मैं भागने से इंकार करता हूं -अहमद मज्द

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पिछले साल 7 अक्टूबर की सुबह को मैं और मेरी पत्नी हनीन ने फज्र की नमाज पढ़ी और नाश्ता किया। हम दोनों शिक्षक हैं और काम पर जाने से पहले अपने बच्चे मज्द को उसकी दादी के पास छोड़ने के लिए तैयार कर रहे थे। तब हमने गाजा से इजरायल पर छोड़े गये राकेटों और मिसाइलों की आवाजें सुनीं। 
    
मैंने अपने आप से कहा कि यह सामान्य नहीं है और निश्चय ही कुछ बड़ा होने वाला है। तब भी मैंने अपनी पत्नी को आश्वस्त किया कि सब कुछ ठीक है, कि राकेटों का अर्थ सिर्फ इतना है कि हमास या किसी इस्लामिक जिहादी नेता की हत्या हुई है और इससे कोई व्यापक तनाव नहीं होगा। 
    
मैंने फिर इंटरनेट खंगाला और पाया कि यह उन सबसे अलग है जो अब तक हमने अनुभव किया था। 
    
तब तक स्थानीय मीडिया ने भी यह बताना शुरू कर दिया था कि हमास ने इजरायल पर एक बड़ा और घातक हमला किया है। हनीन और मैं आने वाले बदले के लिए अपने को तैयार कर रहे थे। 

पहली बार घर छोड़ना
    
हमने अपना अपार्टमेंट छोड़ दिया और उसी वक्त बेईत लाहिया शहर के अपने पैतृक घर पहुंच गये। हमने सोचा कि इस कठिन घड़ी में अपने प्रिय स्वजनों जिसमें मेरी मां, बहन, दो भाई और दो भतीजे शामिल हैं, के साथ रहना बेहतर और सुरक्षित है। 
    
इजरायली सेना के ड्रोन के द्वारा ऊपर से बिखेरे जा रहे पर्चे धमकियों और दक्षिणी गाजा को चले जाने के आदेशों से भरे हुए थे। हमने और कुछ अन्य परिवारों ने इन्हें अनदेखा किया। हम दृढ़ प्रतिज्ञ थे कि अपना घर और अपनी जमीन नहीं छोड़ेंगे। 
    
हमने एक दूसरे नकबा से गुजरने और 1948 में हमारे पूर्वजों के साथ जो हुआ उसका अनुभव करने से इंकार कर दिया। 
    
दिन-ब-दिन स्थिति बदतर होती जा रही थी। इजरायली कब्जाकारी ताकतों ने पूरे गाजा में विस्तृत और भयंकर हवाई हमले शुरू कर दिये थे। उन्होंने घरों, मस्जिदों, सरकारी इमारतों, खेतों और पूरे रिहायशी कालोनियों पर हमले किये। 
    
मेरा दिल इस दर्द को सहन नहीं कर पा रहा था और मेरा दिमाग इस पागलपन भरी नफरत पर यकीन नहीं कर पा रहा था। नागरिकों पर होने वाले हवाई हमलों के आतंकित करने वाले धमाकों को सुनना रोजमर्रा की बात हो गयी। 

सबसे कठिन फैसला- मेरी पत्नी का परिवार तल अल हवा के अपने घर को छोड़कर खान यूनुस में अपने रिश्तेदार के घर चला गया। मेरी पत्नी उनके साथ वहां जाना चाहती थी। 
    
एक साल से अधिक समय से मेरा अपनी पत्नी और बच्चे से दूर और अलग रहना एक सिहराने वाला किस्सा है कि कैसे इजरायल पूरे गाजा के साथ बदला ले रहा है। 
    
मैं दृढ़ संकल्प था कि मैं इनके बदले की योजना का हिस्सा नहीं बनूंगा। मैं नहीं चाहता था कि इजरायली सेना मुझे बलपूर्वक विस्थापित करे। 

कार्यवाही की एक योजना

मैंने 14 अक्टूबर की सुबह एक टैक्सी ली और हनीन तथा मज्द के साथ खान यूनुस पहुंचा जहां उनका परिवार ठहरा हुआ था। मैंने रात वहां बितायी और सुबह यह कह कर उनसे अलग हुआ कि मैं बाजार कुछ कपड़े लेने के लिए जा रहा हूं। 
    
इसने मुझे बाद में बताया कि उसे लग रहा था कि लंबे समय तक हम मिल नहीं सकेंगे।
    
मैं अपनी पत्नी और अपने बच्चे को गले भी नहीं लगा सका क्योंकि मैं अपनी योजना का खुलासा नहीं चाहता था। मुझे डर था कि मेरे ससुराल वाले मेरा मन बदलने की कोशिश करेंगे। मैंने खान यूनुस के घर को बहुत दुखी मन से छोड़ा। 
    
बाजार जाने के बजाय मैं उत्तर के अपने पैतृक घर लौट आया। 27 अक्टूबर को इजरायली सेना ने तोपों की भारी गोलीबारी और हवाई हमलों की छत्रछाया में जमीनी हमले शुरू किये। 
    
विस्फोटों की आवाजें और तीखी हो गयीं क्योंकि अब हमारे पड़ोसियों के घरों पर बम गिर रहे थे। 
    
जब इजरायली सेना हमारे घर के नजदीक पहुंची जहां मैं अपनी मां और बहन समेत सात पारिवारिक सदस्यों के साथ रह रहा था, मैं तोपों के नजदीक आने की आवाजें साफ सुन रहा था। 
    
दहशत और मौत को साफ सामने देखने के बावजूद मैंने खान यूनुस वाले घर पर जाने से मना कर दिया। 
    
27 अक्टूबर की दोपहर को एक बड़ा विस्फोट हुआ। यह भूकंप की तरह लगा। घर की सारी खिड़कियां चूर हो गयीं। मैं अपने सामने भारी धुंए और धूल की वजह से एक इंच भी नहीं देख पा रहा था। 
    
कुछ क्षणों बाद मैंने पड़ोसियों की मदद के लिए चीखें सुनीं। इस हमले में इजरायल ने 26 लोगों को मार दिया था। ज्यादातर लोग मलबे में दब गये थे।         
    
मैंने सोचा कि इजरायल के इस भयानक हमले का मकसद हमारे दिल में डर और दहशत पैदा करना और चेतावनी देना है कि अगर हम रुके रहेंगे तो और हमले होंगे। 
    
इसलिए, मेरा परिवार और मैं जबालिया के पश्चिम में अपने नाना के घर चले गये। 
    
3 दिसम्बर, 2023 को पास में ही इजरायल ने 50 लोगों का नरसंहार किया। इसने हमें फिर से घर छोड़ने को बाध्य किया। 
    
लेकिन इस बार हमें यह नहीं पता था कि हम कहां जाएं। नजदीक का निकासी केन्द्र? एक स्कूल? एक टेंट?
    
मैंने चाहा कि जमीन मुझे निगल जाए। मैंने अपने एक पुराने दोस्त को जो गाजा सिटी के पश्चिम में रहता था, आश्रय ढूंढने में मदद करने को कहा। उसने बताया कि उसको एक जगह के बारे में पता है। मैं यह सुन कर खुशी से झूम उठा। हमारा समूह जो कि अब 32 लोगों का हो गया था, अल शिफा अस्पताल के निकट की एक इमारत में जो कि अब एक आश्रय स्थल के रूप में काम कर रहा था, यहां पहुंचा। 
    
कुछ समय बाद, 19 दिसम्बर को, इजरायली सेना ने उत्तर में अपनी कार्यवाहियां समाप्त की और वहां से लौट गये। अगले दिन हमने उत्तरी गाजा में लौटने का फैसला लिया। 

राख में तब्दील

एक अन्य भली मित्र अऊदा, जिसके नाम का अर्थ ‘‘वापसी’’ है, ने जबालिया में अपने घर पर हमारा स्वागत किया। हम 2005 से मित्र हैं। हम अकसर साथ में खरीददारी करने जाते थे और बेइत लाहिया और जबालिया में एक दूसरे से मिलने जाते थे। हम अपनी जिंदगी, अपने प्यार और अपने सपनों के बारे में घंटों बात किया करते थे। 
    
3 जनवरी को अऊदा पानी लेने के लिए पहले की तुलना में जल्दी चली गयी। मैं विस्फोट की आवाजों के ज्यादा से ज्यादा करीब आते जाने की वजह से जगा। मैं पड़ोसियों के साथ चीखों की तरफ तेजी से भागा और यह देखकर अचंभित रह गया कि इजरायली सेना ने पीने के पानी के लिए लाइन में लगे लोगों पर बमबारी की। 
    
अऊदा चिथड़े हो चुके शरीर के हिस्सों में तब्दील हो चुकी थी। यह मेरे लिए जीवन भर का सदमा था। मैं सोचने लगा कि अपने घर लौटने के फिलिस्तीनियों के सपनों को इजरायल चकनाचूर करने पर आमादा है। 

घेरेबंदी और भुखमरी

जब हमलों के द्वारा इजरायल को सबको भगा देने का इच्छित नतीजा नहीं हासिल हुआ तो इजरायली सेना ने घेराबंदी और भूखा मारने का रास्ता चुना। 
    
हमें लगभग सभी चीजों की किल्लत होने लगीः फल, सब्जी, मांस और बच्चों के दूध का पाउडर। जिस चीज की हमें सबसे ज्यादा तलाश रहती थी वह आटा था। इसका अभाव सब की चिंता का कारण बन गया। 
    
अगर रोटी होती तो हम भूख से नहीं मरते। अफसोस, आटा बिलकुल नहीं था। 
    
जिंदा रहने के लिए हम में से कईयों ने पशुओं का चारा खाया। जनवरी और फरवरी के महीने कठिन थे। इंटरनेट कनेक्शन नहीं रहने की वजह से मैं कभी कभार ही अपनी पत्नी और बच्चे से संपर्क कर पाता था। मार्च में रमजान शुरू हुआ और खुशी मनाने के बजाय हम भूखे और असहाय थे। 
    
मार्च के अंत में इजरायली सेना उत्तर से हट गयी और मैं अपनी पुरानी बस्ती में लौट पाया। इजरायल ने मेरे अपार्टमेंट को राख के ढ़ेर में तब्दील कर दिया था। हमारा बेडरूम, किचन, लाइब्रेरी और अन्य सामान सभी नष्ट हो गए थे। 
    
मेरे भाइयों और मैंने अपने पैतृक घर को ठीक करने के लिए सब कुछ किया। हम कुछ समय वहां रहे। नए इजरायली हमलों ने हमें फिर से घर छोड़ने को मजबूर किया।

एक बार फिर विस्थापित

अब मैं गाजा के पश्चिम में अपने चचेरे भाई के घर में विस्थापित हूं। मुझे नहीं पता कि आगे क्या होने वाला है। मुझे नहीं पता कि मेरी क्या नियति है। 
    
क्या वे हमें गाजा सिटी से हटा कर दक्षिण में खान यूनुस और डेर अल बलाह के दो संकड़े निकासी शिविरों में विस्थापित करेंगे? 
    
मैं दक्षिण की तरफ भगाए जाने की किसी कोशिश को नहीं मानना जारी रखूंगा। मैं इस नरसंहारक युद्ध का अंत चाहता हूं और अपनी पत्नी और बच्चे और सभी लोगों, जिनको अपना घर छोड़ने को बाध्य किया गया है, की वापसी चाहता हूं। 
    
मुझे डर है कि मेरी पत्नी और मेरा बच्चा मेरे पास नहीं आएंगे। मज्द मेरा एकमात्र बच्चा 9 माह का था जब 15 अक्टूबर 2023 को उसे मैंने देखा था। 
    
मज्द ने मेरी आंखों से दूर अपना पहला कदम चला है, मेरे कानों से दूर अपने पहले शब्द बोले हैं। ये बेशकीमती क्षण जो मैंने खोए हैं, मुझे वापस नहीं मिल सकते। 
    
मैं और मेरी पत्नी एक ही क्षेत्र में हैं, लेकिन हम एक दूसरे तक नहीं पहुंच सकते हैं। इजरायल ने गाजा को उत्तर और दक्षिण में बांट दिया है और हम में से कोई एक तरफ से दूसरी तरफ नहीं जा सकता। 
    
मेरी प्रियतमा हनीन एक शानदार अंग्रेजी की शिक्षिका, प्रतिभाशाली लेखिका और आलोचनात्मक चिंतक है। मुझे वो रातें याद हैं जब हम साथ में फिल्में देखते थे और उनका आलोचनात्मक विश्लेषण करते थे। हम अपने अध्यापन कार्य की साथ में तैयारी करते थे, अपनी सोच और अनुभवों को साझा करते हुए। 
    
मैं अपनी पत्नी और अपने बेटे से अलग किए जाने की बड़ी कीमत चुका रहा हूं। मेरा शरीर उत्तर में है जबकि मेरी आत्मा दक्षिण में है। 
(electronic intifada.com से साभार अनुदित)

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