पेपर लीक : छात्रों पर संकट

Published
Mon, 06/01/2026 - 15:50
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हालिया समय में होने वाले पेपर लीक श्रृंखला में NEET (UG) 2026 का नाम भी जुड़ गया है। 3 मई 2026 को यह परीक्षा आयोजित हुई। अभी-अभी सभी छात्र जिन्होंने NEET (UG) 2026 परीक्षा में भाग लिया था निश्चिंत होकर बैठे ही थे, और अपने प्रश्न पत्र के उत्तरों का मिलान अथवा खोज रहे थे। उनके मस्तिष्क में इस बार किसी अच्छे काॅलेज में प्रवेश लेकर डाक्टर बनने का स्वप्न तैर रहा था। तरह-तरह की भावी योजनाएं बन रही थीं परन्तु परीक्षा के तुरंत बाद राजस्थान, बिहार व अन्य राज्यों से पेपर लीक की खबरें सामने आने लगीं। 
    
मामले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के द्वारा प्रारंभ हुई। जिसमें सी बी आई ने पाया कि परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र को सुनियोजित तरीके से लीक कर दिया गया था। इसमें सबसे चैंकाने वाला तथ्य है कि इस सिंडिकेट में परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञ भी थे। अगर उन पर गौर करें तो वे नाम इस प्रकार हैं-

पी वी कुलकर्णी- पुणे के एक रसायन विज्ञान लेक्चरर (सेवानिवृत्त) और NTA के लिए प्रश्नपत्र बनाने वाली टीम के सदस्य भी थे। इनके द्वारा अपने आवास पर स्पेशल कोचिंग क्लास आयोजित कर प्रश्न पत्र के सवाल व हल दिये गये।
मनीषा मांदरे- वनस्पति विज्ञान प्रोफेसर और NTA द्वारा नियुक्त विशेषज्ञ।
    
इन लोगों के अलावा मनीषा वाघमारे और संजय लोखंडे- ये वे मध्यस्थ थे जिन्होंने छात्रों से लाखों रुपये लेकर प्रोफेसरों के इस आपराधिक काम को आगे बढ़ाया।
    
दिनेश बिवाल व उनके भाई मांगीलाल राजस्थान के सीकर व जयपुर से जुड़ा परिवार इस नेटवर्क का मुख्य हिस्सा बताया जा रहा है। बिवाल सत्ताधारी पार्टी से जुड़ा व्यक्ति है।
    
NTA ने अब पुनः परीक्षा की घोषणा की है जो कि अब 21 जून 2026 को आयोजित की जायेगी।     
    
अब सवाल यह है कि विगत कुछ वर्षों में लगातार हो रही पेपर लीक जैसी घटनाएं क्यों नहीं रुक रहीं? आखिरकार क्यों शासन व सत्ता इन घटनाओं को रोकने में सक्षम सिद्ध नहीं हुई? विगत वर्षों में पेपर लीक की चेन में वृद्धि हुई है। यदि हम नजर डालें तो NEET (UG) 2026, NEET (UG) 2024, UGC NET (2024), यू पी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा (2024), उ.प्र. आर.ओ./ए.आर.ओ (2024), CSIR NET विवाद (2024), 2023 में राजस्थान भर्ती परीक्षा, 2022 में REET पेपर लीक, 2021 हरियाणा HSSC भर्ती पेपर लीक इत्यादि एक बहुत लम्बी श्रृंखला है।
    
हमारे देश के छात्र व युवा जो देश के मानव संसाधन कहे जाते हैं। उनके साथ ये घटनाएं होना सच में निंदनीय है। मानव संसाधन शब्द से आशय है कि ये ही छात्र आगे चलकर भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर अपना योगदान देंगे जिससे देश की आर्थिक, सामाजिक व संवेगात्मक प्रगति संभव है। पेपर लीक होने से केवल परीक्षा में कमी या समय व्यर्थ जैसी समस्याएं ही नहीं होतीं बल्कि आज के मानव संसाधन की प्रक्रिया में जो छात्र हैं  और युवा हैं उनका मनोबल और प्रेरणा तोड़ दिया जाता है। छात्र तो अपना सौ प्रतिशत योगदान देते हैं परन्तु परीक्षा तंत्र, राज्य व प्रशासन की चूक के कारण उनका वह भगीरथ प्रयास व्यर्थ चला जाता है। जिससे उनकी मानसिक स्थिति के साथ-साथ आर्थिक व सामाजिक स्थिति में गिरावट आती है। क्योंकि एक समय व उम्र खर्च करके युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की इस भयंकर प्रतिस्पर्धी समय में तैयारी करते हैं परन्तु भर्ती प्रक्रियाओं में देरी जो कि पेपर लीक के बाद होती है इससे उनका श्रम और धन दोनों व्यर्थ हो जाता है। 
    
वह युवा जिसकी असीम क्षमता और कौशल का लाभ देश व समाज को मिल सकता था, पेपर लीक जैसी समस्याओं से वह एक नकारात्मक गर्त में चला जाता है। 
    
पेपर लीक कोई तत्काल में होने वाली घटना नहीं है बल्कि इसके पीछे कई कारण विद्यमान रहते हैं-

1. संस्थागत कमजोरी- जैसे NTA पर दर्जनों परीक्षायें आयोजित कराने का बोझ है, किंतु उसका निगरानी तंत्र उतना मजबूत नहीं। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर वितरण तक की श्रृंखला में कई कमजोर कड़ियों में सेंध लगायी जा सकती है।

2. भ्रष्टाचार व आंतरिक मिलीभगत- NEET (UG) 2026 में हमने देखा कि NTA से जुड़े लोग ही पेपर लीक प्रक्रिया में शामिल थे। रक्षक ही भक्षक बन गये। 

3. कोचिंग संस्थानों की भूमिका- बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान इस अवैध व्यापार में मुख्य रूप से शामिल हैं। वे लीक प्रश्नपत्र खरीदकर छात्रों तक पहुंचाते हैं। आज कोचिंग इंडस्ट्री छात्रों को लूटने का हर संभव प्रयास कर रही है। सरकारी शिक्षा व्यवस्था के फेल होने से कोचिंग व्यापार में वृद्धि हो रही है तथा गरीब छात्र इससे वंचित रह जाते हैं। 

4. राजनीतिक संरक्षण- पेपर लीक गिरोहों को नेताओं व नौकरशाहों का परोक्ष संरक्षण

5. आर्थिक व्यापार- NEET 2026 में पेपर 30 लाख से 50 लाख रुपये में बेचे गये। छात्र विभिन्न परीक्षाओं के पेपर के लिए लाखों रुपये तक देते हैं। 

6. तकनीकी असुरक्षा- डिजिटल माध्यम के दुरुपयोग से लीक पेपर मिनटों में छात्रों तक पहुंच जाते हैं।
    
भारत अभी भी पेन पेपर आधारित परीक्षा प्रणाली पर निर्भर है और हमारे साइबर सुरक्षा मानक जो NTA के सर्वर और डेटा प्रबंधन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के नहीं हैं। 

7. कानूनी कमजोरी- 2024 से पहले पेपर लीक पर कोई केन्द्रीय कानून नहीं था। अपराधी साधारण धाराओं में पकड़े जाते थे और जल्द जमानत पर बाहर। जांच में देरी और राजनीतिकरण एक गंभीर समस्या।
    
विभिन्न कारणों से पेपर लीक जैसी घटनायें होती हैं। इस घटना से सभी छात्रों का नुकसान तो होता ही है लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों और लड़कियों का नुकसान सर्वाधिक होता है क्योंकि इनको सीमित संसाधन के कारण लंबे समय तक तैयारी की प्रक्रिया में संलग्न रहना संभव नहीं होता।
    
क्या पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सकता है, और कैसे?
    
यदि सरकार और परीक्षा एजेंसी चाहे तो बिल्कुल इसे रोका जा सकता है।

* जैसे प्रश्न पत्र को एक मजबूत इनक्रिप्शन में रखा जाए और सुरक्षित प्रिंटिंग व्यवस्था हो तथा उसकी सीसीटीवी निगरानी और बायोमैट्रिक एंट्री और इंटरनेट वर्जित हो।

* आज के ए.आई. के दौर में पेपर के सर्कुलेशन पर ए.आई. की नजर रख सकते हैं।

* प्रश्न पत्र तक कम से कम मानवीय पहुंच को सुनिश्चित किया जाए। 

* परीक्षा एजेंसी के सर्वर पर रेगुलर सुरक्षा रखी जाए। कम्प्यूटर आधारित परीक्षा पर शिफ्ट होना सुरक्षित हो सकता है।

* कड़े कानूनी नियम बनाये जाएं जिसमें सख्त सजा का प्रावधान हो।
    
आज के इस तकनीक के दौर में पेपर लीक होना आसान है लेकिन उसको रोकना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। छात्र परीक्षा संस्थाओं व सरकार पर भरोसा करके अपने उज्जवल भविष्य का सपना लेकर परीक्षा में बैठते हैं। छात्रों के साथ-साथ उस प्रक्रिया में उनके अभिभावकों व परिवारों का समर्थन भी होता है लेकिन पेपर लीक जैसी घटनाओं से सभी का भरोसा परीक्षा एजेंसी व सरकार से उठ जाता है। इस पूरे प्रकरण में एक चीज सबसे ज्यादा निराशाजनक रही और वह है सरकार की उदासीनता। शिक्षा मंत्री को विस्तृत प्रेस कांफ्रेंस कर पूरी जानकारी व तथ्य प्रेस व जनता के समक्ष रखने चाहिए थे। और लगातार होते इन प्रकरणों से आहत होकर एक नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सरकार को युवाओं को जवाब देना चाहिए, जो राष्ट्र अपने युवाओं और शिक्षा व्यवस्था को नहीं संभाल सकता वह लंबे समय तक शक्तिशाली नहीं रह सकता व उसका पतन प्रारंभ हो जाता है।  -शरद विद्यार्थी (MA)    

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