लेबिल (कुल समाचार - 6): सेमिनार पत्र

मजदूर संघर्ष और मीडिया


    (17 दिसम्बर को गुड़गांव में ‘नागरिक’ द्वारा ‘मजदूर संघर्ष और मीडिया’ विषय पर आयोजित सेमिनार में प्रस्तुत सेमिनार पत्र)

    पूंजी के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ मजदूर वर्ग लगातार संघर्षरत रहा है। पूरी दुनिया के मजदूर आंदोलन की तरह भारत में भी मजदूर संघर्षों का गौरवशाली इतिहास रहा है। पूंजीवादी व्यवस्था में पूंजी के खिलाफ श्रम का संघर्ष एक अनवरत व निरंतर चलने वाला स...

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मीडिया और जातिवाद


    (28 सितम्बर 2016 को हल्द्वानी में आयोजित सेमिनार में प्रस्तुत पत्र)

    जाति व्यवस्था भारतीय समाज की एक बहुत उत्पीड़नकारी, शोषणकारी घृणित व्यवस्था है जो भारतीय समाज में हजारों सालों से चली आ रही है। पेशों की ‘अपरिवर्तनीयता’ एवं पेशे की ‘पवित्रता’ पर आधारित सोपान क्रम व खान पान व सामाजिक संसर्ग में छुआछूत पर आधारित यह व्यवस्था मेहनतकश समुदाय के लिए क्रूर शोषण ...

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उदारीकरण का दौर और ई.एस.आई. निगम


    कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम 1948 में अस्तित्व में आया, हालांकि इसकी प्रक्रिया ब्रिटिश कालीन भारत में ही शुरू हो चुकी थी, जबकि 1923 में ब्रिटिश कालीन भारत सरकार ने भारत में औद्योगिक श्रमिकों के स्वास्थ्य बीमा योजना पर एक रिपोर्ट तैयार करने के लिए प्रो.बी.पी. अड़रकर को नियुक्त किया। प्रो. अड़रकर द्वारा तैयार रिपोर्ट ही कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम (ई.एस.आई. एक्ट) का आधार बनी, जिसे लागू ...

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हिन्दू फासीवाद और मीडिया


सेमिनार पत्र


(27 सितम्बर को नई दिल्ली में आयोजित सेमिनार में प्रस्तुत पत्र- सम्पादक)

    कुछ समय पूर्व भारतीय अखबारों और खासकर इंटरनेट में एक तस्वीर सामने आयी थी। इस तस्वीर को एक पत्रकार ने शीर्षक दिया ‘‘प्रधानमंत्री की पीठ पर किसका हाथ?’’ तस्वीर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के सबसे बड़े पूंजीपति मुकेश अंबानी की पत्नी का अभिवादन कर रहे थे और ...

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नारी आंदोलन के समक्ष चुनौतियां


(24 अगस्त, 2014 को दिल्ली में ‘महिला आंदोलन की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित सेमिनार में प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र द्वारा प्रस्तुत पत्र। स्थानाभाव के कारण चुनिन्दा अंश ही दे रहे हैं- सम्पादक) 

        साथियो! आजादी के 67 वर्ष गुजर जाने के बाद भी आज महिलायें अत्याचार, उत्पीड़न, दमन, भेदभाव और शोषण की शिकार हैं। आये दिन समाचार पत्र बलात्कार और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की ...

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मीडिया और मजदूर वर्ग


(23 मार्च 2014 को फरीदाबाद में आयोजित वार्षिक सेमिनार में ‘नागरिक’ की ओर से पेश किया गया था। -सम्पादक)

    मीडिया को आमतौर पर किसी भी समाज का दर्पण समझा जाता है। भारत में तो मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है। अपने लिए यह उपाधि खुद मीडिया ने स्वघोषित रूप से अर्जित की है।

    हम एक वर्ग विभाजित समाज में रहते हैं, यह इस युग का सबसे बड़ा सच है। ऐसे में समाज ...

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