लेबिल (कुल समाचार - 26): नारी जगत

उड़ीसा में सामूहिक बलात्कार की शिकार लड़़की द्वारा आत्महत्या ?


    22 जनवरी को उड़ीसा के कोरापुट जिले में एक नाबालिग दलित लड़की ने आत्महत्या कर ली। 10 अक्टूबर, 2017 को उसे सामूहिक बलात्कार का शिकार बनाया गया था। उसने सुरक्षाबलों के चार जवानों के विरुद्ध सामूहिक बलात्कार करने की शिकायत की थी। सुरक्षाबलों के जवानों के विरुद्ध शिकायत करने के बावजूद उड़ीसा की पुलिस न सिर्फ निष्क्रिय बनी रही बल्कि पीड़ित नाबालिग लड़की पर शिकायत वापस लेने के लिए लगातार ...

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पाकिस्तान में विरोघ प्रदर्शनों की लहर


8 वर्षीया मासूम की बलात्कार व हत्या


    बीते दिनों पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में एक 8 वर्षीया मासूम लड़की जैनब की बलात्कार के पश्चात हत्या कर दी गयी। जैनब अपने घर के पास ट्यूशन पढ़ने गयी थी जहां से उसे अगवा कर लिया गया। उसकी लाश 4 दिन बाद एक पुलिस कांस्टेबल को कूढ़े के ढेर से मिली।

    इस घटना की खबर लगते ही पाकिस्तान में पंजाब प्रांत में विरोध प्रदर्शनों ...

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मोदी सरकार का एक और राजनीतिक स्टंट


तीन तलाक विघेयक


    तीन तलाक को अवैध व अपराधिक घोषित करने वाले ‘‘मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार सुरक्षा) अध्यादेश 2017 अथवा ‘तीन तलाक विधेयक’ को लोकसभा ने 28 दिसम्बर 2017 को पारित कर दिया। यह अध्यादेश अब राज्य सभा में विचाराधीन है तथा राज्य सभा से पारित होने पर कानून की शक्ल ले लेगा। 

    तीन तलाक विधेयक एक बार में मौखिक रूप से तीन बार तलाक कहने या इलेक्ट्रोनिक माध्यमों, व्हाट्स एप्प या क...

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महिलाओं के साथ अपराध: कुछ आंकड़े


    पिछले दिनों राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो द्वारा वर्ष 2016 के अपराधों की रिपोर्ट जारी की गयी। इस रिपोर्ट से महिलाओं के साथ होेने वाले अपराधों के कुछ आंकड़े यहां प्रस्तुत हैं। 

1. वर्ष 2016 में महिलाओं के साथ होने वाले कुल अपराधों की संख्या में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि हुयी है। वर्ष 2015 में जहां 3,29,243 अपराध महिलाओं के खिला...

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‘‘बेटी बचाओ’’ की जगह ‘‘बेटी उठाओ’’


    असम के पांच जिलों कोंकराझार, गोलपारा, धुबरी, चिरांग, बोंगीगांव की 31 आदिवासी लड़कियों को तस्करी कर; सरस्वती शिशु मंदिर, हलवद, गुजरात तथा माता गुजरी कन्या छात्रावास, पटियाला, पंजाब में रखा गया था। जिनमें 20 गुजरात व 11 हरियाणा से मिली हैं। हाल में यह मामला तब प्रकाश में आया जब आउटलुक पत्रिका के लिए 3 माह से इस घटना की पड़ताल कर रही नेहा दीक्षित पर हमला तथा पत्रिका के संपादक, प्रकाशक के ख...

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बलात्कार के मामलों में मेडिकल पेशे की असफलता: एक डाक्टर का विवरण


(डा. पुनीत बेदी दिल्ली के अपोलो अस्पताल में स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग के वरिष्ठ कंसल्टेंट हैं। इनके पत्र के कुछ अंशों का भावानुवाद यहां प्रस्तुत है इसे www. india resists.com से साभार लिया गया है)

    जनवरी की ठंड में आधी रात के लगभग मुझे इमरजेंसी रूम में बुलाया गया। मैं अभी स्त्री रोग एवं प्रसूति विभाग से जुड़ा ही था। मैंने चारों ओर चीजों को देखा और विशेषज्ञता महसूस करने की कोशिश क...

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घर छोड़कर कहीं भाग जाऊं....


    किशोर उम्र की बालिका से लेकर बुजुर्ग महिलाओं के दिल में बार-बार यह ख्याल आता है कि घर छोड़कर ‘‘कहीं’’ भाग जाऊं। ‘कहीं’ ऐसी जगह, जहां घर के डंडे न हों, पति या पिता की चिक-चिक न हो, बच्चों के सिरदर्द न हो, बस जहां शाति हो। मनमुताबिक जीने का मौका हो।

    किशोर उम्र की लड़की अधेड़ स्त्री में तब्दील हो जाती है पर ‘कहीं’ भाग जाऊं की भावना सदैव बनी रहती है। ‘कहीं’ कभी ...

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नारी मुक्ति संघर्ष के कारवां को आगे बढ़ाओ


8 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक महिला दिवस


    आठ मार्च दुनिया भर की मजदूर महिलाओं का अंतर्राष्ट्रीय त्योहार है। इस दिन पूरी दुनिया में मेहनतकश महिलायें सड़कों पर उतर कर अपनी गुलामी की जंजीरें तोड़ फेंकने का संकल्प लेती हैं। वे पुरुष मजदूरों के साथ मिलकर गुलामी के हर रूप को मिटाने और इस हेतु पूंजीवाद-साम्राज्यवाद को इतिहास के अजायबघर में पहुंचाने का संकल्प लेती हैं।

    1893 में दूसरे कम्युनिस्ट इंटरनेशनल ने स...

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गरीबी और अमीरी के पर्याय: मंजू दास और अनिल कुमार


    मंजू दास पश्चिम बंगाल के एक गांव की गरीब महिला है। वह अपने गांव में एक आधे बने मकान में अपने बेटे, बहू और पोती के साथ रहती है। वह एक ढ़ाबे पर काम करती है और वहां से मिलने वाले नाम मात्र के मेहनताने और भोजन से घर की अर्थव्यवस्था चलाने में मदद करती है। मंजू दास का लड़का एक मोबाइल कम्पनी के लिए काम करता है जो उसे पांच हजार रुपये प्रति माह देती है। इस काम के एवज में उसे प्रतिदिन कई किल...

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1917 की क्रांतियों में रूसी महिलाओं की शानदार भूमिका


    यह सभी जानते हैं कि रूस में फरवरी क्रांति में जारशाही का तख्ता पलट गया। इस क्रांति ने पूंजीपति वर्ग की सत्ता स्थापित की। इस क्रांति में मजदूर वर्ग के साथ-साथ विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया था। इसी क्रांति के साथ ही मजदूर वर्ग के नेतृत्व में समाजवादी क्रांति की तैयारी शुरू हो गयी। बोल्शेविक पार्टी के नेतृत्व में यह क्रांति 25 अक्टूबर 1917 (नये कलेण्डर के अनुसार, 7 नवम्बर 1917) को सत्त...

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नारी आंदोलन के इतिहास के बारे में चंद बातें


    नारी आंदोलन समाज की कार्यसूची में पूंजीवाद के साथ आया। शुरूआती दौर में समाज की पढ़ी और सम्पत्तिवान महिलाओं का उद्देश्य जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबरी करने का था। तब से अब तक नारी आंदोलन लम्बा सफर तय कर चुका है। 

    प्रबोधन काल में शुरू करके शिक्षित वर्ग की महिलाओं ने शिक्षा, काम और अन्य अधिकारों में बराबरी की मांग की थी। उदाहर...

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सेंट स्टीफंस में यौन उत्पीड़न घटना और सबक


    यौन छेड़छाड़ एक ऐसी समस्या है जिससे भारत की प्रत्येक लड़की परिचित है। कम उम्र से ही प्रत्येक औरत को किसी न किसी जगह इस तरह के कटु अनुभवों का शिकार होना पड़ता है। यह रिपोर्ट भेदभाव भरी होगी यदि इसमें इस उम्र के पुरुषों को न जोड़ा जाए। बच्चे इस तरह के शिकार बनते हैं और तनाव की हालत में छोड़ दिये जाते हैं। कुछ तो अपने बोलने की क्षमता ही खो देते हैं। टाइम्स आफ इण्डिया द्वारा कराये ...

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कानूनी नुक्तों में छिपे हैं पितृसत्तात्मक मूल्य


    अक्सर ही हमको बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिलाते समय, कोई फार्म भरते समय पूछे जाने वाले सवाल एक स्वाभाविक प्रक्रिया लगते हैं उनके पीछे छुपे कानूनी नुक्ते हमारी पकड़ में नहीं आते। पहले ऐसे फार्मों पर व्यक्ति का नाम, उसके पिता का नाम पूछा जाता है। उसके स्कूल प्रमाण-पत्रों पर भी इन्हीं का नाम दर्ज होता था। कुछ सालों पहले इस पर आपत्ति उठाये जाने पर मां का नाम भी पूछा व दर्ज किया जा...

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पूंजीवादी समाज में महिलाओं के अतिशोषण के बारे में


(दूसरी किस्त)

(मार्लिन डिक्सन का प्रस्तुत लेख पिछले लेख की कड़ी में है। इस लेख में उन्होंने पूंजीवाद के अंतर्गत आणविक परिवार की संस्था द्वारा महिलाओं के अति शोषण की प्रक्रिया को समझाया है। उम्मीद है कि पाठकों को नारी समस्या के पक्ष को समझने में यह मदद करेगा। प्रस्तुत लेख 1977 में लिखा गया था- सम्पादक)

    विभिन्न तरह के नारीवादी एक या दूसरे रूप ...

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शासन-प्रशासन की लापरवाही ने ली 17 वर्षीय बालिका की जान


    उत्तराखण्ड के रामनगर कस्बे से 20 किलोमीटर दूर स्थित गांव वीरपुर लच्छी में शासन-प्रशासन की लापरवाही ने एक 17 वर्षीय बालिका आशा की जान ले ली। 24 मार्च को गांव में एक ढिल्लन स्टोन क्रेशर के लिए उपखनिज ले जा रही ट्रैक्टर ट्राॅली से उछला एक पत्थर आशा की कनपटी के ऊपर लगा। आशा को तुरंत ही अस्पताल में भर्ती कराया गया और अगले दिन उसकी मौत हो गयी। गांव वालों को बालिका की इस मौत ने झकझोर दिय...

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पूंजीवाद के अंतर्गत महिलाओं की गुलामी


    प्रस्तुत लेेख मारलिन डिक्सन के लेख का हिन्दी रूपांतर है। यह लेेख 1977 में प्रकाशित हुआ था। 1970 के दशक में नारी मुक्ति आंदोलन और तरह-तरह के नारीवादी आंदोलनों के बीच बहस चल रही थी। उस समय के पूंजीवादी अमेरिका के भीतर नारी मुक्ति आंदोलन का क्या परिप्रेक्ष्य होना चाहिए था। यह लेख इस पर प्रकाश डालता है। 

    आज के नारी मुक्ति आंदोलन के परिपे...

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भारतीय नारी मुक्ति आंदोलन के समक्ष प्रमुख चुनौतियां


                                                                                                       I

    भारतीय समाज में पहले के मुकाबले भारत की नारियों में मुखरता बढ़ती जा रही है। खासकर नौजवान महिलाएं अपने साथ होने वाले भेदभावों की मुखालफत आज ज्यादा तेजी से कर रही हैं। यह बात इस सच्चाई के बीच है कि भारतीय समाज में सरकारी दस्ता...

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नारी आंदोलन का विकास


    नारी आंदोलन की शुरूआत किसी भी जनवादी आंदोलन की तरह पूंजीवाद के विकास के साथ जुड़ी हुई है। सबसे पहले ये मध्यम वर्गीय नारियों के बीच से शुरू हुआ। इसने नारी समुदाय के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। और जीवन के हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ समानता की मांग की। इसलिए यह पुरुष विरोधी पितृसत्ता के विरुद्ध शुरू हुआ। लेकिन जब मजदूर महिलाएं इसमें शामिल र्हुइं और तब स...

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यौन उत्पीड़न के खिलाफ जादवपुर वि.वि. के छात्र आंदोलनरत


    पं.बंगाल के जादवपुर वि.वि. के विद्यार्थी अपनी छात्रा साथी के साथ हुई यौन हिंसा के खिलाफ आंदोलनरत हैं। गुण्ड़ों की गिरफ्तारी की मांग अब कुलपति के इस्तीफे तक जा पहुंची है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस व कुलपति गुण्ड़ों को बचाने में जुटा है। प्रदर्शनरत छात्रों पर बड़े पैमाने पर लाठी चार्ज किया गया। करीब 36 छात्र घायल हुये हैं और 40 गिरफ्तार किये जा चुके हैं।

    28 अगस्त को ...

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एक दुःख भरी जिन्दगी की दास्तान


    मैं एक लड़की थी। लेकिन लड़की होने के नाते मेरी क्या ख्वाहिशें थीं, क्या अरमान थे उसे जाने बगैर मेरे मम्मी-पापा, मेरे परिवार, सभी ने मिलकर मेरे अरमानों का गला घोंट दिया। इसलिए मैं अब एक औरत हूं। शादी के बाद मैंने सोचा था कि मेरा पति मुझसे बहुत प्यार करेगा, मुझे खुश रखेगा। मेरी सारी जरूरतों को पूरा करेगा। मेरे ख्याल से सारी लड़कियां शादी के बाद ऐसा ही सोचती हैं। मैंने भी यही सोचा ...

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एक और नाबालिग गैंगरेप की शिकार


    यह घटना लालकुआं क्षेत्र के बिन्दुखत्ता गांव में तिवारी नगर जहां 2 साल पहले संजना हत्याकांड हुआ था, की है। संजना जो महज 8 साल की बच्ची थी, की बलात्कार करने के बाद हत्या कर दी गयी थी। उसी इलाके में एक बार फिर 16 साल की नाबालिग लड़की मुन्नी के साथ 4 लड़कों द्वारा बलात्कार करने और उसकी अश्लील वीडियो क्लिपिंग बनाने की घटना को अंजाम दिया गया। 

    यह घटना 20 मई की है। मुन्नी अपने...

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27 मई की भयावह रात की कहानी बेटियों के पिता की जुबानी


    27 मई की रात्रि लगभग 8 बजे दोनों चचेरी बहनें घर से शौच के लिये निकलीं। खेत में पप्पू यादव व 3 अन्य अज्ञात लोगों ने उन्हें दबोच लिया। इत्तेफाक से उनका चाचा बाबूराम भी मौके पर पहुंच गया और गुण्ड़ों से भिड़ गया। बाबूराम के विरोध करने पर पप्पू यादव ने बाबूराम पर पिस्तौल तान दी और उसे भगा दिया। वापस आकर बाबूराम ने सारी घटना अपने दोनों भाइयों को बताई। परिवार के सभी लोग लड़कियों को तला...

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बदायूं में दो नाबालिग दलित बहनों के साथ गैंगरेप के बाद फांसी देकर हत्या


समाज की चुप्पी खतरनाक है


    बदायूं जिले का कटरा सआदतपुर गांव एकाएक दुनिया के नक्शे में उभर आया है। 27 मई 2014 की रात्रि लगभग 8 बजे दो नाबालिग चचेरी बहनें सीमा और नीमा (बदले हुए नाम) शौच जाने के लिये घर से बाहर निकलीं। घर से बाहर निकलने के बाद वह वापस नहीं लौटीं। अगली सुबह उनकी लाशें गांव के बीच में ही एक आम के पेड़ पर लटकी मिलीं। जिसने भी सुना वह घटना स...

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रोजगार के क्षेत्र में पिछडती महिलायें


    महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण का हल्ला मचाने वाली राजनेैतिक पार्टियां व सत्ता पर काबिज यू.पी.ए. सरकार नारी सशक्तिकरण का चाहे जितना भी हल्ला मचा लें खुद इन्हीं के सरकारी आंकड़े इनकी नीतियों की पोल खोल देते हैं।

    ह्यूमन डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार देश में कृषि क्षेत्र से बाहर मात्र 17 प्रतिशत रोजगार महिलाओं को मिला है। जिसमें 13.9 प्रतिशत शहरी एवं 29.9 प्रतिशत ग्रामीण क...

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राष्ट्रीय महिला आयोग एक दिखावटी संस्था है


राष्ट्रीय महिला आयोग में पंजीकृत शिकायतों का श्रेणी-वार ब्यौरा

(वित्तीय वर्षः 2009-2010)


क्र.सं.  शिकायतों की    वित्तीय वर्ष 

     श्रेणी/प्रकृति       2009-10


1.  तेजाब से हमला    04

2.  हत्या का प्रयास    08

3.  बलात्कार का प्रयास    249

4.  द्विविवाह/व्यभिचार    107

5.  बालकों की अभिरक्षा    02

6.  परित्याग  ...

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अनाथ आश्रमों में यौन हिंसा की शिकार मासूम लड़कियां


    हमारे देश में अनेकों अनाथ आश्रम चल रहे हैं यहां गरीब-बेसहारा बच्चों को शिक्षित-दीक्षित कर समाज की धारा में शामिल करवाने की बातें हमारी सरकारें जब तब करती रहती हैं। तमाम स्वयंसेवी संस्थायें इस प्रकार के अनाथ आश्रमों को विदेशी फंडों व सरकारी दान-खैरातों के सहारे चलाती रही हैं। ऊपरी तौर पर देखें तो लगेगा कि यह तो बहुत नेक काम है और सभी लोग ऐसी स्वयंसेवी संस्थाओं व सरकार को धन्...

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