निर्माण -रेजिनो पेद्रोसो

Published
Thu, 04/16/2026 - 15:50
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जैसे निहाई पर लोहे का पत्थर ढाला जाता है
वैसे ही हम नए दिन ढालेंगे
ताकत और पसीने से नहाए हुए
हम पाताल में उतरेंगे
और धरती के गर्भ से नया वैभव जीत लाएंगे

हम पर्वतों के उत्तुंग शिखरों पर चढ़ेंगे
और सूरज हममें जिंदगी भर देगा
हम सूरज के टुकड़े बन जाएंगे

हम एक दूसरी जिंदगी ढालेंगे शानदार और
मानवता से सराबोर
अपने समवेत शक्तिशाली प्रयास से मुझे शाश्वत बना देंगे
और ऊषा की क्वांरी निगाहों की छांह में
हम मांसपेशियों की निर्माणशक्ति
और हृदयों के स्नेहमय भाईचारे के गीत गाएंगे

हम अनेक हैं।
किंतु एक में समन्वित होंगे
उस महान गीत में हम सबों की आवाज एक होगी
हम लोहे के गीत गाएंगे
मशीनों के ठंडे निर्मल सौंदर्य के गीत

निहाई ट्रैक्टर
जो धरती को उलट-पलट रहे हैं
बिजली के रहंट डाइनैमो
रेलों का अनंत जाल
फौलाद की नसें जिन पर जिंदगी आती-जाती है
बिजली के केबिलों की भूल-भुलैया
जो सत्संग की भक्ति का ताना-बाना
जहां शक्ति का विराट स्पंदन होता है

हम लोहे के गीत गाएंगे, दुनिया लोहे की है
हम लोहे की संतानें हैं
लेकिन मशीनों के गुलाम नहीं बनेंगे
हमारे हृदय में एक नई भावना
अंगड़ाइयां लेंगी!

हमारे हृदय में एक नई भावना
अंगड़ाइयां लेंगी
इतनी विराट कि
उसे प्यार करने को
हमें सब भेद-भाव भुलाकर
एक विराट समवेत हृदय का निर्माण करना पड़ेगा

तब न कटुता रहेगी
न ये अभागे बरबाद दिन
जैसे हम निहाई पर लोहे के पत्तर ढालते हैं
वैसे ही हम नए दिन ढालेंगे
उसमें उल्लास हीरों की तरह जड़ा रहेगा
नया दिन देखेगा
कि हम शक्तिशाली और सुदृढ़
ज्योति की ओर बढ़ रहे हैं

खेतों में, बखारों में, दुकानों में
हर औजार एक हथियार होगा
आग जम्हूरा हथौड़ा हंसिया
हम बढ़ती हुई फौज की तरह
धरती पर छा जाएंगे
अपने गीतों से
ज़िंदगी का अभिनंदन करते हुए।

अनुवाद : धर्मवीर भारती

साभार : https://www.hindwi.org/

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