लेबिल (कुल समाचार - 117): आपका नजरिया

श्रम कानूनों को बदलने की तैयारी? यानि भारत में सुरक्षात्मक श्रम कानूनों के खात्मे की शुरुआत - रवीन्द्र गोयल


    1990 में नई आर्थिक नीति के समय से ही धन्ना सेठों की सरकार से दो प्रमुख मांगें रही हैं- एक तो बेरोकटोक सरकारी सरंक्षण में औने-पौने दामों में भूमि अधिग्रहण की सुविधा और दूसरे अपनी मर्जी के हिसाब से मनचाही मजदूरी पर कामगारों को बहाल करने का हक तथा बिना रोक-टोक के जब जी चाहे मजदूरों को निकालने का अधिकार। थैलीशाहों की भाषा में कहें तो मनमर्जी से मजदूरों को भरती करने और निकालने का अधि...

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प्रूफ की गलतियां


    नागरिक अखबार वर्ष-20 अंक-18 के पेज न. 3 पर लेख है पाकिस्तान, आंतकवाद और साम्राज्यवादी, इसमें लिखा है शेष पृष्ठ 2 पर है। यह सही है लेकिन जहां से पैरा शुरू हुआ है वहां लिखा है पृष्ठ 3 का शेष, म्यांमार में.........जो गलत है। छपाई में मिस प्रिन्ट हो रहा है। इससे पाठकों को समझने में परेशानी हो रही है। वाक्य का अर्थ समझ में नहीं आ रहा है। नागरिक छापने वालों से विनम्र निवेदन है कि इन गलतियों को सही ...

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बिगड़ी इकनामी, ढहता मनरेगा और बेरोजगारी में फंसा देश 2019 का चुनाव देख रहा है- आपका नजरिया


    सबसे बडी चुनौती इकनामी की है। और बिगडी इकनामी को कैसे नये आयाम दिये जायें जिससे राजनीतिक लाभ भी मिले अब नजर इसी बात को लेकर है। तो एक तरफ नीति आयोग देश के 100 पिछडे़ जिलों को चिह्नित करने में लग गया है तो दूसरी तरफ वित्त मंत्रालय इकनामी को पटरी पर लाने के लिये ब्लू प्रिंट तैयार कर रहा है। नीति आयोग के सामने चुनौती है कि 100 पिछड़े जिलों को चिह्नित कर खेती, पीने का पानी, हेल्थ सर्विस औ...

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डोका-ला, डोका-ला, डोका-ला


    डोका-ला किस देश भाषा, संस्कृति और जबान की आवाज है। मुझे तो समझ नहीं आया न धरती के उस भाग को कभी देखा। न इससे पहले सुना था। इधर कुछ दिनों से शासक वर्गों के हलकों में बड़ा हल्ला इस शब्द से जुड़े मसले पर, मचा हुआ था कि यह भू-भाग भारतीय सीमा का हिस्सा है और चीन इस पर दखलंदाजी कर रहा है। अब हल्ला ही नहीं शोर-शराबा का प्रचार अपने प्रचार माध्यमों के जरिये जन-जन तक पहुंचाने की पुरजोर कोशिश मे...

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आधार कार्ड का अनिवार्य किया जाना


    ‘‘मेरा आधार मेरी पहचान’’ ये बात सिर्फ पहचान तक नहीं है। यह हमारी रोजी रोटी से जुड़ गया है। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट कहता है कि आधार कार्ड न होेने की वजह से कोई भी सरकारी सुविधाओं से वंचित नहीं होना चाहिए। पर दूसरी तरफ सरकार ने हर चीज के लिए आधार कार्ड को महत्वपूर्ण कर दिया है। 

1. यदि आपके ईएसआईसी कार्ड में आधार कार्ड नम्बर लिंक नहीं है तो आप ईएसआईसी से मिलने वाली सुविधा...

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आपका नजरिया- मजदूर वर्ग को अपनी लड़ाई के लिए खुद संगठित होना होगा।


    निजता के मौलिक अधिकारों में स्वीकार किए जाने पर संविधानवादी मध्य वर्ग और रवीश कुमार जैसे उदारवादी झूम रहे हैं। संविधान और लोकतंत्र के कसीदे पढ़े जा रहे हैं। चलिए हम भी आपके वर्ग की खुशी में शामिल हो जाते हैं। लेकिन जनाब जरा मजदूरों के अधिकारों पर चले इस हथौड़े पर चुप क्यों हैं, मजदूरों के सभी अधिकार खत्म होने जा रहे हैं। वामपंथी विपक्ष चुप है। मजदूर वर्ग के खिलाफ पूंजी की रक्ष...

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आपका नजरिया- ये नैतिकता नहीं घोर अवसरवादिता है।


    अभी अभी जो ताजा घटनाक्रम बिहार में घटा है, उस पर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिली। कुछ लोग इसे नीतीश कुमार की दगाबाजी के रूप में देख रहे हैं कि नीतीश ने गठबंधन के साथ दगा किया है, तो कुछ मित्र इसे नीतीश कुमार का साहसिक कदम बता रहे हैं। कुछ लोग भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लड़ाई में नीतीश कुमार की नैतिकता का ढोल पीट रहे हैं। लेकिन आज ये बात किसी से छुपी नहीं है कि आज र...

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आपका नजरिया - भोले के भक्त


ये भोले के भक्त कहाए जाते हैं,

नशे में खुद को झुमाए जाते हैं

सावन के नाम पर अपना कोटा पूरा करते भी दिख जाते हैं, 

बिन मतलब का गुट बनाए जाते हैं,

डंडे, तलवार व अवैध हथियार भी इनके पास पाए जाते हैं,

ये भोले के भक्त कहाए जाते हैं...

सावन के नाम पर हुड़दंग करते भी दिख जाते हैं,

कहीं छुटपुट लड़ाई तो कहीं दंगे भी करवाते हैं,

उसी में ये खुद भी कुट पिट जाते हैं,

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आपका नजरिया - रामनाथ कोविंद जी को राष्ट्रपति बनाना(एक राजनैतिक विश्लेषण)


    मित्रो जिस दिन से रामनाथ कोविंद जी को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था उस दिन से ही विभिन्न तरह की प्रतिक्रिया देश के विभिन्न तबकों एवं बुद्धिजीवी वर्ग से आना शुरू हो गई थी। शुरूआत स्वयं अमित शाह (भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष) द्वारा प्रेस कांफ्रेंस करके की गई, जिसमें उन्होंने घोषित किया कि हमने दलित समाज से उम्मीदवार बनाया है। यह देश के समस्त दलित समाज के लिए गर्...

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ईद और अखलाक, पहलू खान और जुनैद...


    आज ईद का दिन है यानी खुशी का दिन। रफीक मियां ने अपने लिए पैजामा खरीदा है और अपने बच्चों के लिए नई-नई सैंडिल खरीदी हैं। नफीस अहमद ने इस बार ईद पर एक नई चटाई खरीदी है। इन्हें तो ढंग से नमाज भी पढ़ना नहीं आती और नबी सल्लावो वसल्लम के किस्से पता हैं। रोजी-रोटी के फिराक में यह सब चीजें कहां याद रहती हैं। 

    आज ईद का दिन है ईदगाह में ईद की नमाज के लिए जमा हैं। सड़क तक ईद की नमाज क...

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आपका नजरिया- हरिद्वार आई.टी.सी. में मजदूरों ने किया कैण्टीन का बहिष्कार


    हरिद्वार में आई.टी.सी. कम्पनी में लगभग 1300 स्थायी मजदूर हैं। 1500 अस्थायी मजदूर हैं। कम्पनी के अंदर तीन प्लाण्ट हैं। 1. फूड प्लाण्ट 2. प्रिन्टिंग प्लांट 3. सॉप एवं सैम्पू प्लांट। आई.टी.सी. में कुल 18 कर्मचारी प्रतिनिधि हैं एक यूनियन 2016 के मध्य में फूड प्लांट में बन गयी है। 

    2 मई को आई.टी.सी. के कैण्टीन में खाने में कीड़े मिले थे तो यूनियन ने सारे कर्मचारी प्रतिनिधियों को भरोसे ...

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आपका नजरिया- आर.एस.एस. प्रायोजित गर्भ विज्ञान संस्कार: प्रभु नस्ल की खोज -राम पुनियानी


    आर्य नस्ल की श्रेष्ठता और ब्राह्मणवादी मूल्यों की महानता ही वह नींव है, जिस पर आरएसएस, हिन्दू राष्ट्र का निर्माण करना चाहता है। आरएसएस की विचारधारा यह मानती है कि आर्य एक श्रेष्ठ नस्ल है और हिन्दू राष्ट्र, विश्व का गुरू और नेतृत्वकर्ता दोनों है। अंग्रेजों और ब्राह्मणवादियों ने विशिष्ट नस्लों की श्रेष्ठता की अवधारणा को प्रोत्साहन दिया।

    हाल में, आरएसएस की स्वा...

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मुंबई


    यह व्यवस्था किस तरह इंसान को एक चेतना विहीन जीवित रोबोट में तब्दील कर देता है, इसका जीवंत उदाहरण मुंबई महानगर के रोजमर्रा जिंदगी में बखूबी देखने को मिलता है। भौगोलिक तौर पर मुंबई महानगर मूलतः तीन असंगठित रिहायशी कॉरिडोर (गलियारे) में विभाजित है, मुंबई की भाषा में इन्हे ‘‘वेस्टर्न लाइन’’, ‘‘हार्बर लाइन’’ और ‘‘सेंट्रल लाइन’’ कहते हैं। दूसरी तरफ, यहाँ के अध...

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मई दिवस से डरता शासक वर्ग


    मैं यहां मई दिवस का संघर्षशील इतिहास या मजदूरों के पदचापों से डरकर पीछे हटते शासक वर्ग की बातें नहीं करना चाहता हूं। मैं तो अभी हाल ही में हरियाणा की बीजेपी सरकार द्वारा मई दिवस को बदलने की खबरें आईं, उस पर बात करना चाहता हूं।

    28 अप्रैल 2017 को नवभारत टाइम्स में दूसरे पृष्ठ पर विशेष संवाददाता, चंडीगढ़ के नाम से ‘‘1 मई को नहीं, विश्वकर्मा दिवस को मनेगा मजदूर दिवस’’ ...

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हिरासत में मौत को छिपाने के लिए पुलिस ने बेगुनाहों को बनाया आरोपी


    नन्हें पहलवान नहीं रहे। वह लखनऊ के इंदिरा नगर इलाके में बहुत पहले शामिल हो चुके तकरोही गांव के मजरे फतहापुरवा के निवासी थे। वह मामूली आदमी थे लेकिन उनकी मौत की खबर इसलिए खास है क्योंकि वह उस रमेश लोधी के चाचा थे जिसकी पिछली 7 अप्रैल को पुलिस हिरासत में मौत हुई थी और वही इस मामले के प्रमुख पैरोकार भी थे।

    नन्हें पहलवान स्वाभाविक मौत नहीं मरे। पुलिस ने पहले उनका भतीज...

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नया साल नया विचार


नया साल है नया विचार है, ऐ मेरे दोस्त

जिसे तुम समझते हो अपना वो तो पूंजीपतियों का यार है

हमें कर दिया कतारों में खड़ा, और कहता है इसी में देश का उद्धार है

चीख रहा था 50 दिन-50 दिन पर 50 दिन बाद भी देश जनता का वही हाल है

वो गा रहा है अपनी सभाओं में मेरा देश मेरा देश, पर देश में वो चंद लोगों का वफादार है 

ऐ मेरे दोस्त जिसे तुम समझते हो अपना वो तो अम्बानी अडाणी का यार है

इ...

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प्रधान सेवक के स्वामी


    ‘प्रधान सेवक’ किसकी सेवा में 18-18 घंटे काम पर लगे रहते हैं एक बार फिर से उजागर हो गया है। हाल ही में ‘प्रधान सेवक’ की पहले बांग्लादेश यात्रा और उसके बाद शेख हसीना की भारत यात्रा पर प्रोटोकोल तोड़कर मिलना प्रधान सेवक की स्वामीभक्ति को उजागर करता है। प्रधान सेवक का शेख हसीना से मिलना ना बांग्लादेशी, ना भारतीय मजदूर मेहनतकशों के प्रति स्वामीभक्ति थी। यह स्वामी भक्ति थी अम्...

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आपका नजरिया- लोकतंत्र पर हावी फासीवाद


    आज देश के अंदर जिस तरह का माहौल बनता जा रहा है उसे देखकर लगता है कि क्या वाकई हम लोकतंत्र में जी रहे हैं? या फिर लोकतंत्र की जगह धीरे-धीरे फासीवाद पैर पसारता जा रहा है। पिछले कुछ समय से जिस तरह के घटनाक्रम घटित हो रहे हैं उसे देखकर जेहन में ये सवाल खड़ा होना लाजिमी है।

    एक-एक करके तीन प्रगतिशील लेखकों की हत्या, बीफ के नाम पर घर मे घुसकर अखलाक की हत्या, बीफ के नाम पर ही देश ...

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आपका नजरिया- गुरमेहर कौर की आवाज में आवाज मिलाओ


    रामजस कालेज में संघी लम्पट वाहिनी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के गुण्डों की गुंडई के खिलाफ आवाज उठाने वाली गुरमेहर कौर आज हर ओर चर्चा पा चुकी हैं। संघी लम्पटों द्वारा रामजस कॉलेज में सेमिनार के दौरान जिस तरह छात्रों-शिक्षकों पर हमला किया गया, जिस तरह छात्राओं से बदसलूकी की गयी, उससे हिटलर की इन संतानों की ‘देशभक्ति’ सबके सामने आ गयी। 

    और बाद में जब लेडी श्...

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आपका नजरिया- कार्य प्रगति पर हैं


    हर वर्ष की भांति भारत सरकार द्वारा पूंजीपति वर्ग का बजट पेश किया गया। परन्तु यह बजट कई मायनों में पिछले बजटों से अलग था। एक तो यह बजट भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में पहली बार समय से पूर्व पेश किया जिसका एन.डी.ए. के अलावा दूसरे पूंजीवादी राजनीतिक दलों ने विरोध किया। दूसरा विरोध संसद से लेकर सर्वोच्च न्यायालय व भारतीय निर्वाचन आयोग तक किया गया। विरोधी दलों का आरोप था कि सरकार कु...

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फकीर बाबा


मंदिर के बाहर हाथ फैलाये फकीर को देखा है,

मस्तक पर लिखी लाचार व गरीबी की लकीर को देखा है,

भादों की बरसात हो या पूस की ठंडी रात,

आसमां के नीचे चीथड़ां में लिपटे शरीर को देखा है।



अभी अभी जन्मा एक ऐसा भी फकीर बाबा है,

दस लाख का सूट जिसका दिल्ली में काबा है,

सवा लाख की कलम से जो देश की तकदीर लिखता है,

मेरा देश बदल रहा है ऐसा उसका दावा है।



मगर क्या व...

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आपका नजरिया- एक तीर दो निशाने


सम्पादक जी,

लेख पढ़ा, कुछ अधूरा लगा।

प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर बैंकों की बढ़ती लायबलिटिज/एन.पी.ए. ने सरकार की नींद हराम कर रखी है। 4 लाख करोड़ सम्भावित आंकड़ा है। 90 प्रतिशत पब्लिक सेक्टर बैंक हैं। इसमें से कितना इस सरकार ने व कितना पिछली सरकार ने दिया है स्पष्ट करने की जरूरत है। अगर पिछली सरकार दोषी है तो एफ.आई.आर. की सम्भावना बनती है या नहीं। क्या कारण हैं कि यह सरकार कारपोरेटों क...

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गलतियों पर ध्यान दें


    वर्ष 19 अंक 23 के लेख पढ़े बहुत अच्छे लगे। जिसमें नोटबंदी पर आने वाले लेख बहुत अच्छे लगे जो कि बहुत सही और मजबूत राजनीतिक चेतना पर खड़े करते हैं। परन्तु नागरिक के पृष्ठ 3 पर जो लेख ‘क्यूबा के महान नेता फिदेल कास्त्रो नहीं रहे’ के नाम से छपा। उस लेख के अन्दर उनकी मृत्यु की तिथि गलत छपी थी। जैसे लेख के अन्दर फिदेल कास्त्रो की मृत्यु की तिथि 26 दिसम्बर थी, जबकि इसके स्थान पर 26 नवम्बर आन...

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आपका नजरिया- राजनैतिक पार्टियों का भाषण


    सभी राजनैतिक पार्टियां अपने भाषणों मे एक दूसरे दलों पर प्रहार करते हैं और जनता को विश्वास दिलाते हैं कि उनकी पार्टी उसके कार्यकर्ता व नेता ईमानदार जनता सेवक हैं।

    सत्ता पार्टी भाजपा, कांग्रेस, बसपा व आप पार्टियां वोटो का ध्रुवीकरण करके अपने वोटों की बढोत्तरी के लिए प्रयास करती रहती हैं। 

    एक मीडिया टीवी चैनल द्वारा भाजपा नेता यूनियन अधिकारी व वरिष...

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आपका नजरिया- महिला - देवी या सेविका


    राष्ट्रीय सेवक संघ ने भाजपा, शिवसेना, बजरंग दल, विश्व हिन्दू परिषद व एवीबीपी छात्र मोर्चे के द्वारा हिन्दू समाज को बहुमत बताते हुए एक हिन्दू राष्ट्र का निर्माण की बातें कही हैं। इसके लिए आरएसएस ने कई संगठनों के जरिये मुसलमानों व ईसाई धर्मों का निरंतर विरोध किया है। 

    हिन्दू राष्ट्र बनाने, उसकी संस्कृति को बढ़ाने हेतु धार्मिक टीवी चैनलों का उपयोग, धार्मिक पर्वो...

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हंगर-इण्डेक्स रिपोर्ट में भारत की बदहाली


    देश की बहुलांश आबादी गरीबी, कुपोषण, भुखमरी, अशिक्षा, बेरोजगारी आदि महामारियों से कराह रही है। और सरकार जनता को अंधराष्ट्रवाद की आंधी में बहा रही है। जब हमारे शासक परमाणु हथियारों, मिसाइलों की बातें करते हैं। एशिया में अपनी क्षमताओं का रौब झाड़ते हैं। वहीं इसके उलट हम पाते हैं कि हमारे देश की आम जनता की भुखमरी व कुपोषण के मामले में स्थिति एशिया में ही तमाम गरीब व पिछड़े देशों से ...

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आपका नजरिया- भारत छोड़ो आंदोलन


आदरणीय सम्पादक जी ,

भारत छोड़ो आंदोलन के बारे में ‘नागरिक’ 16-31 अगस्त 2016 अंक के माध्यम से नई और ऐतिहासिक जानकारी मिली, अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन का सम्पूर्ण श्रेय कांग्रेस खुद लेती चली आ रही है और इसी झूठ के सहारे कांग्रेस ने आधी सदी से ज्यादा वक्त तक हुकूमत कर ली और आज भी इस संघर्ष को वो सिर्फ अपना बताते नहीं थकती और वास्तव में किन्हीं भी वजहों से जनता के बीच भी यही भावना है कि ये...

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16-31 अगस्त के अंक में 42 के भारत छोड़ो आंदोलन पर कुछ विचार


साथी 

    एक अच्छा लेख जिसमें भारतीय जन मानस की पहलकदमी और बहादुरी को ठीक से विश्लेषित किया गया है। सही ही कांग्रेस का ढुलमुलपन उजागर किया गया है। पर आंदोलन के बाद के दौर में कम्युनिस्टों द्वारा अंग्रेजां के खिलाफ अपने आंदोलन को स्थगित कर देने को क्या मात्र ‘ऐतिहासिक भूल’ कह देना पर्याप्त है।

    मुझे लगता है कि इस आचरण का एक विस्तृत विश्लेषण होना चाहिए क्यों...

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आपका नजरिया- ये कैसी आजादी है


कभी यहां पर पूंजीवाद है तो

कहीं भूखा इंसान है।

सबसे ज्यादा परेशान मजदूर और किसान है।

ये कैसी आजादी कैसा देश महान हैं।

कभी यहां घूसखोरी है तो 

कहीं तपड़ता इंसान हैं।

दुःख, दर्द से दम तोड़ते मजदूर और किसान हैं।

ये कैसी आजादी कैसा देश महान है।

कभी यहां पर दंगे होते हैं तो 

कहीं पर होते कत्लेआम हैं।

महिलाओं पर शोषण होते हैं तो 

कहीं...

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आपका नजरिया- मैं और मेरा राष्ट्र


राष्ट्र 

मेरा सबसे महान शब्द

मेरा राष्ट्र महान

और मैं भी...

बिना महान नायक के

राष्ट्र महान कैसे

भाइयों और बहिनो

मुझे मेरे राष्ट्र के आगे

सब बौना लगता है।

मेरे सपनों का सबसे महान शब्द

‘‘हिन्दू राष्ट्र’’

भले ही ‘‘हिन्दू’’ नाम 

मुसलमानों ने दिया हो

पर अब ‘‘हिन्दू राष्ट्र’’ ही

मेरा महान ऊंचा लक्...

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आपका नजरिया- ‘नागरिक’ 16-31 जुलाई अंक के तीन लेखों पर टिप्पणी


साथी

नागरिक का 16-31 जुलाई का अंक मिला। ओटो रेनो कास्टिल्लो की शानदार कविता छापने के लिए बधाई। 

आप के तीन लेखों पर टिप्पणी करना चाहूंगा आशा है आप अन्यथा न लेंगे।

1. ऋचा इंडस्ट्री के सबक- इस में तीन सुझाव हैं:-

- एक महत्वपूर्ण सबक होना चाहिए कि हमें अपने आंदोलन को छात्रों से जोड़ना चाहिए और उसके रास्ते तलाशने होंगे।

- लोगों से जो चंदा इकट्टा किया उसका हिसाब दिया जान...

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मेरी जीवन यात्रा


जब हरि था तब मैं नहीं

अब हरि है मैं नाहिं

अब हरि हरि में मिल गया 

अब हरि भयो उदास

    हरि शब्द का उपयोग यहां पर अहं, चेतना, खाल, समझ तथा कुछ अन्य भाव के लिए उपयोग में लाया गया है- इसे अनेकार्थी शब्द के रूप में प्रयोग किया गया है। यह पाठक की समझ पर निर्भर करेगा कि किस सटीक भाव पर निम्न वृतान्त से इसका उपयोग कर मेरी चेतना की व्यथा के आधार पर अपनी समझ बनाता है। 

 ...

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आपका नजरिया- क्या बदला है?


निजाम बदला है, सरकार बदली है,

क्या हासिल हुआ?

क्या हासिल हुआ? बेकार बदली है,

खेत में किसान, सीमा पर जवान,

कल भी मरते थे आज भी मरते हैं,

हालात वही हैं सिर्फ हुंकार बदली है।



खून पसीने से इस धरती को सींचा हमने,

फिर भी हम मर रहे हैं

वो चर रहे हैं,

खेत वही हैं सिर्फ हँसिया और तलवार बदली है।



हलकू आज भी सो जाता है खेत में अपने झबरे से लिपटकर,<...

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आपका नजरिया - समाजवाद


ये कैसा है जनवाद

सरकार और पूंजीवाद

मजदूरों के शोषण से 

है, आप आबाद।

नहीं चाहिए ऐसी सरकार 

नहीं चाहिए ये पूंजीवाद

बिगाड़ते हैं हम सम्बन्ध तुमसे,

और करते हैं हम बुलंद नारा-

इंकलाब जिन्दाबाद।

मजदूर, किसान क्रांति कर 

लायेंगे समाजवाद

होगें तब सभी 

पूंजी से आजाद

और जीवन होगा

एक नया आहलाद

उमाशंकर, फरीदाबाद

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आपका नजरिया - आओ दस्तक दें


    हर सुबह बहुत ही सुहानी और आकर्षक होती है। वैसे तो हर सुबह सुहानी होती है लेकिन गर्मियों की सुबह तो खास ही होती है। रात भर की नींद से शरीर को थकान से दूर कर और एक स्फूर्ति से भर कर आनन्द के साथ इसलिए तैयार होते हैं और उम्मीद करते हैं कि आज का दिन बहुत अच्छा गुजरे, वह चाहे जिस रूप में भी हो अच्छा गुजरे। 

    ऐसी ही एक सुहानी सुबह को मैं अपने घर के बाहर खड़ा था, मेरा घर मुख्य स...

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आपका नजरिया - मुझको जकड़ा है बंधन में


मुझको जकड़ा है बंधन में मर्यादा में लपेटा है...

पूछती हूं मैं तुमसे क्या ये बंधन सिर्फ मेरा है...



मेरे जीवन के अहम फैसलों में भी ना हक मेरा है....

पूछती हूं मैं तुम से क्या ये बंधन सिर्फ मेरा है...



लड़की हूं केवल इसलिए लड़कों जैसा सम्मान ना मेरा है.

इस समाज में अकेले चलने का अधिकार ना मेरा है..

पूछती हूं मैं..........



मेरे बिना संसार में अंधेरा है.....

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आपका नजरिया - सेक्युलर बनाम राष्ट्रवादी


    जबसे देश के अंदर दादरी कांड हुआ है, उसके बाद देश के माहौल को लेकर एक बहस खड़ी हो गयी है, हालांकि उससे पहले देश के अंदर बहुत सारी घटनायें घट चुकी थीं खासतौर पर कुछ तर्कशील लेखकों की हत्या, जिसके फलस्वरूप विरोध में कुछ बुद्धिजीवी, लेखकों व फिल्मकारों ने अपने अवार्ड वापस किये, समाज के अन्य जागरुक व्यक्तियों व संगठनों ने भी अपने-अपने तरीके से विरोध दर्ज किया, सत्ता पक्ष के तमाम बुद...

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आपका नजरिया- नई तकनीक व महिलायें


    आज हर आदमी अपने को आधुनिक व सभ्य दिखाने की कोशिश में रहता है। इसके लिए वह अपनी क्षमता के अनुसार सभी आधुनिक वस्तुएं लेने की कोशिश करता है। यह समाज में खुद को सभ्य व आधुनिक दिखाने का माध्यम होता है साथ ही समाज में रुतबा भी बढ़ जाता है। विज्ञान व नई-नई तकनीक ने मानव जीवन को सरल बनाया है। 

   लेकिन नये दौर की तकनीक मनुष्य के जीवन को नकारात्मक रूप से भी प्रभावित कर रही है। हम ...

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आपका नजरिया- ये तो आने वाली पीढि़यां तय करेंगी कि देशभक्त कौन? और देशद्रोही कौन?


    जब लोकसभा चुनाव होने जा रहे थे तो एक नेत्री (जो अपने आप को साध्वी कहती हैं) ने अपने मंच से कहा था कि आप लोगों को रामजादों की सरकार चाहिए या फिर हरामजादों की, उसके बाद चुनाव हुए और रामजादों की सरकार सत्ता में आ गई, उसके बाद इनकी सारी सेनाएं अपने-अपने शस्त्र (धनुष, त्रिशूल, तलवार व गदा आदि) लेकर निकल पड़े रामराज स्थापित करने के लिए, कभी लव जेहाद के नाम पर तो कभी गौरक्षा के नाम पर, कभी मं...

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आपका नजरिया- विकलांगों को दिव्यांग कहने से क्या होगा ?


    हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी बहुत दयावान दरियादिल व्यक्ति हैं, अपनी जनता का ख्याल रखने वाले गरीबों, अपाहिजों के बारे में हद से ज्यादा सोचने वाले व्यक्ति हैं। 

    पिछले दिनों मोदी जी वाराणसी पहुंचे। वहां पहुंचकर उन्होंने विकलांगों को व्हील चेयर, हाथ से चलाने वाली तिपहिया (वाहन) साइकिल, वैशाखी और कानों की मशीन बांटी और कहा, ‘‘शारीरिक व मानसिक रूप ...

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आपका नजरिया - ओ आर ओ पी और मन की बात


    मोदी की बराक ओबामा द्वारा प्रमाणित देशभक्त सरकार अपने वायदे से पीछे हटी तो देश भर में आंदोलन शुरू हो गये। इसी क्रम में आंदोलन की बागडोर (प्रायः) अपने अधीनस्थों को सैनिक सेवा में दासवत रखने वाले मेजरों, कर्नलों आदि के हाथ में रही। ‘‘अनुशासित सिपाही’’ भी भला कैसे अपने भू.पू. अफसरों के साथ एक कतार में बराबरी से बैठ सकते थे? मानो सारा आंदोलन का अनुभव अफसरों को ही रहा हो। (वैस...

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आपका नजरिया- जन्मनी चाहिए हर बस्ती में एक फूलन


सारा भारत जब

दानवों की घाटी है

तो जन्मनी चाहिए

हर बस्ती में एक फूलन!

ताकि जब न्याय के दरवाजों पर

चढ़ जाए मजबूत सांकल

तो भी वो पराजित न हो

ताकि जब समय की निर्लज्जता

अपनी पराकाष्ठा पर हो

तो भी वो भयभीत न हो

ऐसी निर्भयाएं

ऐसी वास्तविक अपराजिताएं

हमें एक नहीं

हजारों की तादाद में चाहिए..

सारा हिन्द जब

दरिंदों का अखाड...

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आपका नजरिया- ये आदिवासी लड़कियां


वो जंगल-सौरभ संचित करती थीं

मिट्टी-सनी हथेलियों पर

सजाती थीं धुसरित बालों में

कचनार के नीले फूल

अपनी जर्जर झुग्गियों के किनारे

अबाबील के घोंसले संवारती

बरगद की शिराओं से झूलती

उन्मुक्त गाती लड़कियां

ये आदिवासी लड़कियां...

फिर एक दिन वो जान गईं

रोशनियों का षड्यंत्र

उन्होंने मापी

आसमान की गहराई

उन्होंने देखा

कि स...

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आपका नजरिया- किसका सुधार किसका विकास


गांव से कई घर खाली हैं, रहने को आदमी नहीं,

लाखों रुपये के पंचायत घर बन रहे, किसकी पंचायत, किसका विकास,

धारे, नाले, नदियां सूख गये प्यासी पहाड़ों की जनता मर रही

लाखों रुपये की नहर योजना, कहां है पानी, कहां है विकास,

पालतू पशुओं को जंगल में बांधे सुअर गांव के खेतों में भागे।

सोलर पैनल के लिए पैसे नहीं, कहां गये पैसे किसका विकास,

पलायन रुकने का नाम न लेवे, बेरोजगार...

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आपका नजरिया- सिद्ध करो कि तुम जीवित हो


जब प्रकृति का तांडव

प्रलय के चित्र खींच दे

या आतंक की दरिंदगी

जिस्मों के चिथड़े उड़ा जाए

तो यूं अवचेतन न पड़े रहो

कब्र में गड़े मुर्दों की तरह

सिद्ध करो कि तुम जीवित हो

सुन सकते हो

खौफ और दर्द से बिलबिलाती असहाय चीत्कारें

देख सकते हो

जीवंत लोथड़ों के रूप में फड़कते मानव शरीर

उठो ! अपना धर्म निभाने हेतु

इससे पहले कि तुम्हरा ज...

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आपका नजरिया- देशद्रोही कौन? राष्ट्रभक्त कौन?


    भारत एक लोकतांत्रिक देश है, और लोकतंत्र में हर किसी को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अधिकार होता है, पिछले दिनों असहिष्णुता को लेकर देश में काफी हल्ला मचा, जिसमें लेखक से लेकर कलाकारों व सैनिकों तक ने अपने पुरुस्कार वापस किये, उसी समय पहले शाहरुख फिर आमिर खान ने भी मीडिया में अपने विचार रखे, इन दोनों के मीडिया में विचार रखते ही हमारे तथाकथित हिंदू हितैषी संगठनों के प्रवक्ता से लेकर ...

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कहां हो तुम?


कहां हो तुम भगतसिंह? 

वो देखो दम तोड़ता तुम्हारे सपनों का हिंदुस्तान, 

देखो वो देखो सन्नाटे को चीरती एक अबला की चीख, 

वो देखो फांसी के फंदे पर झूलता किसान ।



तुम कहां हो? तुम कहां हो अशफाक? 

तुम भी देखो अपना प्यारा वतन, अपना हिंदुस्तान, 

जिस मजहब का नाम रोशन किया था तुमने, आज अपने ही मुल्क में,

पराया होता वो मजहब और इंसान ।



तुम कहां ह...

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आपका नजरिया- उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर हड़ताल पर


     उत्तराखण्ड में डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के आह्वान पर सिंचाई विभाग, पेयजल निगम, लोक निर्माण विभाग, जल संस्थान के इंजीनियर्स 1 दिसम्बर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इंजीनियर्स 18 सूत्रीय मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं। इनमें मुख्यतः वेतन विसंगति, ग्रेड पे बढ़ाने, अपर सहायक अभियंता के पद को नाॅन फंक्शनल करने, सहायक अभियंता के पदों पर संविदा नियुक्तियों को स्थाई करने, पेयजल...

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आपका नजरिया- भारत में तेल व गैस उत्पादन में सब्सिडी- श्रुति शर्मा


    जी-20 देशों द्वारा जीवाश्म-ईंधन यानी फाॅसिल-फ्यूल के उत्पादन के लिए जिस स्तर पर सब्सिडी दी जा रही है उससे सवाल उठता है कि जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण को कारगर बनाने के लिए ये सरकारें किस हद तक प्रतिबद्ध हैं। 

    कई देशों ने ग्रीन हाउस गैसों को कम करने को लेकर अधिक से अधिक प्रतिबद्धता दिखाई है, लेकिन ये सरकारें जीवाश्म-ईंधन के उत्पादन के लिए जिस प्रकार लगातार सब्सिड...

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आपका नजरिया- खुफिया एजेंसियां गा रही हैं आइएस राग -रिहाई मंच


लखनऊ 25 नवम्बर 2015। कुछ खुफिया और अस्पष्ट सूत्रों के हवाले से प्रसारित खबरों कि आईएस की तरफ से लड़ रहे कथित आतंकी आजमगढ़ निवासी बड़ा साजिद सीरिया में मारा जा चुका है, को रिहाई मंच ने खुफिया एजेंसियों द्वारा आजमगढ़ को बदनाम करने की कोशिश बताया है। संगठन ने अपना आरोप फिर दोहराया है कि आजमगढ़ और भटकल समेत पूरे देश से ऐसे कई मुस्लिम नौजवानों को वांटेड और भगोड़ा बताकर खुफिया एजेंसियों ने अ...

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आपका नजरिया- व्यथा


था कभी यह 

गांधी का देश

लेकिन अब यहां

नेताओं के ऐश

यहां अब होती

सुरा-सुन्दरी पेश

जिसके बल होते

जनता के वोट केश

इसके लिए ये करते

सदा ही राग-द्वेष

बची नहीं है उनमें

शर्म व हया शेष

बनी है यह 

उनकी पंचवर्षीय क्रीडा 

लेकिन इससे बढ़ रही

 आमजन की पीड़़ा

‘पार्थ’ आज तो 

भद पिट रहा लोकतंत्र 

इससे ...

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आपका नजरिया- बिहार चुनाव और साम्प्रदायिकता


    बिहार के चुनाव परिणामों में महागठबंधन की भारी बहुमत से विजय वहीं दूसरी तरफ भाजपा की हार दर्शाती है कि भाजपा के फासिस्ट साम्प्रदायिक कार्ड को पूरी तरह जनता ने विफल कर दिया। जिस तरह पूरे देश में असहिष्णुता के लिए बुद्धिजीवियों, लेखकों, साहित्यकारों ने अपने पुरस्कार लौटाये हैं, बिहार चुनावों में बीफ पर जो संघ तथा भाजपा ने माहौल को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश की, निश्चित तौ...

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आपका नजरिया- कमाल है!


कमाल है कमाल है कमाल है कमाल है

हम मजदूरों को पता इन सबके दिल का हाल है

लुटेरा पूंजीवादी देखो कितना मालामाल है

कमाल है कमाल है कमाल है कमाल है।

मजदूर खेतों से अनाज को उगाता है

फिर भी भूखे पेट ही रात को सो जाता है

कमाल है कमाल है कमाल है कमाल है

मजदूर खदानों से कोयला निकालता है

पूंजीपति ही इसे लूट कर ले जाता है

कमाल है कमाल है कमाल है कमाल है

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आपका नजरिया- गरीबों के हक पर, अफसरों का डाका ......


    उत्तराखण्ड राज्य में जनहित में गठित किये गए निगम में अगर अफसरों और मंत्रियों की मनमानी देखनी हो तो शुरूआत उत्तराखण्ड बहुउद्देशीय वित्त एवं विकास निगम की कार्यप्रणाली के अध्ययन से हो, समाज कल्याण विभाग के इस निगम में इतनी धांधली है कि शासन में बैठे उच्च अधिकारी भी संज्ञान में लाये जाने पर कोई विभागीय कार्यवाही नहीं करते, बल्कि वे उन नकारा अधिकारियों के लिए पदोन्नति एवं आर...

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आपका नजरिया- शिक्षक दिवस


    भारत देश के राष्ट्रपति ने बड़ी बेशर्मी से शिक्षक दिवस पर छात्रों को सम्बोधित किया। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने कहा कि भारत का संविधान सबको बराबरी का दर्जा देता है। हम सब लोग जानते हैं जब भारत आजाद हुआ तब संविधान बनाया गया। संविधान बनाने के साथ-साथ पूंजीवाद को भारत में स्थापित किया गया। यही कारण रहा कि भारत की आम जन मानस बराबरी का दर्जा नहीं पा सकी। नब्बे प्रतिशत जनता को मुन...

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आपका नजरिया- दिन को रात कह रहे हैं


निडर होकर खुले आंगन में 

आ गये हैं अनके मेंडक

अपने हमदर्द चाटुकार-

साथियों को लेकर

मनमर्जी कर रहे हैं

दिन को भी टर्रा रहे हैं

    बेलगाम मेंडक जादूगर हैं

    छोटे-छोटे गरीब मेंडकों को

    झांसा दे रिझाकर

    अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं

    बरसात में उन सबकी चलती है

    बाकी दिनों में सब 

    गायब हो ज...

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आपका नजरिया- चहै जान दै देओ


काला पत्थर लाल न होवै, चहै जान दै देओ

जिसकी सोच बुरी हो उसको बदल सकै न कोए



चाँद को इक पल छूनै खातिर, चहै जान दै देओ

प्रेम का फंदा डार गलै में चकोर न बनिओ कोए



हमको तो गद्दार कहैं वो, चहै जान दै देओ

अपने गलै कभी न झांके देशभक्त हो कोए



आवै भूडोल या बाढ़ प्रलय सी, चहै जान दै देओ

देस के नेता गिद्ध बनैं हैं नेता कहो न कोए



कहत कवि मरियम सब...

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आपका नजरिया- इशारे को न पूछा


भरी महफिल में, मेरे सहारे को न पूछा

खिले गुलशन में मुरझा रहे कुसुम प्यारे को न पूछा



पूछा जग ने चढ़ते सूरज को,

आसमां के तारामण्डल ने बुझते तारे को न पूछा।



ऐश करती दुनियां ने, किसी निर्धन बेचारे को न पूछा

ऊंचे-ऊंचे महल सजा कर, किसी बेसहारे को न पूछा



बड़ी-बड़ी लग्जरी कारों में बैठकर किसी असहाय आवारे को न पूछा

समुद्र में जल तरंगों से छेड़छा...

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आपका नजरिया- सावधान


    पिछले कुछ समय से भारतीय समाज में धार्मिक बााबाओं को लेकर पूंजीवादी मीडिया में काफी चर्चा हो गयी है और चर्चा जिन बातों को लेकर हो रही है वह बलात्कार, हत्या, फ्राॅड इत्यादि है। ये अलग बात है कि ये सब पूंजीवादी समाज की आम चारित्रिक विशेषताएं हैं। देखा जाए तो मीडिया ने पूरी चर्चा व बहस इन्हीं बिन्दुओं पर केन्द्रित की है (बलात्कार, लूट, हत्या, फ्राॅड इत्यादि) और सामान्य जन मानस को भ...

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आपका नजरिया-श्वान की टेड़ी पूंछ कभी सीधी न हो पाए...


सुन्दरता जो मन को भाए हुस्न वही कहलाए

फिर भी जिस्म की पैमाइश से मिसवल्र्ड बन जाए

/

शब्दों का अम्बार लगा पर प्रेम न लिक्खा जाए

गूंगे का गुड़ है तो कैसे स्वाद कोई बतलाए

/

सच न सुनना चाहें जो उनको क्या समझाए

श्वान की टेढ़ी पूंछ कभी सीधी न हो पाए

/

दुनिया के भेदों को ढूंढे खुद को ढूंढ न पाए

पार न पाया भेद कोई दर्शन जो भी कहलाए

/

हनी सिं...

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आपका नजरिया- रेल किसने बिछायी?


    जब दिनांक 11 अगस्त 2015 को बरेली-कासगंज रूट पर बड़ी लाइन के उदघाटन की घोषणा हुई तो सत्ताधारियों को इस उदघाटन में भी फायदा नजर आने लगा और वे फायदा उठा ले गये। और केन्द्र से लेकर स्थानीय लग्गू-भग्गू तक इस अवसर का फायदा लेने से नहीं चूके। केन्द्र में सुरेश प्रभु ने दिल्ली से ही वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए तो, उद्घाटन स्थल से मनोज सिन्हा, संतोष गंगवार ने भूतपूर्व प्रधानमंत्री और वर्त...

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आपका नजरिया- हवाबाजों और हवालाबाजों से सावधान


    केन्द्र शासित भाजपा की मोदी सरकार के सभी छोटे-बड़े नेता खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा 2014 के आम चुनाव में बुरी तरह पराजित कांग्रेस पार्टी के नेता खासकर सोनिया गांधी तथा राहुल गांधी इस देश की मजदूर-मेहनतकश जनता को गुमराह कर रहे हैं। इनसे सावधान रहने की जरूरत है। दोनों पार्टियों के नेता ‘चोर-चोर मौसेरे भाई’ की तर्ज पर ही धोखा दे रहे हैं। मौजूदा दौर की खास बात यह है कि ...

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आपका नजरिया- नागरिक में एकरूपता है


प्रिय बंधु 

    आप की पाक्षिक ‘‘नागरिक’’ मिल रही है। किन्तु कभी अप्रैल में पहले मिला था फिर अब जुलाई में मिला है। मैं इसलिए ही ग्राहक बना था कि आपकी पत्रिका को मैं स्वाधीनता (सा.) और ‘‘हुंकार’’,  विप्लव(मा.) पत्रिकाओं का विकल्प मानता हूं। लिखना इसलिए बंद है कि हाथों को पार्किन्सन ने इतना ...

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आपका नजरिया- ‘‘माननीय’’ मुलायम सिंह को बैन किया जाये


       लाल टोपी पहन कर समाजवाद को बदनाम करने वाले, अपने को समाजवादी कहने और लिखने वाले मुलायम सिंह कौन-से समाजवादी हैं और कौन से समाजवाद की बात करते हैं? यह तो आज तक हमारी समझ में नहीं आया। लेकिन आये दिन बलात्कारियों के पक्ष में बयान देने वाले ये समाजवादी रूस या चीन वाले समाजवादी तो कतई नहीं हैं। हां, ये समाजवाद की नेमप्लेट लगाकर, लाल टोपी पहनकर समाजवाद के नाम से रोटी जरूर तोड़ रहे ...

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आपका नजरिया- कहते कुछ होता कुछ


बेटी बचाओ अभियान चला पर

बंद न होती एम.टी.पी.

/

बढ़ते जाते विकास के चर्चे

घटती जाती जी.डी.पी.

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चुनावी वादे महज थे जुमले

जीत के कहती बी.जे.पी.

/

पापी, मुजरिम बनें हैं लीडर

अब कहलाते वी.आई.पी.

/

सच्ची-झूठी न्यूज बनाओ

लक्ष्य है अपना टी.आर.पी.

/

ट्रेन लुटे या जहरखुरानी

मस्त है सारी जी.आर.पी.

/

विश्व-हित की करो साधन...

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आपका नजरिया- पुलिस ‘‘ठुल्ला’’ नहीं होती


    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल हमेशा कुछ का कुछ बना देते हैं तथा जनता को गुमराह करते हैं। इस कला में वह माहिर हो चुके हैं। एक साक्षात्कार में उन्होंने दिल्ली पुलिस को ‘ठुल्ला’ बता दिया। ठुल्ला का मतलब है- आलसी, अकर्मण्य तथा बेकार। इस कथित शब्द को लेकर दिल्ली पुलिस ने कड़ी प्रतिक्रिया दी तथा इसे गलत करार दिया। ‘ठुल्ला’ कहे जाने से गोविन्दपुरी थाना के एक सिपाह...

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आपका नजरिया- संघ के घृणित मंसूबों का जवाब जरूरी


    संघ-भाजपा के सत्तानशीन होने के बाद से भारतीय समाज का तीव्र सांप्रदायिकरण की प्रक्रिया जोरों-शोरों पर है। पिछले एक साल से संघ-भाजपा विभाजनकारी सांप्रदायिकता को थोक में समाज में प्रत्यारोपित कर रहे हैं। ‘राष्ट्रवाद’ के झण्डावरदार अपने घृणित एजेण्डे को आगे बढ़ाने के लिए भारतीय समाज को तहस-नहस कर देने पर आमादा हैं। 

    शैक्षिक संस्थानों और शिक्षा का भगवाकरण  ...

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आपका नजरिया- प्रधानमंत्री के नाम एलपीजी गैस उपभोक्ता का खुला खत


    प्रिय प्रधानमंत्रीजी 

            हमने आपके आह्वान को विभिन्न प्रचार माध्यमों में ध्यानपूर्वक सुना जिसमें आप देशवासियों से गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील कर रहे हैं। आपका कहना है कि जो लोग बाजार दर पर गैस लेने में सक्षम हैं उन्हें गैस सब्सिडी छोड़ देनी चाहिए। हमने यह भी सुना है कि आप इससे बचे हुए पैसों से गरीब के घर में सब्सिडी वाला...

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बबाली बाबा


    पतंजलि हर्बल एण्ड फूड पार्क फैक्टरी में पिछले दिनों जो घटना हुयी है वह बहुत दयनीय है। किस तरह से बाबा रामदेव की कम्पनी के गुण्डे-मवालियों ने ट्रक यूनियन के लोगों के साथ मारपीट की जिसमें एक आदमी की मौत हो गयी, दस आदमी घायल हो गये। दलजीत सिंह जो दो ट्रकों का मालिक था, वह ट्रक यूनियन के साथ अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहा था। विवाद माल भाड़े को लेकर था। कम्पनी प्रबंधन ने उसके ट्रक ...

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2 सितम्बर देशव्यापी बंद की तैयारी शुरू


सरकार की नीतियों के विरोध में 2 सितम्बर  को होने वाले देशव्यापी बन्द की तैयारियां शुरू।

26 जुलाई को होगा बरेली ट्रेड यूनियन्स का जिला सम्मेलन।

  मोदी सरकार की पूंजीवादी नीतियों से देशभर का कामगार वर्ग असंतुष्ट है और नाराज भी। इसी क्रम में बरेली में बरेली ट्रेड यूनियन्स फेडरेशन ने 23 जून 5 बजे से आयकर कार्यालय मंे बड़ी बैठक का आयोजन कैलाश चन्द्र सक्सेना की अध्यक्षता मे कर ...

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अवैध खनन माफिया राज के लिए सरकार जिम्मेदार


    आज देश के अन्दर यू.पी., उत्तराखण्ड व अन्य राज्यों में अवैध खनन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। खनन माफियाओं का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि वे अपने खिलाफ किसी भी व्यक्ति को कुचलने में, किसी पर जानलेवा हमले करने-करवाने में, किसी को जिन्दा जलाकर मार डालने तक से भी पीछे नहीं हट रहे हैं। देश और राज्यों के अंदर सरकार-पुलिस-प्रशासन किसी तरह की शासन व्यवस्था कोई न्याय नाम की चीज ही नहीं है। ...

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आपका नजरिया- सत्ता की ताकत तले ढहते संस्थान


    याद कीजिये तो एक वक्त सीबीआई, सीवीसी और सीएजी सरीखे संवैधानिक संस्थानों की साख को लेकर आवाज उठी थी। वह दौर मनमोहन सिंह का था और आवाज उठाने वाले बीजेपी के वही नेता थे जो आज सत्ता में हैं और अब प्रधानमंत्री मोदी की सत्ता के आगे नतमस्तक होते तमाम संस्थानों की साख को लेकर कांग्रेस समेत समूचा विपक्ष ही सवाल उठा रहा है। तो क्या आपातकाल के चालीस बरस बाद संस्थानों के ढहने और राजनीति...

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आपका नजरिया- कफन और बीमा


देश के शीर्ष पर बैठकर

चिल्ला रहा है जोर से

बारह रुपये में कफन मिलता नहीं

बनता है जीवन बीमा यहां

समझ नहीं आया

दुनिया के सामने क्यों देेश की

भद्द पिटा रहा है

और कह रहा है

हम दुनिया की एक बेहतरीन शक्ति है।

जहां लोग कफन नहीं खरीद सकते

वहां बीमा पर्ची कैसे कटवा सकते हैं

जानता है शीर्ष गद्दी पर बैठा।

नंगेपन को छिपाने की कोशिश में <...

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आपका नजरिया- दोहरे शोषण की शिकार महिलाएं


    आज इस पूंजीवादी व्यवस्था में महिलाओं का दुगना शोषण होने लगा है। आज पूरी दुनिया का पूंजीपति वर्ग ने अपने माल को बेचने के लिए महिलाओं को एक बाजारी वस्तु बना दिया है। आज इस पूंजीवादी व्यवस्था में 12-12 घंटे काम और पुरुष की मजदूरी कम होने के कारण आज महिलाओं को भी दो वक्त की रोटी खाने के लिए कुछ न कुछ काम करना पड़ रहा है।

    कुछ महिलाएं चंद मीडिल क्लास लोेगों के घर सुबह-शाम झा...

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आपका नजरिया- सूरत इंसान की सी


    मैं इंसान के इतिहास के पन्नों को न उलट कर केवल काल के एक पल के कारनामे अर्थात् आजकल के इंसान के व्यवहार के बारे में देखता और सुनता रहता हूं। ज्योंही कदम दरवाजे से बाहर होते हैं; इंसान मिलना शुरू! (घर के अंदर के वातावरण को छोड़ रहा हूं।)  नाम इंसान का मेरे मस्तिष्क पर कुछ इस तरह उधेड़बुन करता हूं कि मैं किसको इंसान कहूं- या इंसान किसे कहा जाय।

    कोई कहता है मैं एमएससी पढ...

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आपका नजरिया- हम तो भारतवासी हैं


सुमधुर स्वर भावुक दिल अपना, हम तो भारतवासी हैं,

हर घर मंदिर, हर-घर पूजा, यहां के कण-कण में काशी है।



ऋषियों ने सदियों पहले ही, जीवन का सत्य बताया है,

यही कृष्ण ने मानव बनकर, गीता का ज्ञान सिखाया है। 



आगन्तुक में करते प्रभु के दर्शन, सेवा ही परिपाटी है,

सबको आश्रय देती आई, धन्य यहां की माटी है।



कितने निष्ठुर आक्रमणकारी, हमसे टकराकर हार गये,

...

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आपका नजरिया- आसार अच्छे दिनों के.....


    अच्छे दिन आने वाले हैं, आयेंगे अच्छे दिन! आना भी चाहिए। लेकिन कैसे? किसके भरोसे? किस रास्ते? जो सुसंस्कृत, श्रम साधक नागरिक के प्रयास से माटी पुत्रों के भरोसे, मानवता के रास्ते ही अच्छे दिन आते हैं। संकेतों पर विश्वास हो रहा है तो आयेंगे ही अच्छे दिन। इस कामना और विश्वास से स्पष्ट होता है विगत अच्छे दिन नहीं थे। आजादी की मस्ती के साथ ही अच्छे दिनों की कल्पनाओं, संभावनाओं, योजनाओ...

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आपका नजरिया- मोदी सरकार के अच्छे दिनों में गरीब-मेहनतकश अपने बच्चों को बेचने को मजबूर


मलकानगिरी, ओडिशा के गांव चित्तापल्ली-2 में रहने वाले दम्पत्तिा सुकुरा मुदुली और उसकी पत्नी धुमुसी मुदुली ने अपने 2 महीने के नवजात बेटे को वहां काम करने वाली आशा कार्यकर्ता को मात्र 700 रूपये में बेच दिया। 

    बताया जा रहा है कि सुकुरा और उसकी पत्नी धुमुसी मुदुली ने इलाज के लिए पैसों के अभाव में फरवरी माह में पड़ोसी गांव चित्तापल्ली-3 की आशा कार्यकर्ता को बेच दिया। यह परिवार ...

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आपका नजरिया- ‘मेक इन इंडिया’ निजीकरण-उदारीकरण की एक बड़ी छलांग


    ‘मेक इंन इंडिया’ को मोदी सरकार एक अनोखी, अद्भुत नीति के रूप में पेश कर रही है। ‘मेक इन इंडिया’ का बेसुरा राग छेड़कर यह इसे देश की कायाकल्प कर देने की घोषणा कर रही है। देश का विकास, रोजगार में वृद्धि जैसे झूठ प्रचारित कर रही है। ‘मेक इन इंडिया’ और कुछ नहीं 1990 में शुरू की गयी नयी आर्थिक नीतियों में एक बड़ी व निर्णायक छलांग है। यह वही नीतियां हैं ...

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आपका नजरिया- शिक्षा में सुधार के नाम पर केवल नारे


    वर्तमान मोदी सरकार ने आम बजट में शिक्षा के बजट में कटौती करके शिक्षा के प्रति अपनी असंवेदनशीलता का परिचय दे दिया है। प्रत्येक सामाजिक शिक्षा से जुड़ी फ्लैगशिप योजनाओं के बजट में जमकर कटौती की गयी है। 

    सर्व शिक्षा अभियान में करीब 2375 करोड़ रुपये की कटौती की गयी है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान में करीब 85 करोड़ की कटौती की गयी है। मिड डे मील में जहां पिछले वर्...

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आपका नजरिया- भीड़ को गुस्सा कब आता है?


नागालैंड के दीमापुर में हजारों की भीड़ ने सैय्यद फरीद को जेल में पुलिस की सुरक्षा से बाहर खींच कर निकाला। 7-8 किलोमीटर तक उसे घसीटते-पीटते रही और उसकी मौत हो जाने के बाद उसे फांसी पर लटका दिया गया। न्याय व महिला सुरक्षा के नाम पर। यह कहते हुए उसे मार डाला गया कि सैय्यद फरीद बांग्लादेशी मुसलमान है। यह पूरी घटना पुलिस के सामने हुई और पुलिस ने उसकी सुरक्षा के लिए कुछ भी नहीं किया। प्रशासन...

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आपका नजरिया- हाइकु


    (1)

दिल का हाल

खुलकर लिखना

सारे खत में।

    (2)

    भगदड़ में 

    निकालना समय

    अपने लिये।

        (3)

तु न दौड़ना

कभी भूलकर भी

अंधी दौड़ में।?

        (4)

    इस भीड़ में

    बचाना खुद का तू

    राह तलाश।

        (5)

सद मार्ग से

सदा भटकाता है

धन का न...

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आपका नजरिया- ‘सुधर जाओ नहीं तो मुश्किल होगी’


    गुजरात के सीएम मोदी बदले तो लोकसभा की जीत ने इतिहास रच दिया और प्रधानमंत्री मोदी बदले तो दिल्ली ने बीजेपी को अर्श से फर्श पर ला दिया। दिल्ली की हार से कहीं ज्यादा हार की वजहों ने संघ परिवार को अंदर से हिला दिया है। संघ उग्र हिन्दुत्व पर नकेल ना कस पाने से भी परेशान है और प्रधानमंत्री के दस लाख के कोट के पहनने से भी हैरान है। संघ के भीतर चुनाव के दौर में बीजेपी कार्यकर्ता और कैडर...

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आपका नजरिया- सैफई का समाजवाद


    सैफई महोत्सव की शुरूआत 1997 में स्व. रणवीर सिंह यादव ने की थी। 2002 में उनकी मृत्यु के पश्चात् उनको याद करते हुए हर वर्ष 26 दिसम्बर से 8 जनवरी तक सैफई महोत्सव का आयोजन किया जाता है। यह आयोजन पिछले साल सुर्खियों में रहा जब उ.प्र. में दंगे प्रभावित लोग ठंड में मर रहे थे और सैफई का आयोजन चल रहा था। इस साल यह राष्ट्रीय मीडिया में मुख्य खबर नहीं बन पाई। यह महोत्सव सरकारी आयोजन नहीं माना जाता ...

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आपका नजरिया- आज भी गुलाम हैं


साथियों पन्तनगर विवि में ठेका मजदूरों का शोषण जारी है और साथ ही उनका दमन भी किया जा रहा है। और हमारे क्षेत्र के बड़े नेता मुंह छिपा लिए हैं। पन्तनगर विवि के बड़े अधिकारी हम ठेका मजदूरों को गुलाम बना कर घरों पर बेगारी कराते हैं। और जब कोई ठेका मजदूर विरोध करता है तो उसे या तो काम से हटा दिया जाता है या उनके ऊपर फर्जी मुकदमे चलाये जा रहे हैं। साथियों पन्तनगर विवि में पढ़ाई-लिखाई और शोध क...

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आपका नजरिया- लव जेहाद के नाम पर आम जनता का ध्यान भटकाना


आजकल लव जेहाद का काफी शोर शराबा मचा है। इसके पीछे कट्टर हिन्दूवादी पूंजीपति एवं सरकार का हाथ है। वे आम जनता का ध्यान भटकाकर अपने मन पसन्द नीतियां लागू करवाकर अपनी तिजोरियां भरने का पूरा इंतजाम कर रहे हैं। ज्यादातर ये बताया जाता है कि मुस्लिम समुदाय के लड़के ने, हिन्दू समुदाय की लड़की को बरगलाकर या जोर जबर्दस्ती का कोई भी हथकंडा अपनाकर शादी कर ली है और उसे बंधक बना लिया है।

  य...

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आपका नजरिया- गणेश शंकर विद्यार्थी का लेख कबीर की याद दिला गया


    ‘नागरिक’ पाक्षिक 16-30 नवम्बर 2014 पढ़ गया। पृष्ठ 5 पर गणेश शंकर विद्यार्थी का आलेख-‘जिहाद की जरूरत’ एक बार फिर कबीर की याद दिला गया। कबीरोक्ति है कि- 

कंकड-पत्थर जोरि के मस्जिद लेय बनाय।

ता चढि़ मुल्ला बांग दे, क्या बहरा हुआ खुदाय।।

तथा

हिन्दू अपनी करै बडाई, गागरि छुअन न देई।

वेश्या के पायन तरू सोवे, यह देखो हिन्दुआई।।

    ठीक उसी प्रकार से ग...

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आपका नजरिया- नरेन्द्र मोदी का ‘स्वच्छ भारत अभियान’


    देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथाकथित मीडिया व अन्य प्रचार माध्यमों की कृपा से और उनके अनुसार लोगों के दिलों में छा गये हैं। सब जगह मोदी छाये हुए हैं। इनके अनुसार मोदी के पास देश की सभी समस्याओं का रामबाण इलाज है। मोदी कुछ कह या कर देते हैं तो उसे जोर-शोर से दिखाया या प्रचारित किया जाता है। यह बात अन्ना आंदोलन के समय की याद ताजा कर देती है। जब सब जगह अन्ना हजारे व केजरीवाल ...

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आपका नजरिया- जब सत्ता ही देश को ठगने लगे तो...!!!


    एक तरफ विकास और दूसरी तरफ हिन्दुत्व। एक तरफ नरेन्द्र मोदी दूसरी तरफ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। एक तरफ संवैधानिक संसदीय राजनीति तो दूसरी तरफ हिन्दू राष्ट्र का ऐलान कर खड़ा हुआ संघ परिवार। और इन सबके लिये दाना-पानी बनता हाशिये पर पड़ा वह तबका, जिसकी पूरी जिन्दगी दो जून की रोटी के लिये खप जाती है। तो अरसे बाद देश की धारा उस मुहाने पर आकर थमी है जहां विकास का विजन और हिन्दुत्व की द...

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आपका नजरिया- नेता बेचारे प्रचार के मारे


जहां मोदी सरकार पूंजीपतियों पर मेहरबान है, वहीं मेहनतकश जनता को भरमाने के लिए उसकी नौटंकी है ‘स्वच्छ भारत अभियान’। भाजपा का यह स्वच्छ भारत अभियान कितना स्वच्छ है यह भाजपा के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय की झाडू देखकर लग जाता है। सतीश उपाध्याय ने स्वच्छ भारत अभियान का हिस्सा बनने के लिए झाडू तो हाथ मे...

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आपका नजरिया- लोग से दूर होता ‘लोकतंत्र’


    15 अगस्त 1947 के बाद कुछ लोग इसको सत्ता हस्तांतरण मानते हैं तो कुछ राजनीतिक स्वतंत्रता तथा कुछ लोगों को यह पूर्ण स्वतंत्रता लगती है। स्वतंत्र भारत मानने वाले लोगों की तरफ से भारतीय लोकतंत्र को दुनिया का सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में प्रचारित किया जाता रहा है। वह यह कहते नहीं थकते हैं कि यहां करोड़ों लोगों द्वारा चुनी गई सरकार होती है। कार्यपालिका, विधायिका, न्यायपालिका है जो ब...

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आपका नजरिया: मोदी सरकार मजदूर विरोधी है।


श्रम कानूनों में पूंजी के हित में संशोधन की तैयारी


    केन्द्र सरकार श्रम कानूनों को पूंजीपतियों के हित में संशोधन करने की तैयारी में जुटी है। प्रधानमंत्री ने पीएमओ एवं श्रम मंत्रालय को श्रम कानूनों में संशोधन करने के लिए एक खाका खींचने को कहा है। वर्तमान में उद्योग क्षेत्र में मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र काफी संकट के दौर से गुजर रहा है। इस संकट को दूर करने के लिए मजदूरों के अधिकारों एवं सुविधाओं में कटौती करने की योजना बनायी जा...

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आपका नजरिया: नर्सरी टीचर ट्रेनिंग के नाम पर फर्जीवाड़ा


    पौड़ी जिले के कोटद्वार क्षेत्र में एनटीटी (नर्सरी टीचर ट्रेनिंग) के नाम पर एक महिला द्वारा फर्जीवाड़े करने का मामला प्रकाश में आया जिसमें कि महिला द्वारा कई छात्राओं व महिलाओं को एनटीटी का कोर्स करवाया जा रहा है और एनटीटी के फर्जी सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं, साथ ही कई छात्राओं से फीस लेकर बिना पेपर दिलाए ही प्रमाणपत्र बांटे जा रहे थे।

    कोटद्वार में लगभग 15 साल पहले ...

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आपका नजरिया- मोदी जी पब्लिक है सब जानती है


    नरेन्द्र मोदी ने सी.एन.एन. के लिये फरिद जकारिया को दिये गये साक्षात्कार में कहा है कि ‘‘भारतीय मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल उठाये नहीं जा सकते। भारतीय मुस्लिम भारत के लिए जीते हैं और भारत के लिए ही मरते हैं’’। मोदी का यह शब्द सुनने में काफी अच्छा लगता है और मोदी के असली चेहरे को नहीं जानने वाला उनका युवा मतदाता उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष नेता भी मानने लगता है। इस युवा वर्...

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आपका नजरिया- गजल


पसीना भाल का चंदन बनाना है,

श्रमिक के वास्ते नंदन सजाना है।



दहकती आग मन की कम नहीं होगी,

ठिठुरती हड्डियों का गन बनाना है।



भीगी आंख में अंगार सुलगाकर,

नया इतिहास शोले से रचाना है।



समय के ठहरने का युग नहीं आता,

सटकते मोर को कुन्दन बनाना है।



दमन के काफिले बढ़ते चले जाते,

चमन में आदमीयत को उगाना है।



किसी भी जंग में ...

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आपका नजरिया- साफ सुथरा कानून


    मेरी लड़की ने पुणे से बहुत उत्तेजना में पूछा कि पापा आपने आज दूरदर्शन देखा कि नहीं? मैंने जवाब दिया कि हां, आज अकबर की जोधा के प्रति गलतफहमी दूर हो गई, सास बहू से नाराज हो रही थी, भगवान कृष्ण ने द्रोपदी का चीर इतना बढ़ाया कि दुस्साशन चीरहरण करते-करते थक गया, भगवान गणेश चूहों के साथ खेल रहे थे, सब टी.वी. में चन्द्रमुखी चौटाला पुरुष कान्सटेबलों को मारती रहती है तब भी वे उसकी शिकायत आ...

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आपका नजरिया- कोशिश


एक चिडियां

उड़ती हुयी कहीं से आएगी

पता नहीं साथ में क्या लाएगी

एक काम करना

खिड़कियों से परदे हटा देना



सफर में दिख जाएं कहीं

नरगिस या मधुबाला

रूमाल हवा में हिला देना



न सही 

तुम्हारी जिंदगी

किसी इतिहास का हिस्सा न सही

जितना याद हो

उतना सुना देना



भूले से मिल जाए तुम्हें उसकी

अंगूठी शकुन्तला की

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आपका नजरिया- योजना आयोग के 17.5 लाख के दो पैखानों का क्या होगा ?


      बहुत कम समय पहले की बात है भारत देश में एक प्रधानमंत्री हुआ करता था। उसका नाम था मनमोहन सिंह। उससे पहले वह वित्तमंत्री भी रह चुका था। उसके पास डिग्रियों का अंबार था। प्रधानमंत्री होने के बावजूद उसमें घमंड बिल्कुल नहीं था। ज्ञानी और अक्लमंद लोगों की तरह वह भी अक्सर शांत रहता था। भ्रष्टाचार को लेकर कितना भी हल्ला मचता रहे, वह कभी विचलित नहीं होता था। लोग उन्हें मौनी बाबा कहक...

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आपका नजरिया- गंगाजी का अमृत कलश


    आजकल इन दिनों में गंगाजी की कलश यात्रा निकाली गयी एवं जगह-जगह उसके स्वागत में हार, फूल, माला, धूपबत्ती, अगरबत्ती, घी के दिये से आरती, पूजा इत्यादि हो रही है। 

    ये सारे कार्यक्रम नेता, मंत्री एवं गणमान्य व्यक्ति एवं महिलाएं कर रहे हैं। लेकिन मुख्य उद्देश्य जो इसका है। मां गंगाजी का जल शुद्ध करने के संबंध में। शायद ही किसी का ध्यान इधर जाता हो। जबकि लोगों का यह मानना ह...

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आपका नजरिया- विवेक पर हमला


    क्या आप दीनानाथ बत्रा को जानते हैं? क्या नहीं जानते? अरे भाई ये तो अपने आपको बहुत बड़ा शिक्षाशास्त्री, इतिहासकार, लेखक, भारतीय संस्कृति का रक्षक बताते हैं। ये महानुभाव चर्चा में तब आए जब इन्होंने इस वर्ष के प्रारंभ में अमेरिकी लेखिका वेंडी डोनिगर की पुस्तक ‘द हिंदू-एन अल्टरनेटिव हिस्ट्री’ पर प्रतिबंध लगा दिया। और बीजेपी के सत्ता में आते ही इनके ‘कु’कर्मों की चर्चा जो...

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आपका नजरिया - गीता पढ़ो, ‘स्वधर्म’ का पालन करो


    उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश अनिल दवे ने पिछले दिनों एक बयान दिया जिसमें उन्होेंने कहा ‘‘यदि मैं देश का तानाशाह होता तो कक्षा एक से ही श्रीमदभागवत गीता की पढ़ाई करवाता’’। वे कहते हैं कि श्रीमदभागवत गीता जीवन को सही ढंग से जीने का रास्ता सिखाती है। इससे समाज में अपराध कम होंगे। 

    यदि न्यायाधीश यह बात कह रहे हैं तो यह समझना जरूरी हो जाता है कि भगवदगीता ज...

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आपका नजरिया - कांवडिये बरेली में


    मानव विकास की यात्रा में मानव किन-किन युगांतकारी पड़ावों से गुुजरा यह कोई पहेली नहीं सच्चाई है। हर अगले पड़ाव में नये रंग रूपों पर ढलते मानव ने विकास यात्रा के दौरान कई दंश भी झेले, कई नई चीजों का सामना भी करना पड़ा। मानव सभ्यता के आरम्भिक काल में जब प्रकृति की घटनाओं अर्थात् डरावने या आनन्ददायक परिघटनाओं से मानव का साबका पड़ा तो भयंकर आंधी, तूफान, बाढ़, यहां तक कि बड़ी-बडी नद...

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आपका नजरिया- फिलिस्तीन मामले पर तमाम देशों द्वारा चुप्पी साधना


    फिलिस्तीन के मौजूदा हालात वहां जनता के लिए दहशत से भरे हुए हैं। क्योंकि वहां पर इजरायली सरकार द्वारा फिलस्तीन पर हमला पिछले 15-20 दिनों से लगातार जारी हैं। इस हमले में 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। उपरोक्त आंकड़ों से पता लगाया जा सकता है कि फिलिस्तीन की जनता, मजदूर-किसान, कर्मचारी, छात्रों, की जिंदगी किन हालातों में गुजर रही है। ऐसे संवेदनशील मामले के बारे में भारत में भी भा...

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आपका नजरिया- मंच पर आने की छटपटाहट -डा. कौशल किशोर श्रीवास्तव


    दिनांक 23 जून 2014 को किन्हीं राजनैतिक स्वयंभू शंकराचार्य ने सांई भक्तों पर प्रहार करते हुये कहा कि सांई बाबा के भक्तों को राम या ऊँ का प्रयोग नहीं करना चाहिये और हिन्दुओं को सांई की आराधना नहीं करना चाहिए। भगवान राम को द्वारका के शंकराचार्य एवं राजनैतिक पार्टियों ने पिंजरे में कैद कर रखा है। ये वे लोग हैं जो राम का मतलब नहीं जानते। राम का मतलब होता है आनंद दायक। इसी से आराम शब्...

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आपका नजरिया- भाजपा की पाठशाला


    भाजपा की जीत के बाद उसके वादों और इरादों को लेकर बहुतेरे सवाल उठे, ऐसा किसी भी नई सरकार के बनने के बाद होता है। जहां तक सवाल है सरकार के कामकाज का तो एक महीने में उसका आंकलन करना थोड़ी जल्दबाजी होगी पर उसके नीति-नियंताओं द्वारा ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का ‘मंत्रोचार’ और ‘कार्यसंस्कृति’ नीतिगत बदलाव के स्पष्ट संकेत दे रही है।

    पीएम के दस मंत्र हों या फिर देश...

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आपका नजरिया- हम तो जनता जनार्दन की बात बोलते हैं


आप इस सिस्टम में संशोधन की बात करते हैं

हम समूची सोच में परिवर्तन की बात करते हैं



पहले तो गगनचुंबी इमारत बना लेते हैं लोग

और फिर उसमें खुले आंगन की बात करते हैं



वे रहनुमा थे, हांक लाए कारवां तप्त सहरा में

चिलकती धूप में अब सावन की बात करते हैं



आप खुश हैं, कसीदा समझ के ग़ज़लों को

जबकि हम तो जनता जनार्दन की बात करते हैं

        ...

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आपका नजरिया- सूखे की आहट में मोदी सरकार के हड़बडी भरे कदम


    लहलहाती फसल हो या फिर परती जमीन। जबरदस्त बरसात के साथ शानदार उत्पादन हो या फिर मानसून धोखा दे जाये और किसान आसमान ही ताकता रह जाये। तो सरकार क्या करेगी या क्या कर सकती है। अगर बीते 10 बरस का सच देख लें तो हर उस सवाल का जबाव मिल सकता है कि आखिर क्यों हर सरकार मानसून कमजोर होने पर कमजोर हो जाती है और जब फसलें लहलहाती है तब भी देश के विकास दर में कृषि की कोई उपयोगिता नहीं होती। तीन वजह...

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आपका नजरिया- द डर्टी पाॅलिटिक्स


    वर्तमान समाज पूंजीवादी समाज है। इस समाज में जितने भी पूंजीपति व पूंजीपति वर्ग की पार्टियां हैं उन सबका मुझे एक ही लक्ष्य नजर आता है- वह है अधिक से अधिक भ्रष्टाचारी, गुण्डों, दबंगों का राजनीति में प्रवेश। इसलिए राजनीति को इस कदर डरावना बनाया जा रहा है कि सामान्य लोगों को राजनीति (डर्टी) यानी गंदी लगने लगती है। और समाज में से वही लोग चुनाव लड़ते हैं जो अधिक से अधिक पैसे वाले हैं ...

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आपका नजरिया- नगीना बस्ती, उपभोक्तावादी संस्कृति और अच्छे दिन


    लालकुंआ में नगीना बस्ती है जो कि रेलवे की जमीन पर बसी हुई है। इसमें लगभग 100 परिवार रहते हैं।  जिसमें से कुछ तो 20-25 सालों से यहां पर रह रहे हैं। इस बस्ती में रहने वाले सभी ठेके में मजदूरी करते हैं। कुछ लोग सेन्चुरी में, वन निगम गोला में और कुछ लोग गाड़ी चलाते हैं। इन लोगों के काम की कोई गारंटी  नहीं रहती है।

    रेलवे ने दो साल पहले इस बस्ती को आधा तोड़ दिया था। बाकी को छोड...

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आपका नजरिया- अच्छे दिन आने वाले हैं


16 वीं लोकसभा के चुनाव परिणाम मीडिया, सभी पार्टियों एवं चुनावी विश्लेषकों के अनुमान के विपरीत रहे हैं। खुद बीजेपी के लिए ये परिणाम आश्चर्यजनक रहे हैं। इस जीत से आर.एस.एस. को संजीवनी मिल गई है। यह ऐसा चुनाव था, जहां पहले से ही हार-जीत का फैसला हो चुका था। सट्टेबाजों ने कांग्रेस पर दांव लगाना बंद कर दिया था। अदानी, टाटा, रिलायंस जैसे उद्योगपति के साथ-साथ पूरे उद्योग जगत के मुख्य चहेते नरे...

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आपका नजरिया-- ‘‘दंगों की राजनीति....तड़का,’’1-15 अप्रैल 2014 पर प्रतिक्रिया


    मुजफ्फनगर के दंगों पर विविध पत्र-पत्रिकाओं में जो पढ़ा और टी.वी. पर विविध समाचार चैनलों पर जो देखा उससे ऐसा लगता है कि उक्त लेख में घटनाक्रम, तथ्य तथा सत्य और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वतः संज्ञान लेकर प्रशासन की ढिलाई के बारे में की गयी आलोचना का व्यवस्थित और निष्पक्ष विवरण नहीं है। कई पत्र-पत्रिकाओं में बताया गया है कि एक जाति-धर्म के लड़के ने दूसरे जाति धर्म की लड़की को छ...

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आपका नजरिया- व्यवस्था का रक्षक भूतनाथ लौटकर आया


    पिछले दिनों बालीवुड में कई फिल्में आयीं जिनका संदर्भ लोकतंत्र के तथाकथित महापर्व चुनाव से था जिसमें अलग-अलग कोणों से बातें की गयीं, गुलाब गैंग, यंगिस्तान वगैरह थीं। इन्हीं में से एक फिल्म थी भूतनाथ रिटन्र्स। इस फिल्म में अनेक प्रकार से व्यवस्था को बचाने का या उसका पक्ष साफ करने का प्रयास किया गया है। फिल्म में भूतनाथ को भूतों की दुनिया से अपमानित महसूस करने पर (क्योंकि पिछ...

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आपका नजरिया- मुजफ्फरनगर दंगे: इंसाफ की आस


    पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पिछले साल हुई सांप्रदायिक हिंसा ने हमारे लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया था। इसने राज्य मशीनरी की उपेक्षा से उपजी सांप्रदायिक हिंसा का वीभत्स रूप पेश किया। नफरत भरे सांप्रदायिक प्रचार को त्वरित रूप से रोकने के बजाय राज्य मशीनरी ने निष्क्रिय रहकर फलने-फूलने का भरपूर अवसर दिया जिसके परिणाम स्वरुप पश्चिमी उत्तर प्रदेश में धार्मिक उन्मा...

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आपका नजरिया- दंगों की राजनीति पर आतंकवाद का तड़का


    मुज़फ्फरनगर, शामली बाग़पत और मेरठ के दंगे जो आमतौर पर मुज़फ्फरनगर दंगा के नाम से मशहूर हैं, के बाद हुए विस्थापन और दंगा पीडि़त कैम्पों की स्थिति की चर्चा तथा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर अभी चल ही रहा था कि अचानक अक्टूबर महीने में राजस्थान में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए राहुल गांधी ने आईएसआई के दंगा पीडि़तों के सम्पर्क में होने की बात कह कर सबको चैंका दिया। राहुल गांध...

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आपका नजरियाः विचार


    विचार शब्द लगता ऐसा है जैसे कोई साधारण सी बात हो। पर यह साधारण सा लगने वाला शब्द इतना साधारण नहीं है। चूंकि मनुष्य जिस परिवेश में जी रहा होता है। उसके इर्द-गिर्द वह अगर निगाह नहीं डालता तो विचार का प्रसार संकुचित सा बना रहता है। मनुष्य ज्योंही एक परिवेश से बाहर निकल कर दूसरे में प्रवेश करता है, कुछ न कुछ उसके सोचने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। इस पर भी मानव की एक बलवती भावना उसको ...

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आपका नजरियाः किसान की आवाज


    आप सभी लोग जानते हैं कि आज जो भी हमें अन्न प्राप्त होता हैं उसे किसान कड़ी मेहनत करके कमाता है और उसे वह बेचता है। क्या उसे इसका सही रूप में पैसा( उचित मूल्य )मिलता हैं? यह बात सोचनीय है।

          आज के दौर में किसान पहाड़ से या मैदानी भाग से सब्जी या अनाज का उत्पादन करता है। वह उसे किसी तरह मण्डी (सब्जी बेचने का स्थान ) लाता है, वहां उसे उचित दाम नहीं मिलते, क्यों? क्योंकि व...

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आपका नजरियाः प्राथमिक शिक्षा के हालात


    आजकल उत्तराखण्ड के स्कूलों में गृह परीक्षाएं चल रही हैं। स्कूल संसाधनों व शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। उन्हीं में से लालकुंआ में स्थित कन्या जूनियर हाईस्कूल है जो कि 6 से 8 तक है। उसमें 500 से अधिक छात्राओं की संख्या है और शिक्षक सिर्फ 4। स्कूल में 2 सेक्शन लगते थे। अब 6 सेक्शन बनाये गये है। प्रत्येक कक्षा के लिए 1 शिक्षक भी मौजूद नहीं है। अब तो सरकार ने परीक्षा के लिए मिलने ...

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