सिगनेचर ग्लोबल में मजदूरों की मौत

Published
Thu, 04/16/2026 - 15:50
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चमचमाती दुनिया के पीछे और भी दुनिया है। वह दुनिया मजदूरों-किसानों की बदहाली की है। यह एक उजड़ती हुयी दुनिया है। पूंजीपतियों के मुनाफे के चक्कर में आज मजदूर-किसान बुनियाद में दब कर मर रहा है। सिगनेचर ग्लोबल हरियाणा बिल्डिंग बनाने का कारोबार करती है। गुड़गांव के सिघरावली इलाके में बिल्डिंग बनाने के लिए इसके मजदूर जमीन की खुदाई कर रहे थे। तीस फिट गहरा, सौ फिट चौड़ा, खुदाई करने के क्रम में जमीन के एक तरफ मिट्टी की परत काम कर रहे मजदूरों पर अचानक गिर जाती है। यह घटना 10 मार्च 26 को 11 बजे दिन की है जिसमें दस मजदूर अचानक मिट्टी में दब कर मर जाते हैं। सिगनेचर ग्लोबल कम्पनी के प्रबंधक और कर्मचारी जे सी बी से मिट्टी हटाकर मरे हुए मजदूरों को एक गाड़ी में डाल कर राजस्थान के भिवाड़ी में नागरिक अस्पताल लेकर जाते हैं। डाक्टर मजदूरों की बाडी को देखकर समझ गया कि यह केस पुलिस का है। उसने पुलिस को सूचना दे दी। भिवाड़ी पुलिस ने गुड़गांव पुलिस को सूचना दी कि सिगनेचर ग्लोबल में काम कर रहे मजदूरों की मिट्टी में दब कर मौत हो चुकी है। तब जाकर गुड़गांव पुलिस हरकत में आई। कम्पनी से मिलकर किसी तरह लाशों को रेवाड़ी में पंचनामा कर परिजनों को दे दिया गया जिसमें सात मजदूर झारखण्ड के थे तीन मजदूर राजस्थान के थे। 
    
सोशल मीडिया द्वारा ही ये खबर मिली कि सिगनेचर ग्लोबल बिल्डर की यह घटना है जहां पर बिल्डिंग बनाने का काम हो रहा था। वहां घोर लापरवाही के कारण यह घटना घटी थी। सोशल मीडिया के पत्रकारों को कम्पनी के गेट के अंदर नहीं जाने दिया गया। भाड़े के बांउसरों को लाकर कम्पनी के गेट के आस-पास खड़ा कर दिया गया। कोई बड़ा विवाद न हो, शासन-प्रशासन, और बिल्डर ने साथ मिलकर इस घटना पर समझौता कर लिया। जिसके कारण मरने वाले मजदूरों को क्या मुआवजा मिला पता नहीं चल पाया। जिन मजदूर ने सालों सिगनेचर बिल्डर को मुनाफा कमा कर दिया था इन मजदूरों को क्या न्याय मिल सका। आज उसके परिवार के लोगों ने अपने बेटे या पिता की काम करते हुए मौत को देखा। आज शासन-प्रशासन, पूंजीपतियों का गहरा गठजोड़ है। जिसके कारण बड़ी से बड़ी घटना भी छोटी नजर आती है। घटनायें आसानी से दबा दी जाती हैं। पूंजीपतियों से लेकर नौकरशाही सब बच जाते हैं। 
    
आज सत्ता पर पूंजीपतियों का कब्जा है जिसके कारण आये दिन बड़ी-बड़ी घटना होने के बावजूद दबा दी जाती हैं। आज देश में एक क्रांति की जरूरत है जिससे व्यवस्था बदल सके। पूंजीवाद की व्यवस्था को खत्म करके समाजवादी व्यवस्था कायम करनी होगी। यह काम मजदूर वर्ग किसान मिलकर ही सकते हैं।
     -रामकुमार वैशाली, गुड़गांव    

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