न्यूनतम वेतन लागू करने व दमन के विरोध में प्रदर्शन

Published
Sat, 05/16/2026 - 15:50
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फरीदाबाद/ दिनांक 14 मई 2026 को फरीदाबाद जन संघर्ष समिति के बैनर तले इंकलाबी मजदूर केंद्र एवं अन्य घटक संगठनों ने एक प्रदर्शन आयोजित किया। यह प्रदर्शन हरियाणा में न्यूनतम वेतन की बढ़ोत्तरी के बावजूद कंपनियों में बढ़ा हुआ वेतन न दिए जाने की खिलाफत करते हुए एवं न्यूनतम वेतन बढ़ाने के संघर्ष के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी मजदूरों व मजदूर नेताओं को बिना शर्त रिहा करने, उन पर लगे सभी फर्जी मुकदमे वापस लेने तथा फरवरी माह में सेक्टर 24 मुजेसर थाना एरिया में श्री कालकाजी स्टील फैक्टरी में हुए भीषण अग्निकांड में अपनी जान गंवाने वाले मजदूरों को 30 लाख रुपए मुआवजा एवं उनके परिजनों को अन्य सुविधाएं दिए जाने, समान काम का समान वेतन लागू करने, ठेकेदारी प्रथा आदि के खिलाफ डीसी आॅफिस व श्रम विभाग फरीदाबाद (डी एल सी आफिस), सेक्टर-12 फरीदाबाद पर किया गया।
    
धरना प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि आज हमारे देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है जिससे देश के मजदूर सिर्फ प्रभावित ही नहीं हैं बल्कि इस महंगाई में मजदूरों व उनके परिवारों का जीवन यापन करना मुश्किल हो गया है। खाने-पीने की चीज हो, कमरों का किराया हो, बिजली-पानी हो, स्कूल की फीस हो या इलाज के दाम सब कई-कई गुना बढ़ चुके हैं। पेट भरने योग्य भोजन के इंतजाम के लिए भी मजदूरों को 12-12 घंटे कंपनियों में काम करना पड़ता है। अच्छे भोजन व जीवन की तो बात ही दूर है और 8 घंटे के बाद ओवरटाइम का भी डबल भुगतान मजदूरों को नहीं किया जाता है बस कागजों में दिखाया जाता है।
    
इन परिस्थितियों में जब मजबूर होकर मजदूर हड़ताल करने को बाध्य हुए तो ग्यारह सालों के बाद हरियाणा में आपकी सरकार ने आनन-फानन में न्यूनतम वेतन में कुछ बढ़ोत्तरी की है लेकिन आज के समय में मानकों के अनुरूप न्यूनतम वेतन 30,000 रु. बढ़ाये जाने की मांग किए जाने के बावजूद हरियाणा सरकार ने अकुशल मजदूर के लिए 15,220.71 रु., अर्ध कुशल मजदूर के लिए 16,780.47 रु., कुशल मजदूर के लिए 18,500.81 रु. और उच्च कुशल मजदूर के लिए 19,425.85 रु. लागू किया है जो कि आज की कठिन जीवन परिस्थितियों के अनुरूप पर्याप्त नहीं है। बढ़ाया गया न्यूनतम वेतन 15,220.71 रु. जो कि भुखमरी वेतन है, इसको भी कंपनियां देने को तैयार नहीं हैं। मजदूरों को मजबूर हो हड़ताल कर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। 
    
मजदूरों के इस न्यायपूर्ण संघर्ष का समर्थन करने व उन्हें कानूनी सलाह देने एवं शांतिपूर्ण संघर्ष से अधिकारों को हासिल करने की सलाह देने वाले मजदूरों व मजदूर नेताओं पर झूठे मुकदमे लगाकर उन्हें जेल में डाला जा रहा है जो कि अन्यायपूर्ण है।
    
हरियाणा सरकार द्वारा लागू न्यूनतम वेतन मजदूरों को देने के बदले कंपनियां मजदूरों की बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही हैं। मजदूरों को बढ़ा हुआ वेतन न देना पड़े इसके लिए पांच-दस साल पुराने कुशल मजदूरों को अब उनकी स्वास्थ्य जांच, पुलिस वेरिफिकेशन आदि बहानों से अयोग्य ठहराये जाने का प्रयास किया जा रहा है। पहले जिस मशीन आपरेटर को कुशल और अति कुशल मजदूर का वेतन मिल रहा था। अब कंपनियां कुशल मजदूर को अर्धकुशल या उससे भी कम और अतिकुशल को कुशल मजदूर या उससे भी कम वेतन दे रही हैं। कई कपड़ा डाइंग मिलों में तो इसी कम वेतन में डबल-डबल मशीनों को चलाने का दबाव बनाया जा रहा है।
    
महिला मजदूरों की स्थिति और भी खराब है। उन्हें पहले भी न्यूनतम वेतन नहीं दिया जाता था। अब भी उनसे पुराने वेतनमान से भी कम वेतन 8000 रु., 9000 रु. में ही या उसी में थोड़ी बहुत बढ़ोत्तरी करके 8-10-12 घंटे तक काम कराया जा रहा है जो किसी भी दृष्टिकोण से न्यायपूर्ण नहीं है।
    
फरीदाबाद के सेक्टर-24, मुजेसर थाना एरिया में स्थित कालका स्टील कंपनी में हुए भीषण अग्निकांड में अपनी जान गंवाने वाले दो मजदूरों व घायलों को अभी तक कोई उचित मुआवजा हासिल नहीं हुआ है। यह उनके परिवारों के साथ अन्याय है।
     
प्रदर्शन के माध्यम से वक्ताओं ने निम्न मांगों को उठाया:- 

1. सभी कंपनियों में बढ़े हुए न्यूनतम वेतनमान को सख्ती से लागू करवाया जाए।
2. सभी गिरफ्तार मजदूरों व मजदूर कार्यकर्ताओं को बिना शर्त रिहा किया जाए एवं उन पर लगे सभी फर्जी मुकदमे वापस लिए जाएं।
3. कालका स्टील कंपनी में हुए भीषण अग्निकांड में अपनी जान गंवाने वाले सभी मजदूरों को 30 लाख रुपए मुआवजा एवं अन्य सुविधाएं दी जाएं।
4. सभी कंपनियों में महिला-पुरुष मजदूरों के लिए समान काम का समान वेतन लागू किया जाए।
5. ठेकेदारी प्रथा को पूर्ण रूप से खत्म किया जाए।
6. 8 घंटे काम का न्यूनतम वेतन 30,000 रु. लागू किया जाए। 
        -फरीदाबाद संवाददाता
 

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