तीन मुहल्ले
इसी शहर के तीन मुहल्ले
आपस में बातें करते हैं
अपने सुख-दुख अपनी खुशियां
मिलकर बांटा करते हैं
इसी शहर के तीन मुहल्ले
आपस में बातें करते हैं
अपने सुख-दुख अपनी खुशियां
मिलकर बांटा करते हैं
राम मंदिर में चंदा चोरी होने के संबंध में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि जो मंदिर में चंदा दिया गया है उसे दान बोलना चाहिए और दान देने के बाद उस
आज का दिन भी बाकी दिनों की तरह सामान्य ही था सिवाय उस सूचना के जो गेट पर टंगी थी। बीते कुछ सालों से कंपनी हर वर्ष 21 जून को शहर की किसी खुली जगह पर योग दिवस का आयोजन करती
दो मिस काॅल। फैक्टरी की व्यस्तता के बीच जैसे ही मोबाइल खोला मिस काॅल पर नजर गई, जो संकेत थी कि सुभाष को कोई जरूरी काम है। फैक्टरी के शोरगुल में बातचीत संभव नहीं हो सकती।
सुलेमान जब पहली बार इस फैक्टरी में आया तब महज 15 साल का था। पिता खरात मशीन कारीगर। स्वभाव से शुष्क और निर्दयी।। अक्सर छोटे-मोटे कामों के लिए कंपनी बुला लेती और काम के एवज
हालिया समय में होने वाले पेपर लीक श्रृंखला में NEET (UG) 2026 का नाम भी जुड़ गया है। 3 मई 2026 को यह परीक्षा आयोजित हुई। अभी-अभी सभी छात्र जिन्होंने NEET (UG) 2026 परीक्षा में भाग लिया था निश्चिंत ह
ट्रेन या बस में सफर करते हुए हमें एक उलझन सी रहती है। ट्रेन में सफर के लिए स्टेशन पर इंतजार करते हुए यह पता नहीं होता है कि ट्रेन कब आयेगी। बस में बैठकर इंतजार करते हुए स
सेन्चुरी मिल, जो आदित्य बिडला रियल एस्टेट (IBREL) लिमिटेड का हिस्सा थी, जिसका आई टी सी लिमिटेड द्वारा अधिग्रहण पूर्ण होने के आखिरी चरण में हैं वहां एक अजीब तरीके का सन्ना
वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?
अमेरिकी साम्राज्यवादी अब ऐसी स्थिति में नहीं रह गये हैं कि वे नाटो देशों को सीधे आदेश जारी करें। इसे ब्रिक्स, शंघाई सहकार संगठन जैसे क्षेत्रीय गठबंधनों का सामना करना पड़ रहा है। ये सारे गठबंधन अमेरिकी वर्चस्व वाली दुनिया को एक हद तक चुनौती दे रहे हैं।
अमरीकी साम्राज्यवादी और इजरायली शासक सोचते थे कि ईरान के शीर्ष नेतृत्व का सफाया करने के बाद ईरानी जनता अपनी सत्ता के विरुद्ध उठ खड़ी होगी और इसका फायदा उठाते हुए अमरीकी साम्राज्यवादी अपनी किसी कठपुतली को सत्ता में स्थापित कर देंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। ईरानी अवाम अपनी सत्ता के समर्थन में मजबूती से खड़ी हो गई। यहां से अमरीकी साम्राज्यवादियों को समझ में आ गया कि वे ईरान पर कब्जा नहीं कर सकते।
अमेरिकी साम्राज्यवादी पश्चिम एशिया में और सारी दुनिया में अपनी साम्राज्यवादी जकड़न को खत्म नहीं होने देना चाहेंगे। वे इसके खिलाफ हर संभव प्रयास करेंगे। एक हमले में मुंह की खाने के बाद वे सबक लेकर आगे हमला करने से तौबा नहीं करेंगे। यह उनकी साम्राज्यवादी फितरत के खिलाफ होगा। यानी वे ईरान पर काबू पाने के लिए दूसरे तरीकों की खोज में लग जायेंगे।
पिछले दस-बारह सालों में हिन्दू फासीवादियों ने इस अनौपचारिक आपातकाल की शैली को काफी विकसित किया है। कहां किस छेद का इस्तेमाल करना है, इसमें उन्होंने महारत हासिल की है। इनके इस कृत्य में न्यायपालिका की सहभागिता से यह काम और आसान हो गया है। मतदाता सूची का विशेष गहन पुनर्रीक्षण इस सबका विशिष्ट उदाहरण है।