शहीद दिवस पर पदयात्रा

Published
Thu, 04/16/2026 - 15:50
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पंतनगर/ दिनांक 13 अप्रैल को पंतनगर गोलीकांड व जलियांवाला बाग कांड की स्मृति में इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं ठेका मजदूर कल्याण समिति पंतनगर, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र द्वारा पीपल चौराहा बड़ी मार्केट से शहीद स्मारक तक पदयात्रा निकाली गयी। शहीदों की याद में निकाली जा रही पद यात्रा को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के सुरक्षा विभाग और पुलिस प्रशासन द्वारा जिला न्यायालय द्वारा धरना-प्रदर्शन पर रोक का बहाना बनाकर काफी खींचातानी की गयी। पर मजदूरों के संघर्ष के बाद पदयात्रा निकाली गई। और शहीद स्मारक पर  विश्वविद्यालय श्रमिक कल्याण संघ, कर्मचारी संगठन, राष्ट्रीय शोषित परिषद, अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के साथ सामूहिक रूप से सभा में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 
    
सभा में वक्ताओं ने कहा कि 13 अप्रैल 1919 को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा जलियांवाला बाग में शांतिपूर्ण तरीके से चल रही सभा में निहत्थी जनता पर चलाई गई अंधाधुंध गोलियों से हजारों निर्दोष जनता का कत्ल कर दिया गया था। अंग्रेजी सरकार  के दमन से आजादी का आंदोलन रुका नहीं बल्कि शहीदों की रुधिर की धार से शहीद भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव, ऊधम सिंह जैसे क्रांतिकारी पैदा हुए जिन्होंने अपनी जान की कुर्बानी देकर आजादी के आंदोलन को आगे बढ़ाया। अंततः मजदूरों-किसानों के संघर्ष के बाद देश को पूर्ण आजादी तो नहीं, राजनीतिक आजादी मिली। 
    
आजादी के ठीक 40 साल बाद 13 अप्रैल 1978 को आजाद भारत में पंतनगर में श्रम नियमों द्वारा देय बोनस, ग्रेच्युटी, अवकाश, स्थाईकरण जैसी कानूनी मांगों को लेकर मजदूरों की चल रही शांतिपूर्ण सभा पर काले अंग्रेजों द्वारा गोलीकांड  किया गया और नया जलियांवाला हत्याकांड रचा गया जिसमें हमारे 14 मजदूर साथी शहीद हो गए। सैकड़ों घायल हो गए। काले अंग्रेजों ने साबित किया कि वह मजदूर वर्ग के दमन में अंग्रेजी हुकूमत से कतई कम नहीं है। पर हमारे शहीद मजदूर साथियों ने गोरे, काले अंग्रेजों के सामने घुटने नहीं टेके, गुलामी को स्वीकार नहीं किया। अपनी जायज मांगों को हासिल करने में जुझारू संघर्षों को आगे बढ़ाते रहे। गुलामी को खत्म कर नियमितीकरण, बोनस, ग्रेच्युटी, अवकाश जैसी मूलभूत सुविधाएं शासन-प्रशासन से छीनी।
    
पूरे देश की भांति पंतनगर में आज फिर से ठेका प्रथा का बोलबाला, अति अल्प न्यूनतम मजदूरी, शोषण, उत्पीड़न, गुलामी, अत्याचार, अपमान चरम पर है। पंतनगर में 20-25 वर्षों से कार्यरत मजदूरों को उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद मजदूरों को नियमित नहीं किया जा रहा है। हाईकोर्ट की अवमानना की जा रही है। वहीं जिला न्यायालय के आदेश का बहाना बनाकर धरना प्रदर्शन पर रोक लगा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन किया जा रहा है। शहीदों को श्रद्धांजलि सभा करने को रोका जा रहा है। शहीदों का अपमान किया जा रहा है।
    
सभी वक्ताओं द्वारा शहीदों के सपने पूरे करने में पूरी ताकत के साथ अपनी आवाज बुलंद करने और नियमितीकरण जैसी जायज मांगों के लिए जुझारू आंदोलन आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।             -पंतनगर संवाददाता

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