विदेश

तीसरे सप्ताह भी जारी है न्यूयार्क नर्सों की हड़ताल

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न्यूयार्क की नर्सों की हड़ताल तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। जहां नर्सें बहादुरी के साथ अपनी जीवन परिस्थितियों में सुधार के लिए संघर्ष कर रही हैं। वहीं उनकी यूनियन नौ

ब्राजील में तेल और डाक विभाग के मजदूरों-कर्मचारियों की हड़ताल

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ब्राजील में 15 दिसंबर को सरकारी तेल कम्पनी पेट्रोब्रास के मजदूरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी और उसके बाद सरकारी डाक विभाग करिओस के कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर द

चीन में इलेक्ट्रानिक कंपनी में हड़ताल

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चीन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सत्तावादी शासन के तहत कामगारों को संगठित होने और सामूहिक शक्ति के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं है, और उनके संघर्षों को अक्

बेल्जियम : कटौती कार्यक्रम के विरोध में हड़ताल

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बेल्जियम की एरिजोना सरकार मजदूर वर्ग पर नये हमले बोल रही है। एक ओर सरकार सैन्यीकरण पर खर्च बढ़ा रही है तो दूसरी ओर मजदूरों-कर्मचारियों के पेंशन, वेतन पर हमले के साथ सार्वज

गाजा नरसंहार के दो वर्ष पूरे होने पर दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन

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इजरायल द्वारा गाजा का नरसंहार शुरू किये दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस पूरी अवधि में गाजा के समर्थन में दुनिया भर में जनता की एकजुटता बढ़ती गयी है। 2 वर्ष पूरे होने पर भी जग

और अब मेडागास्कर में युवा विद्रोह - राष्ट्रपति भागे

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नेपाल के जेन-जेड युवाओं की दिखायी राह पर मेडागास्कर के युवा बढ़ चुके हैं। सितम्बर माह में बिजली व पानी की कटौती के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन का सरकार द्वारा दमन किया ग

अर्जेन्टीना : गरहान अस्पताल के कर्मचारी संघर्षरत

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अर्जेन्टीना में पिछले दो महीनों से गरहान अस्पताल के कर्मचारी अपनी वेतन वृद्धि, स्टाफ की भर्ती और आपूर्ति और आधारभूत ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी मा

ग्रीस : काम के घंटे बढ़ाये जाने के विरोध में प्रदर्शन

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ग्रीस के श्रम मंत्रालय ने मजदूरों के काम के घंटे प्रति दिन 13 किये जाने के सम्बन्ध में एक नियम पारित करने का तय किया है। इस नियम के अनुसार अब मजदूर एक ही नियोक्ता के अधीन

केन्याः प्रदर्शनों में पुलिस द्वारा 16 लोगों की हत्या

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केन्या में ऐतिहासिक वित्त विधेयक विरोधी प्रदर्शनों की पहली वर्षगांठ के अवसर पर पूरे देश में जगह-जगह 25 जून को प्रदर्शन आयोजित किये गये, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के

स्पेन में आंदोलनरत हजारों धातु मजदूर

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आजकल स्पेन में हजारों धातु मजदूर आंदोलनरत हैं। कहीं धातु मजदूर हड़ताल पर हैं तो कहीं हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। धातु मजदूरों की यूनियन मजदूरों के संघर्ष को रोकने,

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?