उत्तराखंड में पेपर लीक कांड

हल्द्वानी में भी डटे छात्र; रामनगर में छात्रों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन

उत्तराखंड में पेपर लीक कांड के विरोध में छात्र सड़कों पर हैं। राजधानी देहरादून से लेकर पौड़ी और कुमाऊं के प्रवेश द्वार हल्द्वानी से लेकर पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा तक छात्रों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। छात्रों की मांग है कि पेपर लीक कांड की सी बी आई जांच कराई जाये और उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की यह स्नातक स्तरीय परीक्षा रद्द कर दोबारा कराई जाये।

हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में डटे छात्रों को परिवर्तनकामी छात्र संगठन और प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा अपना पूर्ण समर्थन दिया गया। पछास के महासचिव महेश ने आंदोलन में बढ़कर भागीदारी की घोषणा के साथ अपने सम्बोधन में कहा कि - "पेपर लीक के मामले लगातार जारी हैं। 2022 में हुए पीएससी और UKSSSC पेपर लीक के बाद बने नकल विरोधी कानून से कोई फर्क नहीं पड़ा। अपराधियों और सरकार का गठजोड़ जैसा कायम हो गया है। ऐसे गठजोड़ के बिना पेपर लीक संभव नहीं हैं। सरकार नौकरी देने की मंशा ही नहीं रखती है। सरकार लगातार विभिन्न विभागों को खत्म करने पर उतारू है। निजी, संविदा, ठेका के तौर पर अस्थाई नियुक्ति या पकोड़ा रोजगार के लिए नौजवानों को छोड़ दिया गया है। छात्रों के जुझारू आंदोलन ने दिखा दिया है कि यहां का युवा अपने अधिकारों के लिए सजग है और संघर्ष के दम पर उसे हासिल करेगा।"

रामनगर में आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में विभिन्न सामाजिक, राजनीतिक और छात्र संगठनों ने लखनपुर चुंगी पर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड में पेपर लीक की घटनायें बार-बार हो रही हैं क्योंकि नकल माफिया और धामी सरकार के बीच गठजोड़ है। नौकरियां बेची जा रही हैं और आम घर-परिवार के बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

वक्ताओं ने कहा कि आज उत्तराखंड सहित पूरे देश में भारी बेरोजगारी है। उदारीकरण-निजीकरण की नीतियों के तहत सरकारी नौकरियां बेहद सीमित और उसमें भी ज्यादातर संविदा के तहत हो चुकी हैं। निजी क्षेत्र में भी ज्यादातर रोजगार ठेके के तहत अस्थायी और बेहद कम वेतन वाला है। उत्तराखंड में सिडकुल के तहत लगी कंपनियों में तो नौजवानों को न्यूनतम वेतन से भी कम पर खटाया जा रहा है। ऐसे में सुरक्षित भविष्य वाली चुनिंदा स्थायी सरकारी नौकरियों के लिये कड़ी प्रतियोगिता है और छात्र-युवा उन्हें हासिल करने के लिये कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन नकल माफिया और सरकार का गठजोड़ बार-बार पेपर लीक कराकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है। आज यह गठजोड़ नौकरियों को बेचकर मोटी कमाई कर रहा है। ऐसे में छात्रों का आक्रोशित होना एकदम जायज है।

वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने हर साल दो करोड़ रोजगार देने का वायदा किया था जो कि एक जुमला साबित हो चुका है। इस सरकार ने तो सेना की सुरक्षित स्थायी नौकरी को भी नौजवानों से छीनते हुये वहां भी अग्निपथ-अग्निवीर के नाम पर ठेका प्रथा की शुरुआत कर दी है। धामी सरकार भी मोदी सरकार के नक़्शेकदम पर चल रही है। आज उत्तराखंड में पूंजीपतियों और माफियाओं का बोलबाला है।

वक्ताओं ने श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के हालातों से देश की तुलना करते हुये सत्ताधारियों को सावधान किया। वक्ताओं ने मुख्यमंत्री धामी द्वारा 'नकल जेहाद' जैसे असंवैधानिक शब्दों के प्रयोग पर उनकी सख्त आलोचना करते हुये इस पेपर लीक कांड की तत्काल सी बी आई जांच कराने की मांग की।

राज्य आंदोलनकारी प्रभात ध्यानी के संचालन में हुई सभा और धरना-प्रदर्शन में आइसा, इंकलाबी मज़दूर केंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी, किसान संघर्ष समिति, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, महिला एकता मंच, प्रगतिशील भोजन माता संगठन एवं परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं के अलावा महाविद्यालय की छात्राओं, पूर्व छात्र नेताओं एवं राज्य आंदोलनकारियों ने भी भागीदारी की।

आलेख

/amerika-dwaara-iran-par-naya-hamala-isake-doorgami-result

अमरीकी साम्राज्यवादी वर्चस्व को बढ़ाने में पश्चिम एशिया में दृढ़ स्तम्भ इजरायल रहा है। 1979 से पहले ईरान का शासक शाह रजा पहलवी  भी इस क्षेत्र में अमरीका का लठैत रहा है। 1979 में रजा पहलवी का तख्ता उलटने के बाद जो इस्लामी सत्ता आयी, वह लगातार अमरीकी साम्राज्यवाद की वर्चस्ववादी नीतियों का विरोध करती रही थी। यह सत्ता इजरायल द्वारा फिलिस्तीनियों को उजाड़े जाने और उनकी जमीनों पर यहूदी बस्तियां बसाने का विरोध करती रही है।

/amerika-aur-china-thyuusidaidsa-phaans

शी जिनपिंग के नेतृत्व में चीनी शासक भी दुनिया को यह जताने में लगे हुए हैं कि उनका अमेरिका से टकराने का कोई इरादा नहीं है। वे सबके साथ साझेदारी की बात कर सकते हैं। यानी अमेरिका व चीन साथ-साथ सारी दुनिया में छा सकते हैं।

/cocaroach-janta-party-hindu-fascist-v-sahi-raah

जेनरेशन जेड की युवा पीढ़ी को संघी ताकतें समझा रही हैं कि वे काॅकरोच जनता पार्टी के बहकावे में न आयें। वे मोदी के साथ खड़े रहें। वहीं काॅकरोच जनता पार्टी युवाओं के आक्रोश-दर्द को मुद्दा बना उन्हें बुराई मुक्त पूंजीवाद का ख्वाब परोस रही हैं। ऐसे में युवाओं को सही रास्ता तलाशना होगा। सही रास्ता इन दोनों रास्तों से अलग शहीदे आजम भगत सिंह का रास्ता है

/hindu-fascist-chunav-aayog-and-vidhansabha-chunaav

हिंदू फासीवादियों के लिए बिहार एस आई आर की पहली प्रयोगशाला थी। पश्चिम बंगाल  निशाने पर लंबे समय से ही था। ये तमाम प्रयास के बावजूद यहां की सत्ता से काफी दूर थे। चुनाव आयोग के जरिए एस आई आर और गृह मंत्रालय के अधीन अर्ध सैनिक बलों के दम पर इस किले को फतह करना हिंदू राष्ट्रवादियों का खास मकसद था। अंततः इस चुनाव में यहां की सत्ता को गिरफ्त में लेने में ये सफल हो चुके हैं। 

/imperialism-and-abhijat-workers-class

दूसरे विश्व युद्ध के बाद साम्राज्यवादी देशों में पूंजीपति वर्ग ने ‘कल्याणकारी राज्य’ कायम किये जिसके पीछे समाजवादी खेमे का दबाव तो था ही साथ ही उन देशों में संगठित मजदूर आंदोलन का भी भय था जो पहले विश्व युद्ध के बाद फिर उठ खड़ा हुआ था। दो विश्व युद्धों की तबाही और महामंदी की विभीषिका से उसका क्रांतिकारी तेवर भी था जिसे पूंजीपति वर्ग नजरअंदाज नहीं कर सकता था।