अंक : 01-15 Feb, 2018 (Year 21, Issue 03)

रिद्धि सिद्धि में एक मजदूर की ऊंचाई से फिसलकर हुई मौत


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    रुद्रपुर/ 23 जनवरी की सांय करीब 4 बजे सिडकुल स्थित रिद्धि सिद्धि कम्पनी में टीन शेड पर काम कर रहे एक मजदूर का पैर फिसलकर जमीन पर गिरने से मौत हो गयी। आनन-फानन में कम्पनी के लोग मजदूर को जिला अस्पताल में ले गये जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रिद्धि सिद्धि कम्पनी के स्थायी मजदूरों की यूनियन भी मौजूद है इसके बावजूद इस घटना की जानकारी बाकी यूनियनों को 24 जनवरी को लगी। जब इंकलाबी मजदूर केन्द्र के एक कार्यकर्ता साथी दिन में करीब 2 बजे जिला अस्पताल में अपने व्यक्तिगत काम से गये तो वहां पर मृत मजदूर के परिजनों से उनकी मुलाकात हुयी। 

    मृतक मजदूर का नाम महेश ओझा था जिसकी उम्र महज 39 साल थी। 5 भाईयों में दूसरे नम्बर के महेश ओझा अपने पीछे पत्नी व 3 बच्चे छोड़ गये जिनमें 1 लड़की 17 साल की है और दो लड़के अभी छोटे हैं। परिजनों ने बताया कि महेश ओझा दिल्ली के रहने वाले हैं और वहां की एक कम्पनी में ठेके के मजदूर को कम्पनी अलग-अलग स्थानों पर ठेके लेकर इरेक्शन(कम्पनी का स्ट्रक्चर खड़ा करना व उस पर शेड बनाने का काम) का काम करती थी। मृतक मजदूर एक साल से उस कम्पनी में काम करता था और करीब सवा महीने से सिडकुल पंतनगर की रिद्धि सिद्धि कम्पनी में शेड लगाने का काम कर रहा था कि 23 जनवरी को काफी ऊंचाई से गिरकर मर गया। अस्पताल में उपस्थित मृतक के परिजनों में ठेकेदार एवं प्रबंधन की उपस्थिति न होने से आक्रोश के साथ-साथ मृतक के बच्चों के भविष्य की चिंता को लेकर पीड़ा थी। 

    इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ता द्वारा संगठन के दूसरे साथियों से सम्पर्क किया गया एवं सिडकुल स्थित श्रमिक संयुक्त मोर्चे के लोगों से सम्पर्क कर घटना की जानकारी दी गयी व जिला अस्पताल पहुंचने को कहा गया और मृतक मजदूर के परिजनों को समझाया कि मृतक मजदूर के बीबी, बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर उन्हें फैक्टरी प्रबंधन के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए व मुआवजे हेतु मृतक की लाश को फैक्टरी गेट पर रखना चाहिए तथा इमके एवं सिडकुल की अन्य न्याय पसंद यूनियन साथ में रहेंगी। 

    जिला अस्पताल में संगठन के अन्य साथियों एवं अन्य मजदूर नेताओं के पहुंचने पर उन्होंने रिद्धि सिद्धि यूनियन के अध्यक्ष को फोन पर मजदूर को न्याय दिलाने हेतु पहल लेने की बात की तो रिद्धि सिद्धि के यूनियन अध्यक्ष द्वारा संयुक्त मोर्चा पदाधिकारी को इस मामले में किसी भी तरह की राजनीति ना करने की सलाह दी गयी और कहा कि हमें पता है कि हमें क्या करना है तुम लोग अपने घरों (कम्पनियों) की आग बुझाओ, अपनी कम्पनी तुमसे सम्भलती नहीं है, हमारे यहां राजनीति कर रहे हो। 

    अस्पताल में लाश का पंचनामा भरने के पश्चात पोस्टमार्टम हेतु मोर्चरी में भेज दिया गया। इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ता परिजनों के साथ ही मोर्चरी पहुंचे और उन्हें समझाते रहे कि अगर इस समय कुछ हासिल नहीं कर पाये तो बाद में कुछ नहीं मिलेगा। इस पर रिद्धि सिद्धि के प्रबंधन के कुछ लोगों से भी संगठन के लोगों की कहासुनी हुई। इमके के कार्यकर्ताओं द्वारा व्हाट्सएप के द्वारा व फोन कर बाकी यूनियनों से मोर्चरी पहुंचने की अपील की गयी। 

    संगठन द्वारा लाश को फैक्टरी गेट पर या एसएसपी कार्यालय गेट पर रखने की सलाह को परिजन तैयार हो गये। परिजनों द्वारा लाश को फैक्टरी गेट पर रखे जाने की योजना को सुनकर सिडकुल चैकी इंचार्ज फोर्स के साथ मोर्चरी पहुंच गये और परिजनों को अपने अंदाज में समझाने लगे व इमके कार्यकर्ताओं को भी परोक्ष रूप में डराने लगे और कहा कि पोस्टमार्टम हो गया है। अब इसे घर (दिल्ली) ले जाओ। कुछ लोग रुककर प्रबंधन से बात कर लो। लाश को गाड़ी में रख दिया गया। तब तक रिद्धि सिद्धि के प्रबंधन के लोग व ठेकेदार आदि भी आ गये। धीरे-धीरे संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारी व अन्य मजदूर भी पहुंच गये। उन्होंने कहा कि वार्ता के बाद ही गाड़ी कहीं जायेगी। इस पर प्रबंधन व ठेकेदार मृतक मजदूर के कुछ परिजनों को वार्ता हेतु अन्यत्र ले गये। 

    रात्रि 9 बजे तक इमके के कार्यकर्ता व मोर्चे के लोग मोर्चरी पर ही रहे। वार्ता पर गये परिजनोें से फोन पर भी सम्पर्क नहीं हो रहा था। मोर्चरी पर बाकी बचे रिश्तेदारों को मजदूर समझाते रहे। काफी देर बाद वार्ता में गये परिजनों से बात हुई तो उन्होंने कहा कि हमारा मामला सुलटने वाला है। आप लोग चले जाएं। जरूरत पड़ेगी तो आपसे सम्पर्क कर लेंगे। इस पर इमके व मोर्चे के लोग लौट आये। दिन में 2 बजे से रात्रि 9 बजे तक जहां इमके व सिडकुल की अन्य यूनियनों के पदाधिकारी जो संयुक्त मोर्चे के पदाधिकारी भी हैं; मृतक को न्याय मिल सके, इस प्रयास में रहे वहीं रिद्धि सिद्धि यूनियन कहीं भी दिखाई नहीं दी। 

    25 जनवरी को इमके के कार्यकर्ता द्वारा मृतक मजदूर के भाई से बात करने पर पता चला कि प्रबंधन, ठेकेदार व परिजनों के बीच मृतक के बीबी-बच्चों हेतु 6 लाख रुपये देने का लिखित समझौता हुआ। पैसा अभी मिला नहीं है। 

    मृतक मजदूर को याद करते हुए 24 जनवरी को ही सहायक श्रमायुक्त कार्यालय पर धरनारत आॅटोलाइन इम्पलाइज यूनियन व महिन्द्रा सीआईआई के मजदूरों ने 2 मिनट का मौन रख श्रृद्धांजलि दी। 

    सिडकुल सहित पूरे देश में आये दिन फैक्टरियों में मजदूर दुर्घटना के शिकार हो जान गंवा रहे हैं। इनमें अधिकतर ठेका मजदूर हैं। फैक्टरी में  मजदूर के मरने पर प्रबंधन-पुलिस-श्रम विभाग मिलकर किसी तरह भी मृतक मजदूर की लाश की शीघ्र अंत्येष्टि कराने का प्रयास करता है। मजदूर के मरने पर बाकी मजदूर सिर्फ अफसोस जताने तक ही रह जाते हैं। यूनियन भी ठेका मजदूर को मजदूर नहीं मानती है। 

    स्थाई मजदूरों की यूनियनों को ठेका मजदूरों को अपना साथी मानकर उनके दुःख-दर्दों में साथ खड़ा होने एवं उनके शोषण/उत्पीड़न के खिलाफ संघर्ष चलाकर अपनी एकता से ताकत को बढ़ाना होगा। तभी खुद उनका भविष्य और कुछ समय तक सुरक्षित रह सकता है। पूंजी की हवस स्थायी एवं ठेका दोनों मजदूरों के जीवन को लील रही है। इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ना ही होगा।               -रुद्रपुर संवाददाता

Labels: रिपोर्ट


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