकी मौत के लिए सीधे मालिक इसके लिए जिम्मेदार थे। वहीं दूसरी तरफ खानों में भी इस तरह की घटनायेें होती रहती हैं लेकिन चूंकि वह शहर से दूर होती हैं और लगभग एकांत में होती हैं इसलिए वहां की दुर्घटनाएं खबर नहीं बन पाती हैं। शहरों में भी वही दुर्घटनाएं खबर बन पाती हैं जो ज्यादा भयानक होती हैं तथा जिनमें जान-माल का नुकसान ज्यादा होता है। वरना छोटी-मोटी दुर्घटनाएं तो संज्ञान में आ ही नहीं पाती हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान सिंध में मजदूरों की सुरक्षा के लिए बनाये गये कानून ‘आक्यूपेशनल हेल्थ एण्ड सेफ्टी’ बिल के बारे में भी बात की गयी कि अगर यह कानून व्यवहार में लागू नहीं किया गया तो यह महज एक दस्तावेज बनकर रह जायेगा। 

    25 जनवरी को रेलवे वर्कर्स यूनियन ने वर्कशाॅप डिवीजनल सुपरिन्टेण्डेण्ट के सामने प्रदर्शन किया। कर्मचारी नेताओं ने सरकार पर यह आरोप लगाया कि पिछले 30 सालों से सरकार मजदूर विरोधी नीतियां लागू करती जा रही है। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत भर्ती किये गये मजदूरों को नियमित करने की भी उन्होंने मांग उठायी। उन्होंने बताया कि रेलवे विभाग लगातार कुशल मजदूरों को ठेके पर भर्ती कर रहा है लेकिन उनको स्थायी नहीं कर रहा है। अगर निजीकरण की नीतियां इसी तरह लागू रहीं तो मजदूर स्थायी होने बंद हो जायेंगे और ठेका मजदूरों की संख्या बढ़ती जायेगी। वहीं उन्होंने ग्रेड चार के कर्मचारियों की तनख्वाह में से टैक्स के नाम पर कटौती बंद करने का आह्वान किया।  

    25 जनवरी को ही स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ देश भर से डाॅक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ व स्वास्थ्य से जुड़े कर्मचारियों ने प्रदर्शन किये। इसमें पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन, यंग डाॅक्टर्स एसोसिएशन, पंजाब हेल्थ एलायंस, लेडी हेल्थ वर्कर  एसोसिएशन आदि संगठन शामिल थे। 

    पिछले दो सालों से इन कर्मचारियों के संघर्ष जारी हैं। जनवरी 2017 से इनके 300 से ज्यादा प्रदर्शन जगह-जगह हो चुके हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण होता है तो स्वास्थ्य सुविधाओं में 300 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि होगी जिससे आम लोगों का इलाज करवाना मुश्किल हो जायेगा।

    सभी संगठनों ने एक स्वर में स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और अपने दूसरे मतभेदों को किनारे रखते हुए निजीकरण को लागू न होने देने के लिए कमर कस ली है। सरकार द्वारा निजीकरण की कोशिशों के खिलाफ उन्होंने सभी स्वास्थ्य सेवाओं को ठप करने की बात की। 

    पाकिस्तान में भी मजदूरों-कर्मचारियों के हालात अन्य देशों के मजदूरों-कर्मचारियों के हालात से बेहतर नहीं हैं। मजदूरों की सुरक्षा से लेकर उनको मिलने वाली सुविधाओं को छीनकर आज पूंजीपतियों को अकूत मुनाफा कमाने की छूट दी जा रही है। सरकार आज खुलकर पूंजीपतियों के साथ खड़ी है। 

Labels: मजदूर हालात


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