लेबिल (कुल समाचार - 37): लेख

सिवरेज में बढ़ती मौतें जिम्मेवार कौन? - सुनील कुमार


    दिल्ली में 15 जुलाई, 2017 से लेकर 20 अगस्त, 2017 तक सिवरेज सफाई में चार घटनाएं (15 जुलाई, 6 अगस्त, 12 अगस्त और 20 अगस्त) हुईं, जिसमें कुल 10 लोगों की मृत्यु हो गई। ये घटनाएं दिल्ली के अन्दर घटीं, जहां पर 2013 में ही ‘प्रोहिबिशन आॅफ एम्प्लाॅयमेंट मैनुअल स्कैंवेंजर एंड देयर रिहेबिलिटेशन एक्ट’ पास किया गया है। भारत का उच्चतम न्यायालय 27 मार्च, 2014 को आदेश दे चुका है कि 2013 का यह कानून सभी राज्यों और केन...

Read full news...


सेन्चुरी पल्प पेपर मिल में ठेका श्रमिकों का धरना प्रदर्शन


लालकुंआ/ एशिया की सबसे बड़ी सेन्चुरी पल्प एण्ड पेपर मिल में आजकल ठेका मजदूर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संघर्षरत हैं। संघर्ष के रूप में वे 12 सितम्बर 17 से तहसील में धरने पर बैठे हैं। इनकी मांगें निम्न हैं-

1. न्यूनतम मजदूरी 350 रुपये/दिन की जाये। 

2. ओवर टाइम का भुगतान डबल किया जाये।

3. राष्ट्रीय त्यौहारों का अवकाश ठेका श्रमिकों को भी दिया जाए।

4. गार्जियन कोर्ट की भर्ति...

Read full news...


भोजन माताओं से रोजगार छीनने का षड्यंत्र


    सरकार ने इस साल ‘मिड-डे-मील’ (मध्याहन भोजन) बनाने की जिम्मेदारी अक्षय पात्र फाउंडेशन को सौंप दी है जिसके पीछे राज्य सरकार तर्क दे रही है कि अक्षय पात्र फाउंडेशन बच्चों को पौष्टिक व स्वादिष्ट भोजन उपलब्ध करायेगी। जबकि भोजनमाता जो अब तक स्कूलों में खाना बनाती थीं वह अब भी अपने स्थान पर कार्यरत रहेंगी व बच्चों को खाना परोसने का काम करेगी। 

    दरअसल ‘मिड-डे-मील&rsquo...

Read full news...


मोदी सरकार द्वारा सामाजिक नीति को झटके - जीन ड्रेज


    मोदी सरकार को अंततः अपनी दिग्भ्रमित आर्थिक नीतियों की वजह से कुछ आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। अपेक्षाकृत अनुकूल वातावरण (अच्छे मानसून और अंतर्राष्ट्रीय तेल कीमतों में गिरावट) के बावजूद तिमाही दर तिमाही आर्थिक विकास दर गिरती जा रही है। सबसे हालिया अनुमानों के अनुसार मैन्यूफैक्चरिंग की विकास दर तो शून्य के करीब पहुंच गयी है। रोजगार और मजदूरी से सम्बन्धित आंकड़े तो और ...

Read full news...


पूंजीवाद जनित बिहार बाढ़ की विभीषिकाएं


    बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और असम इस साल फिर से बाढ़ की चपेट में आ गये हैं। बाढ़ का सबसे बुरा असर उत्तर बिहार के जिलों में है। अररिया, सीतामढ़ी, पश्चिमी चंपारण, कटिहार, पूर्वी चम्पारण, मधुबनी, सुपौल, मधेपुरा सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। बिहार में अब तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 300 को पार कर चुकी है। सवा करोड़ से ज्यादा लोग बेघर हो चुके हैं। करोड़ों रुपये की सम्पत...

Read full news...


उन्हीं के ‘एक्शन’, उन्हीं का फायदा


भारत सरकार नीति आयोग का तीन वर्षीय एक्शन प्लान


    केन्द्रीय योजना आयोग को समाप्त करके, मोदी सरकार द्वारा उसकी जगह स्थापित नीति आयोग (नेशनल इन्स्टीट्यूशन फार ट्रांसफार्मिंग इंडिया) द्वारा तीन वर्षीय ‘एक्शन प्लान’ (वर्ष 2017-18, 2018-19, 2019-20) जारी किया गया है। चूंकि योजना आयोग की 12 वीं पंचवर्षीय योजना मार्च 2017 में समाप्त हो रही थी अतः अप्रैल 2017 से उक्त एक्शन प्लान लागू हो चुका माना जा सकता है।

    नीति आयोग को थिंक टैंक भी कहा ...

Read full news...


अपना स्वार्थ - सबसे ऊपर


    भारत के योजना आयोग को समाप्त करके उसकी जगह जनवरी 2015 में स्थापित नीति आयोग (मूलतः-अंग्रेजी में नेशनल इन्स्टीट्यूशन फार ट्रांस्फार्मिंग इंडिया) के प्रथम उपाध्यक्ष अरविन्द पनगड़िया ने यह कहते हुये अपने पद से स्तीफा दे दिया कि वे, अपनी पुरानी जगह कोलम्बिया यूनिवर्सिटी वापस जा रहे हैं।

    उन्होंने बड़ी साफगोई से बताया कि वे उक्त विदेशी यूनिवर्सिटी से 2 साल की छुट्टी लेक...

Read full news...


शिक्षा में झूठ, संस्थानों में टैंक से पैदा होगी ‘देशभक्ति’


    शिक्षा के भगवाकरण के लिये कुख्यात दीनानाथ बत्रा ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्र्रशिक्षण परिषद (एन सी ई आर टी) को सुझाव भेजा है। इन सुझावों में उन्होंने एक बार फिर संघी मूर्खतापूर्ण बातों की सलाह दी है। अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू के आम बोलचाल के शब्दों को हटाने की मांग की है। गालिब, टैगोर अवतार सिंह ‘पाश’ आदि की रचनाओं को हटाने की मांग की है। गुजरात दंगों, 1984 में कांगे्रस ...

Read full news...


पं.बंगाल साम्प्रदायिक हिंसा, संघ व मीडिया


    पिछले दिनों पं. बंगाल का उत्तरी 24 परगना जिले का भदुरिया ब्लाॅक व बशीरहाट साम्प्रदायिक हिंसा की चपेट में आ गये। हिंसा की शुरूआत एक 17 वर्षीय हिंदू युवक द्वारा फेसबुक पर मोहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट से हुई। इसके पश्चात कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा हिंदू बस्तियों पर हमला बोला गया और कई घरों में आग लगा दी गयी। एक व्यक्ति की इस हिंसा में मृत्यु हो गयी। 

    ...

Read full news...


पूंजीवादी व्यवस्था में महिलाओं का सम्मान


    भारतीय जनता पार्टी आज से तीन वर्ष पहले अपने चुनाव तैयारी में थी उस समय पूरे देश में मीडिया तंत्र व अखबारों में प्रकाशित हो रहा था कि अगर भारतीय जनता पार्टी चुनाव में जीत गयी तो महिलाओं की सुरक्षा तय होगी क्योंकि नरेन्द्र मोदी जो पहले गुजरात के मुख्यमंत्री रहे हैं तब वहां महिलाओं पर कोई अत्याचार नहीं हो रहा था। इसलिये देश के प्रधानमंत्री बनने पर पूरे देश में महिलाओं को देवी ...

Read full news...


बढ़ती आत्महत्याओं के साथ बढ़ता आक्रोश


किसानों की स्थिति


    देश में किसानों की स्थिति लगातार बुरी होती जा रही है। इसमें सबसे बुरी बात यह है कि किसान आत्महत्या जैसे खतरनाक कदम तक उठा रहा है। पिछले कुछ सालों में किसानों की आत्महत्या की घटनायें तेजी से बढ़ रही हैं। पर न तो केन्द्र सरकार और न ही राज्य सरकारों ने इस सम्बन्ध में गम्भीर प्रयास किये। 

    किसानों की बढ़ती आत्महत्याओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो ‘एक्सीडेंटल डेथ एवं सु...

Read full news...


सहारनपुर में मेहनतकश दलितों के प्रतिरोध को खामोश करने की योगी सरकार की करतूतें


    सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में 5 मई को दलितों पर कातिलाना हमला किया गया था। लेकिन उत्तर प्रदेश प्रशासन व शासन सवर्ण हिन्दू मानसिकता से ग्रसित होकर देखता रहा। खुद सरकार व मुख्यमंत्री का भी इस मामले पर यही रुख था। एक तरफ मुख्यमंत्री द्वारा रविदास मंदिर में मूर्ति तोड़ने पर शब्बीरपुर गांव गए ठाकुर युवक को जिसकी यहां दम घुटने पर मृत्यु हो गयी थी उसके परिवार को 10-15 लाख रुपये मुआवज...

Read full news...


सहारनपुर: पीड़ित दलितों को ही कुचलने को उतारू सरकार


    सहारनपुर में 5 मई को ठाकुर समुदाय के लोगों द्वारा दलितों पर बोला गया हमला अब धीरे-धीरे योगी सरकार द्वारा दलितों पर हमले में बदलता जा रहा है। योगी सरकार भीम आर्मी पर हमलावर हो चुकी है उसके संस्थापक नेता चंद्रशेखर को गिरफ्तार करने के चारों ओर सरकारी प्रयास हो रहे हैं।

    ठाकुर समुदाय के लोगों के हमले का जिस तरह से जवाब दलित समुदाय ने संगठित होकर दिया वो योगी सरकार को ब...

Read full news...


ब्राजील में राजनीतिक संकट गहराया


    ब्राजील एक बार फिर राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। 9 माह पहले पूर्व राष्ट्रपति डिल्मा रूसेफ को सत्ता से हटाये जाने के बाद सत्तानशीन हुए राष्ट्रपति मिशेल तेमर भ्रष्टाचार एवं बढ़ते आर्थिक संकट के कारण अपनी साख गंवाकर अपनी कुर्सी गंवाने के कगार पर हैं।     जहां ब्राजील का मजदूर वर्ग उनके द्वारा प्रस्तावित श्रम सुधारों एवं पेंशन व्यवस्था में जनविरोधी बदलावों के कारण ...

Read full news...


अलवर कांड


हिन्दुत्व की परियोजना का शिकार है पहलू खान की हत्या


    हरियाणा के दूध व्यापारी पहलू खान की कथित गौ रक्षकों ने सरेआम पीट-पीट कर हत्या कर दी। पहलू खान दुग्ध व्यवसायी थे जो जयपुर के पशु मेले से गायें खरीदकर ले जा रहे थे।

    पहलू ने गाय खरीदने की रसीद व दस्तावेज भी ‘गो रक्षकों’ को दिखाये। लेकिन कथित गौ रक्षकों को इससे क्या मतलब था। पहलू खान का मुसलमान होना और ट्रक में गायें ले जाते हुये पाये जाना ही उसकी हत्या करने के लिये ...

Read full news...


भारतीय सेना में औपनिवेशिक परम्परा


बैटमैन अथवा सहायक व्यवस्था


    भारतीय सेना में अधिकारियों द्वारा सहायकों के रूप में सेना के जवानों को अपने निजी व घरेलू कामों में इस्तेमाल करने की औपनिवेशिक परम्परा जारी है। यह परम्परा सेना के जवानों के लिए न केवल बेहद अपमानजनक है बल्कि इसके कारण सहायकों के रूप में अधिकारियों की सेवा में तैनात सैनिकों को गुलामों जैसी स्थिति में जीना पड़ता है। 

    हाल ही में सोशल मीडिया में कई जवानों ने अपने दु...

Read full news...


अजमेर ब्लास्ट के दोषियों को अखबारों ने आतंकवादी कहने से क्यों किया परहेज?


-एम रेयाज


    फर्ज कीजिए कि कट्टरपंथियों का एक समूह योजना बनाकर किसी पवित्र महीने में सदियों पुराने एक धर्मस्थल पर आतंकी हमला करता है। उसकी मंशा श्रद्धालुओं की हत्या करने की थी और लोगों के दिलो दिमाग में आतंक को बैठाना था जो बाद में साम्प्रदायिक उन्माद की शक्ल भी ले सकता था।

    कई साल तक चले मुकदमे के क्रम में 26 गवाह पलट जाते हैं, कुछ रसूखदार आरोपी बरी हो जाते हैं और अंत में तीन को ...

Read full news...


पांच राज्यों में चुनाव: फिर उजागर हुआ पूंजीवाद का विद्रूप चेहरा


    पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के मौके पर एक बार फिर पूंजीवादी व्यवस्था का विद्रूप दिखा। एक तरफ निर्वाचन आयोग आदर्श चुनाव संहिता का पालन करने के लिए अपने को तत्पर दिखाई देता है, चुनाव आयोग के उड़नदस्ते हर जगह मुस्तैद प्रचार सामग्री की जांच करने हेतु, छापामारी करते दिखाई देते हैं परन्तु मंच से तमाम राजनीतिक पार्टियों के नेता जनता को लुभाने हेतु एक से बढ़कर एक लोकरंजक नारे दे...

Read full news...


गौतम बुद्ध, महावीर और मोदी


    क्या इन तीनों में कोई समानता है? समानता के लिये मिथक गढ़ने और कुत्सा प्रचार में माहिर संघी प्रचार मशीनरी की शरण में जाना पड़ेगा।

    संघी प्रचार मशीनरी के अनुसार नरेन्द्र मोदी, गौतम बुद्ध और महावीर जैन के समकक्ष है। तीनों की पत्नियां का नाम यशोधरा था और तीनों ने देश के लिये अपनी पत्नी का त्याग किया।

    महात्मा बुद्ध और महावीर जैन के बारे में दो शब्द भी जानने व...

Read full news...


भांगड़ में हिटलर दीदी ने चलवाई गोली


    2006-07 में कोलकाता में जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ नंदीग्राम-सिंगूर की जनता ने जबरदस्त संघर्ष लड़ा, दमन झेला, गोलियां खायी, आखिरकार जबरन भूमि अधिग्रहण को वापस लेने पर माकपा सरकार को मजबूर किया। इस संघर्ष के बाद ‘मां, माटी, मानुष’ की बात करते हुये ममता बनर्जी की सरकार पश्चिम बंगाल में बनी, प.बंगाल में पूंजी के विकास के लिये ममता बनर्जी ने भी भूमि अधिग्रहण करना जारी रखा। इसका निश...

Read full news...


सर्वहारा


    अक्टूबर क्रांति से पहले रूसी सर्वहारा की स्थिति बहुत ही दयनीय थी। वह गांव से अभी कटा नहीं था। प्रायः वह आधा किसान था जो कि सर्दी शहर में बिताता था और गर्मियों में अपने खेत पर लौट जाता था। उसे अपने गांव की याद सताती थी और शहर उसे पसंद नहीं था। वह शहर में रहता था लेकिन शहर का नहीं था। उसकी राय कोई नहीं मानता। उसकी आवश्यकता पर कोई ध्यान नहीं देता। वह झुग्गियों का बाशिंदा था और सभ्य...

Read full news...


11 वर्ष के बाद मिली आतंकी के ठप्पे से मुक्ति


    दिल्ली/ 22 दिसम्बर को इरशाद अली और मौरिफ कमर को आखिरकार 11 वर्षों बाद आतंकी के ठप्पे से मुक्ति मिली। दिल्ली की एक निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा इन्हें 11 वर्ष बाद आतंकवाद के आरोपों से मुक्त किया गया।

    गौरतलब है कि इस मामले में सी.बी.आई. ने अपनी जांच में इरशाद अली और मौरिफ कमर पर लगे आरोपों को फर्जी करार दिया और इस बात का खुलासा किया कि इरशाद अली और मौरिफ कमर दिल्ली पुल...

Read full news...


सतलज-यमुना लिंक नहर विवाद


    10 दिसम्बर को सतलज-यमुना लिंक नहर मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया। वैसे तो इस मामले में विवाद हरियाणा और पंजाब सरकारों के बीच था। लेकिन, फैसले ने पंजाब के भीतर की चुनावी राजनीति को गरमा दिया है। पंजाब में कुछ माह बाद विधानसभा के चुनाव होने हैं। इस फैसले के बाद से कांग्रेस, भाजपा-शिअद और आप के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया। पंजाब कांग्रेस के सभी विधायकों ने इस...

Read full news...


हिन्दुत्व ब्रिगेड के रथ की चूलें हिलाता दलित आंदोलन


    ऊना की घटना से उपजे दलित आक्रोश से आजकल संघी लॉबी हैरान परेशान है। घटना भले ही गुजरात में हुई हो पर संघी शाखाओं में देश भर में दलितों की उपस्थिति कम हो गयी है। गौरक्षकों के खिलाफ मोदी-भागवत का बयान भी दलितों के गुस्से को कम करने मे खास कारगर नहीं रहा। पांच राज्यों के चुनावों में दलितों का आक्रोश संघ-भाजपा के मंसूबों पर पानी फेरता नजर आ रहा है। 

    गुजरात के दलितों ने...

Read full news...


हरियाणा विधान सभा में जैन मुनि


    कहने को तो हमारा देश धर्मनिरपेक्ष देश है पर इस देश में आजादी के बाद से धर्म के नाम पर एक से बढ़कर एक ऐसे कारनामे होते आये हैं कि धार्मिक देश भी शर्मा जायें। सरकारी आयोजनों में सरस्वती पूजन, नारियल फोड़ने से लेकर मंत्रों का जाप तो पहले से होता आ रहा है। अब हरियाणा की भाजपा की खट्टर सरकार ने एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिसने धर्मनिरपेक्षता की धज्जियां उड़ा दी हैं।

    हरिया...

Read full news...


निर्दोष आदिवासियों की हत्यायें


    उड़ीसा के कंदमाल जिले में 8 जुलाई की शाम को सुरक्षा बलों द्वारा पांच आदिवासियों की हत्या कर दी गयी जिसमें एक डेढ़ साल का बच्चा भी था। उड़ीसा पुलिस का कहना है कि ये पांचों ग्रामीण माओवादियों और पुलिस मुठभेड़ के दौरान मारे गये हैं। 

    वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। गुमदुमहा गांव से आदिवासी मनेरगा मजदूर अपनी मजदूरी लेने के लिए बालीगुडा गये थे। मजदूरी लेकर   आॅटो रिक्...

Read full news...


क्या बुश-ब्लेयर को फांसी पर लटकाया जायेगा?


चिलकोट जांच रिपोर्ट


    अमेरिका-इंग्लैण्ड-आस्ट्रेलिया द्वारा 2003 में इराक पर किया गया हमला पूरी तरह झूठ पर आधारित था। हाल ही में यूनाइटेड किंगडम में चिलकोट जांच रिपोर्ट में यह बात घोषित की गयी कि 2003 में सद्दाम हुसैन शासित इराक पर हमले के लिए जो कारण गिनाये गये थे वे सब आधारहीन थे। न तो तब सद्दाम हुसैन ऐसा कोई खतरा बन चुके थे कि उन पर तत्काल हमला बोला जाना जरूरी होता और न ही उनके पास जनसंहार के हथियार थे...

Read full news...


किसानों द्वारा आत्महत्याओं का दौर जारी है


    सरकार चाहे जो भी कहे, अपनी दो साल की राजनीतिक अवधि का कितना ही बखान क्यों न कर ले, लेकिन देश की जो जमीनी सच्चाई है वह कुछ और ही है। सरकार कह रही है कि पिछले दो सालों में देश बहुत आगे बढ़ गया है, देश ने काफी तरक्की कर ली है। यदि देश ने तरक्की की है और अगर तरक्की वास्तव में देश की आम जनता ने की है, तो देश का किसान आत्महत्या करने को क्यों मजबूर है?       

   पिछले पांच सालोें से...

Read full news...


अब शिक्षकों पर मोदी सरकार का हमला


    यू.जी.सी. ने 4 मई को शिक्षकों के वर्कलोड व प्रमोशन से संबंधित अपने 2010 के रेगुलेशन में कई संशोधन करते हुए एक अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना के बाद से ही तमाम विश्वविद्यालयों के शिक्षक यू.जी.सी. द्वारा किये गये इन संशोधनों के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय टीचर्स एसोसियेशन ने संघर्ष की डीयू की डवोल्यूशन प्रक्रिया का बहिष्कार कर दिया है। जामिया, जे.एन.यू.व देश भर के त...

Read full news...


जेएनयू प्रशासन ने सजा के जरिये छात्रों को फिर ललकारा


    जेएनयू में 9 फरवरी को अफजल गुरू पर कार्यक्रम आयोजित करने पर हुए विवाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंततः वही रुख अपनाया जो संघी सरकार आने के बाद लोकतंत्र की संस्थाएं अपनाती आ रही हैं। वि.वि. ने छात्र नेताओं पर 10 हजार, 20 हजार के जुर्माने से लेकर, हाॅस्टल निष्कासन, एक-दो सेमेस्टर से लेकर 5 वर्ष के लिए निलम्बन तक के फैसले दिए हैं। यह फैसला विश्वविद्यायल प्रशासन के संघी सरकार के फास...

Read full news...


कश्मीर फिर गरमाया


    कश्मीर घाटी एक बार फिर से खबरों में है हंदवाड़ा व कुपवाड़ा में हजारों की तादाद में कश्मीरी जनता भारतीय सेना व कश्मीरी पुलिस बलों के खिलाफ सड़कों पर उतरी। सैन्य बलों की गोलीबारी में 5 कश्मीरी मारे गये। पर एन.आई.टी. के गैर कश्मीरी छात्रों पर लाठीचार्ज पर घोर संवेदना दिखाने वाले केन्द्र सरकार के मंत्री व नेतागण इस बार बदले हुए थे। अबकी बार उनकी संवेदना मारे गये कश्मीरियों के प्...

Read full news...


होंडा रचोगे तो बंगलुरु भी देखोगे


    बंगलुरु की गारमेण्ट उद्योग की महिलायें इतिहास रच चुकी हैं। उनकी दो दिन की स्वतः स्फूर्त हड़ताल ने केन्द्र को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। 10 फरवरी का पी.एफ. संदर्भी नोटिफिकेशन सरकार को वापस लेना पड़ गया।

    18 अप्रैल की सुबह जब गारमेण्ट फैक्टरी की महिलायें काम पर पहुंची तो उन्हें भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि वे अगले दो दिनों में भारत ही नहीं दुनिया भर में चर्चा का...

Read full news...


न्याय व्यवस्था और महिलाएं


    वैसे तो भारतीय संविधान औपचारिक तौर पर स्त्री-पुरुष बराबरी की बात करता है पर समाज में हावी पितृसत्तात्मक मूल्य महिलाओं के लिए हमेशा उत्पीड़नकारी साबित होते रहे हैं। खुद न्यायपालिका भी इन पितृसत्तात्मक मूल्यों से अछूती नहीं है। न्यायधीशों के तमाम वक्तव्यों-कथनों में इस बात को देखा जा सकता है। न्यायपालिका के जज ही जब इस तरह की सोच से ग्रस्त हों तो फिर समाज से इन महिला विरोध...

Read full news...


रबड़ टायर से तार खींचने वाले फ्लैक्सी कामगारों की दास्तान


    दिल्ली में स्थित औद्योगिक केन्द्रों के पास बड़ी संख्या में मजदूर बस्तियां हैं जिनमें हजारों-लाखों की संख्या में लोग अमानवीय परिस्थितियों में रहते हैं। इन बस्तियों में सफाई, पानी, शौचालयों तक की समुचित व्यवस्था नहीं है। लोगों को पीने का पानी दूर-दूर से ढो कर लाना पड़ता है। शकूरपुर, शाहबाद डेयरी, वजीरपुर व बादली रेलवे स्टेशन के पास बनी झुग्गी बस्तियां ऐसे ही औद्योगिक केन्द...

Read full news...


ठंड से मौतें, जिम्मेदार कौन?


    विकास की रंगीन, चमचमाती बातों-वादों के विपरीत काला सच यह है कि देश में प्रति वर्ष औसतन 781 लोग ठंड से मर जाते हैं। 2001 से 2014 तक पिछले 14 वर्षों में 10,933 लोग ठंड लगने से मारे गये। (देखें तालिका -1) ठंड से मरते यह लोग कौन हैं? यह लोग हैं देश के गरीब अवाम, जिन्हें न तो पर्याप्त पोषण मिलता है, न गरम कपड़े और न ही सिर छिपाने के लिए कोई कमरा।

    काम की तलाश में शहर में खाक छानता व्यक्ति बेघर ...

Read full news...


निर्भया प्रकरण: गैर जरूरी है उम्र का विवाद


    16 दिसम्बर, 2012 की रात दिल्ली में हुए वीभत्स सामूहिक बलात्कार के नाबालिग दोषी को बाल सुधार गृह से मुक्त कर दिया गया है। घटना के वक्त उपलब्ध कानूनों के अनुसार नाबालिग दोषी को बलात्कार में शामिल अन्य अपराधियों की तरह फांसी या कोई अन्य कठोर सजा नहीं दी गयी। बल्कि नाबालिग दोषी को बाल अपराधियों के लिए बने बाल सुधार गृह में रखा गया। 

    अब जब लगभग तीन साल बाल सुधार गृह में र...

Read full news...


पूंजीपतियों को करोड़ों की कर्ज माफी


    सरकार द्वारा पूंजीपतियों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तरीके से कई तरह से सहायता दी जाती रही है। इसी तरह की एक सहायता नाॅन परफार्मिंग असेट्स(एनपीए) के द्वारा दी जाती रही है। एन.पी.ए. उन कर्जों या लोनों को कहा जाता है जिन्हें लेने वाला समूह/संस्था या व्यक्ति चुका नहीं पाता और एक समय के बाद उन्हें न प्राप्त होने वाले कर्जों में डाल दिया जाता है। 

    रिजर्व बैंक की तरफ से का...

Read full news...


घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर क्लिक करें।

अन्य महत्वपूर्ण लिंक्स


हमें जॉइन करे अन्य कम्यूनिटि साइट्स में

घोषणा

‘नागरिक’ में आप कैसे सहयोग कर सकते हैं?
-समाचार, लेख, फीचर, व्यंग्य, कविता आदि भेज कर
-फैक्टरी में घटने वाली घटनाओं की रिपोर्ट भेज कर
-मजदूरों व अन्य नागरिकों के कार्य व जीवन परिस्थितियों पर फीचर भेजकर
-अपने अनुभवों से सम्बंधित पत्र भेज कर
-विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, बेबसाइट आदि से महत्वपूर्ण सामग्री भेज कर
-नागरिक में छपे लेखों पर प्रतिक्रिया व बेबाक आलोचना कर
-वार्षिक ग्राहक बनकर

पत्र व सभी सामग्री भेजने के लिए
सम्पादक
'नागरिक'
पोस्ट बाक्स न.-6
ई-मेल- nagriknews@gmail.com
बेबसाइट- www.enagrik.com
वितरण संबंधी जानकारी के लिए
मोबाइल न.-7500714375