अंकिता को मिला नहीं न्याय, दुष्यंत को मिला राज्यपाल का पद

Published
Fri, 10/16/2026 - 07:50
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अंकिता भण्डारी को न्याय दिलाने के लिए अंकिता के माता-पिता को 14 अक्टूबर को इंडिया गेट पर धरने पर बैठना पड़ा। उनके धरने पर बैठते ही पत्रकारों, यू-ट्यूबरों सहित मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के नेताओं का जमावड़ा लग गया। पत्रकारों से वार्ता के दौरान अंकिता की मां निरन्तर रोये जा रही थी। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के इस धरने में शामिल होने के बाद पुलिस प्रशासन हरकत में आया। उसने अपना क्रूर चेहरा दिखाया और 15 अक्टूबर की सुबह चार बजे अंकिता के मां-बाप व अन्यों को हिरासत में ले लिया गया। 
    
अंकिता के मां-बाप को इण्डिया गेट पर धरना देने का यह कदम तब उठाना पड़ा जब मोदी सरकार ने उनके जख्मों पर नमक छिड़क दिया था। मोदी सरकार ने जिन नये राज्यपालों की घोषणा की उनमें एक नाम उस व्यक्ति का भी था जिसको उस ‘वी आई पी’ के तौर पर जाना गया है जिसे ‘स्पेशल सर्विस’ देने का अंकिता भण्डारी पर दबाव था। मोदी सरकार ने भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव व उत्तराखण्ड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का नया राज्यपाल बना दिया। उत्तराखण्ड में जब ‘वी आई पी’ के तौर पर गौतम का नाम आया था और विरोध हुआ तब भाजपा ने गौतम को उनके सभी पदों से हटा दिया था। इसका मतलब साफ था कि वह वी आई पी दुष्यंत कुमार गौतम ही था। अब कुछ माह बाद उन्हें एक संवैधानिक पद पर बिठा दिया गया। इस पद पर बिठाने का मतलब है कि उन्हें कानूनी संरक्षण प्राप्त हो जायेगा। कोई जांच उनकेे खिलाफ पद पर रहते न हो सकेगी। 
    
उत्तराखण्ड की धामी सरकार, अंकिता की निर्मम हत्या के बाद से ही अपनी पार्टी के नेताओं को बचाने के लिए किसी भी हद तक गयी है। पहले सारे महत्वपूर्ण सबूत नष्ट किये गये और फिर भारी जन दबाव के बाद कुछ छोटी मछलियों को पकड़ा गया। पहले दिन से ही उस ‘वी आई पी’ को बचाया गया जिसको ‘स्पेशल सर्विस’ न देने के कारण अंकिता की निर्मम हत्या कर दी गयी। 
    
वह ‘वी आई पी’ कौन था जब इसके खुलासे के लिए व्यापक जन आक्रोश फूट पड़ा तब सी बी आई जांच के लिए मन मारकर धामी सरकार तैयार हुयी। सी बी आई जांच का कुछ अता-पता नहीं है। ‘नौ दिन चले अढ़ाई कोस’ वाली गति से भी जांच नहीं हो रही है। ऐसे में अंकिता के मां-बाप को तब गहरा धक्का लगा जब उन्हें पता लगा कि जो मुख्य आरोपी है वह सिक्किम का राज्यपाल बना दिया गया है। 
    
कहां तो दुष्यंत कुमार को सलाखों के पीछे होना चाहिए कहां उसके पूरे ऐशो आराम का बंदोबस्त कर सिक्किम का राज्यपाल बना दिया गया। वाह! मोदी जी वाह!
    
अंकिता को न्याय मिले या न मिले पर दुष्यंत गौतम को राज्यपाल का पद अवश्य मिल गया। यही भाजपा, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, मोदी आदि का असली चाल, चरित्र व चेहरा है। 

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