हिन्दू फासीवाद

‘‘कहां हमारे राम, कहां इनके राम’’

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घोटाले कई तरह के होते हैं। ‘आर्थिक घोटाला’, ‘राजनैतिक घोटाला’, ‘न्यायिक घोटाला’, ‘प्रशासनिक घोटाला’, ‘बौद्धिक घोटाला’, ‘साहित्यिक घोटाला’ वगैरह, वगैरह। क्या कोई ये सब घोट

IITs में ट्रोजन हार्स ने सेंध लगाई है -वासुदेवन मुकुंथ

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पिछले कुछ दशकों से, ‘इंडियन नालेज सिस्टम’ (IKS) नाम का एक प्रोजेक्ट पारंपरिक भारतीय ज्ञान को आधुनिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल करने की कोशिश कर रहा है। भारत के अपने बौ

राम मंदिर चंदा चोरी: राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट

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कहते हैं कि रामराज्य में एक धोबी के सवाल पर भी राजा राम ने जवाब दिया था। लेकिन कलियुग के इस नए रामराज्य में करोड़ों भक्त सवाल पूछ रहे हैं और जवाब में उन्हें टीवी डिबेट, प्

मोदी और भागवत के मुंह में दही जम जाना

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हमारे देश में धर्म, राष्ट्रवाद, नैतिकता, संस्कृति, संस्कार आदि के दो सबसे बड़े ठेकेदार हैं। एक श्रीमान मोदी जी हैं जो देश की सरकार चलाते हैं और अपनी पार्टी के अघोषित सर्वे

सूरत के नासिर नगर में सैकड़ों परिवारों को बेघर करने की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल सवाल

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अब तो मुसलमान होना ही काफी है बिना कोई नोटिस बिना कोई सूचना बस बुलडोजर लाओ और घरों को तोड़ दो। गुजरात के सूरत शहर स्थित नासिर नगर क्षेत्र में 30 मई से 2 जून तक बड़े पैमाने

आपातकाल : तब और अब

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।

उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत दलित युवक की बेरहमी से हत्या

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उत्तराखंड में ‘आनर किलिंग’ के तहत एक दलित युवक की बेरहमी से हत्या ने हमारे समाज में मौजूद जाति के कोढ़ को एक बार फिर सामने ला दिया है। टिहरी के देवल गांव के 18 वर्षीय केतन

हरिद्वार में ‘वेज बिरयानी’ विवाद: भोजन के नाम पर राजनीति

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हाल के दिनों में हरिद्वार में कुछ दक्षिणपंथी और धार्मिक संगठनों (अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद, परशुराम अखाड़ा आदि) ने ‘वेज बिरयानी’ नाम के खिलाफ अभियान चलाया है। दुकानों और ठेल

एक तीर जो ठीक निशाने पर लगा

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‘काॅकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) ने बहुुत तीखी आलोचना की है। अपने मुखपत्र आर्गनाइजर में ‘काॅकरोच सिंड्रोम: भारत विरोधी तकनीकी संशयवाद

भारतीय दूल्हा और सर्वोच्च न्यायालय

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हमारा देश एक अनोखा देश है। इसकी हर चीज अनोखी है। यहां तक कि हमारे देश का अनोखापन हर जगह विराजमान है। हमारे देश के प्रधानमंत्री अनोखे हैं। हमारी संसद अनोखी है। और हमारे दे

आलेख

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वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?

/west-asia-ke-sankat-ka-vaishawik-prabhaav

अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं। 

/west-asia-mein-badalata-shakti-santulan-samajhautaa-gyapan-ke-baad-ki-sthiti

अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।

/war-anay-sadhanon-se-politics-ka-hi-jaari-roop-hai

अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।

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पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।