एस आई आर के विरोध में सेमिनार

Published
Thu, 04/16/2026 - 15:50
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क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा जलियांवाला बाग हत्याकांड को याद करते हुए 12 अप्रैल को हल्द्वानी, मऊ, हरिद्वार, बरेली में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सेमिनार आयोजित किये गये। सेमिनारों में सबसे पहले जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए दो मिनट का मौन रखा गया। 
    
सेमिनार में संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष पी. पी. आर्या ने  s i r के बारे में विस्तार से बताते हुये कहा कि असल में s i r के नाम पर पिछले दरवाजे से देश में छत्ब् लागू की जा रही है। यह असल में मजदूर-मेहनतकश जनता, सरकार के राजनीतिक विरोधियों एवं मुस्लिमों से मत का अधिकार छीनने की साजिश है।
    
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अमीन उर रहमान ने कहा कि सरकार जिस प्रकार एस.आई.आर. लागू कर रही है उसकी आड़ में वह मेहनतकशsir जनता को उसके जनवादी अधिकार से वंचित करना चाहती है। 
    
वरिष्ठ पत्रकार व संस्कृतिकर्मी उमेश तिवारी (विश्वास) ने अपने वक्तव्य में कहा कि आज इस रेत पर टिकी व्यवस्था का संकट बढ़ रहा है और मेहनतकशों को एकजुट होकर बेहतरीन समाज का निर्माण करना होगा।
    
इंकलाबी मजदूर केंद्र के पूर्व अध्यक्ष कैलाश भट्ट ने कहा कि इस देश में वोट का अधिकार मजदूर वर्ग ने अपने संघर्षों से हासिल किया था। और आज जब मजदूर आंदोलन पीछे हटे हैं तो पूंजीपति वर्ग ये अधिकार छीनने की तरफ बढ़ रहा है।
    
सामाजिक कार्यकर्ता तसलीम अंसारी ने कहा कि आज जो स्थिति है वह अंगरेजी राज से भी बुरी है। हल्द्वानी का बनभूलपुरा अंग्रेजों के समय से बसा है। इसके पास ही रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, पुलिस चौकी आदि हैं लेकिन यह सरकार अपने ही लोगों के खिलाफ काम कर रही है। किसी को रोजगार से वंचित कर रही है तो किसी के खून-पसीने से बने घर को बुलडोजर से गिरा रही है। और एस आई आर के बहाने जनता के वोट डालने के अधिकार को भी छीन लेना चाहती है।
    
उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के महासचिव प्रभात ध्यानी ने कहा कि एस आई आर के नाम पर भाजपा के लोग अपने विरोधियों के वोट को हटानेs i r का काम कर रही है। वह शुद्धिकरण के नाम अल्पसंख्यकों को उनके अधिकार से भी वंचित कर रही है। इसके खिलाफ संयुक्त गोलबंदी कर बड़ा आंदोलन खड़ा करना चाहिए। 
    
इसके अलावा सेमिनार में क्रांतिकारी किसान मंच के आनंद पाण्डेय, परिवर्तनकामी छात्र संगठन के महासचिव महेश, इंकलाबी मजदूर केंद्र के पंकज, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के वरिष्ठ साथी शिवदेव सिंह, पाक्षिक अखबार नागरिक के संपादक रोहित रुहेला सहित कई लोगों ने अपने विचार रखे। सेमिनार में दो प्रस्ताव 1.एस. आई. आर. को निरस्त करने और 2. हल्द्वानी की सबसे पुरानी रिहाईशी बस्ती बनभूलपुरा को उजाड़ने के खिलाफ लिये गये।
    
मऊ में क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन द्वारा आयोजित सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केंद्र व ग्रामीण मजदूर यूनियन ने भी भागीदारी की।
    
वक्ताओं ने शासक पूंजीपति वर्ग व उसकी सबसे चहेती बीजेपी द्वारा अपनाई गई एस.आई.आर. की प्रक्रिया को जनविरोधी बताते हुए कहा कि मजदूरों, मेहनतकशों, दलितों, आदिवासियों व अल्पसंख्यकों को पूंजीपरस्त नीतियों के हिस्से के तौर पर ही एस.आई.आर. को लेना चाहिए और पूंजीपति वर्ग व उसकी चहेती बीजेपी द्वारा नागरिक अधिकारों और लोकतंत्र पर किए जा रहे हमलों का विरोध करना चाहिए।
    
हरिद्वार में सेमिनार में जलियांवाला बाग हत्याकांड के शहीदों को याद करते हुए क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के पंजाब के साथी नरभिन्दर जी ने विस्तृत जानकारी रखते हुए बताया कि कैसे ब्रिटिश हुकूमत ने भारतीय जनता की अक्षुण्ण एकता को खण्डित करके निहत्थे लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। इसका मुंहतोड़ जवाब 19 साल के ऊधमसिंह ने 21 साल बाद जनरल ओ डवायर को ब्रिटेन में मौत के घाट उतार कर दिया था। परन्तु भगत सिंह जलियांवाला बाग नरसंहार के समय मात्र 11 साल के थे, उन्होंने इसका एक अलग तरीके से जवाब की तैयारी की। उन्होंने कहा कि इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है। उन्होंने पूंजी के निजाम के स्थान पर मजदूर-मेहनतकशों का राज समाजवाद के लिए संघर्ष किया। 
    
सेमिनार में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के पंकज कुमार ने कहा कि जैसा सभी जानते हैं मतदाता शुद्धीकरण की आड़ में चल रहा एस आई आर नागरिकता परीक्षण से जुड़ा है और मतदाताओं को बड़े पैमाने पर सूची से हटाने की बातें उजागर हो रही हैं। बिहार में 47 लाख मतदाता मृत स्थानांतरित व मतदाता सूची से बाहर किए गए। इसके बाद 12 राज्यों में 6.5 करोड़ से ज्यादा मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं।
    
सेमिनार का संचालन क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के महासचिव भूपाल ने किया।

सेमिनार में भेल मजदूर ट्रेड यूनियन, देव भूमि श्रमिक संगठन, हिन्दुस्तान यूनिलीवर, एवरेडी मजदूर यूनियन, सिमेंस वर्कर्स (सी एंड एस), प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, किर्बी श्रमिक कमेटी, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र, उत्तराखंड परिवतर्न पार्टी व एप्टा के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। -विशेष संवाददाता

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