खाने की टेबल पर जिनके
पकवानों की रेलमपेल
वे पाठ पढ़ाते हैं हमको
‘संतोष करो, संतोष करो।’
उनके धंधों की खातिर
हम पेट काट कर टैक्स भरें
और नसीहत सुनते जाएं
‘त्याग करो, भई, त्याग करो।’
मोटी-मोटी तोंदों को जो
ठूंस-ठूंस कर भरे हुए
हम भूखों को सीख सिखाते
सपने देखो, धीर धरो
बेड़ा गर्क देश का करके
हमको शिक्षा देते हैं
तेरे बस की बात नहीं
हम राज करें, तुम राम भजो ।