पत्र

जेन जी बनेगी गो मित्र

जंतर-मंतर संघर्ष से जेन-जी के भाजपा से दूर जाने का खौफ संघ-भाजपा के नेताओं के चेहरों पर नजर आने लगा है। जेन-जी के महत्व को संघी अच्छे से जानते हैं। वे जानते हैं कि अगर नई

नीयत

/neeyat

अरे मुल्ला जी आज सावन का पहला सोमवार है थोड़ा लगा लो, कहते हुए पंडित जी ने तम्बाकू भरी चिलम नजाकत अली की तरफ बढ़ाई। मशीन की आड़ का अंधेरा चिलम में उठने वाली लपट में चमक उठा

जेन जी के बाद जेन अल्फा

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पिछले दिनों जंतर मंतर पर जेन जी का विरोध प्रदर्शन हुआ। जेन जी की मांग पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे की थी। शुरूआत में तो मोदी सरकार और लगु

नई राह दिखलाते बच्चे

/nai-raah-dikhalate-bachche

अंधेरे के घटाटोप में 
प्रचार तंत्र की लहालोट में 
लोकतंत्र पर पड़ी चोट में  
दीपक एक जलाते बच्चे 
जग का तिमिर मिटाते बच्चे
नई राह दिखलाते बच्चे 

मकरूह

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‘‘गत्ते बिछा लो खाना खा लेते हैं।’’ राम मोहन ने साथ में काम कर रहे लड़कों को संबोधित करते हुए कहा। रात के नौ बज चुके हैं। सभी लड़के लेथ मशीन में अपने-अपने काम पर लगे हुए है

वर्तमान आंदोलन और न्यायपालिका

/vartaman-aandolan-and-nyaaypalika

जब भारत ही नहीं पूरी दुनिया के लोगों ने देखा कि बिना नेम प्लेट पुलिस वाले, सादी वर्दी में तैनात गुंडे-लाठी डंडे लिए हुए नियम विरुद्ध पुलिस के साथ खड़े थे और लड़कियों और लड़क

जानवर और इंसान

/animal-and-human

वैसे तो खाली समय कब होता है लेकिन जब कोई जानवर बन्दर, घोड़ा, ऊंट आदि दो पैरों पर चलने की कोशिश करता है तो थोड़ी बहुत हंसी आ ही जाती है। यह शायद इसलिए होता हो कि कुछ लोग दो

तीन मुहल्ले

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इसी शहर के तीन मुहल्ले 
आपस में बातें करते हैं 
अपने सुख-दुख अपनी खुशियां
मिलकर बांटा करते हैं 

आलेख

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अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।

/titali-effect-kuch-itihaas-se-kucha-vartaman-mein

तितली प्रभाव अथवा बटरफ्लाई इफेक्ट विश्रंखलता सिद्धान्त (Chaos Theory) में काफी प्रचलित धारणा है जिसका सरल सा मतलब यह है कि यदि कोई सिस्टम या व्यवस्था विश्रंखल अवस्था में हो तो कोई बहुत छोटा सा कारण भी बहुत बड़ा परिणाम पैदा कर सकता है। प्रचलित भाषा में, यदि बंगाल की खाड़ी में कोई तितली पंख फड़फड़ाये तो उससे हजारों किमी. दूर अरब सागर में तूफान आ सकता है। 

/sadho-thagawa-nagariya-lootal-ho

वैसे संघी ठग-लुटेरों के पक्ष में यह कहना होगा कि उन्होंने कुछ अनोखा नहीं किया है। परंपरा प्रेमी ये ठग-लुटेरे अच्छी तरह जानते हैं कि भारत में हजारों सालों से मंदिर लूटे जाते रहे हैं। मंदिरों को देश के भीतर के हिन्दू राजाओं व ठगों-लुटेरों ने भी लूटा और बाहर से आने वाले विधर्मियों ने भी। मंदिरों की इस सारी लूटपाट के बावजूद आस्थावान हिन्दू जनता मंदिरों में चढ़ावा देती रही है। अब जब इतने मासूम आस्थावान समाज में मौजूद हों तो ठगों-लुटेरों को दोष क्यों दिया जाये?