मजदूर संघर्ष

क्रिसमस के दिन गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स की हड़ताल

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गिग एंड प्लेटफार्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (जीआईपीएसडब्ल्यूयू) के आह्वान पर, भोजन और अन्य ऐप-आधारित ‘‘डिलीवरी पार्टनर’’ ने ‘‘सुरक्षा, संरक्षा और सम्मान’’ के अधिकार की मांग

ब्राजील में तेल और डाक विभाग के मजदूरों-कर्मचारियों की हड़ताल

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ब्राजील में 15 दिसंबर को सरकारी तेल कम्पनी पेट्रोब्रास के मजदूरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा कर दी और उसके बाद सरकारी डाक विभाग करिओस के कर्मचारियों ने भी हड़ताल कर द

चीन में इलेक्ट्रानिक कंपनी में हड़ताल

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चीन में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सत्तावादी शासन के तहत कामगारों को संगठित होने और सामूहिक शक्ति के रूप में कार्य करने का अधिकार नहीं है, और उनके संघर्षों को अक्

अर्जेन्टीना : गरहान अस्पताल के कर्मचारी संघर्षरत

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अर्जेन्टीना में पिछले दो महीनों से गरहान अस्पताल के कर्मचारी अपनी वेतन वृद्धि, स्टाफ की भर्ती और आपूर्ति और आधारभूत ढांचे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कर्मचारियों ने अपनी मा

सैमसंग मजदूरों की हड़ताल व सीटू का समझौतापरस्त नेतृत्व

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सैमसंग इंडिया के तमिलनाडु स्थित संयंत्र के संघर्षरत मजदूरों की एक महीने पुरानी हड़ताल बगैर किसी सम्मानजनक समझौते के समाप्त हो गयी है। दक्षिण कोरिया की इस बहुराष्ट्रीय कम्प

बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूर पंचायत

मजदूर पंचायत कर बवाना इंडस्ट्रियल एरिया के फैक्टरी मालिकों के खिलाफ शिकायत पत्र

दिल्ली/ 3 अगस्त को न्यूनतम वेतन एवं अन्य श्रम अधिकारों को लागू करवाने के लिए बवाना इंडस्ट्रियल एरिया में मजदूर पंचायत का आयोजन किया गया। मजदूर एकता समिति

संयुक्त मोर्चा ने सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा

भोजनमाताओं/रसोइयों द्वारा सभा एवं ज्ञापन

बदायूं/ दिनांक 12 अगस्त 2024 को आदर्श शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन जनपद बदायूं के नेतृत्व में स्थान जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय बदायूं पर धरना प्

आलेख

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मजदूर के पास पूंजी नहीं होती इसीलिए पूंजीवाद में उसकी कोई हैसियत नहीं होती। इतना ही नहीं, वह जिन्दा रहने के लिए पूंजीपति पर निर्भर होता है। वह पूंजीपति के लिए काम करता है और जिन्दा रहता है। इसके लिए वह पूंजीपति से जिन संबंधों में बंधता है वे उसे पूंजीपति का गुलाम बना देती हैं। इसीलिए मजदूर को उजरती गुलाम यानी मजदूरी करने वाला गुलाम कहा जाता है। स्वाभाविक है कि समाज में गुलाम व गुलाम मालिक की राजनीतिक-सामाजिक हैसियत एक नहीं हो सकती।

/punjivadi-jantantra-and-chunavi-corruption

अठारहवीं सदी के इंग्लैण्ड में होने वाले चुनावी भ्रष्टाचार पर गूगल से ‘सर्च’ करने पर उसका ए आई स्वतः ही यह जवाब हाजिर कर देता हैः 

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एस.आई.आर. प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं की कटौती की गई। अब तक 13 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए। जबकि 5-6 करोड़ लोगों को संदेह की आड़ में नोटिस भेजे गए। 13 करोड़ में से 70 प्रतिशत वो लोग थे जिन्हें स्थानांतरित या अनुपस्थित बता दिया गया। इस तरह बड़े स्तर पर मनमानी छंटनी की जा रही है। इसमें सबसे बड़ी संख्या अल्पसंख्यक, दलित, आदिवासी, महिलाओं और मलिन बस्तियों में रहने वालों की है।

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इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं।