दिल्ली/ 24 मई 2026 को मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान (मासा) द्वारा दिल्ली के राजेंद्र भवन में ‘मजदूर आंदोलन का मौजूदा उभार और बढ़ता दमन चक्र’ विषय पर कन्वेंशन का आयोजन किया गया। हाॅल श्रोताओं से खचाखच भरा रहा, तिल रखने की भी जगह न बची। इससे स्पष्ट है कि लोग इस मुद्दे को लेकर कितने उत्साहित और बेचैन हैं।
सबसे पहले, मासा की ओर से इंकलाबी मजदूर केन्द्र के महासचिव रोहित ने कन्वेंशन की भूमिका और उसकी जरूरत के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत में ठेका और अस्थायी मजदूरों का मौजूदा आंदोलन दिल्ली-एनसीआर के साथ उत्तर भारत के कई राज्यों को अपनी चपेट में ले चुका है जो वेतन बढ़ोत्तरी की मांग के साथ शुरू हुआ है। इसके असर से दक्षिण के राज्य भी अछूते नहीं हैं।
मजदूरों के एक वर्ग के रूप में सड़कों पर उतरने के बाद हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों और अब तेलंगाना और कर्नाटक की राज्य सरकारों को भी न्यूनतम वेतन बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा है। आंदोलन अभी जारी है। सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन को भी पूंजीपति देने को राजी नहीं हैं जो वास्तव में भुखमरी वेतन ही है। इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला मजदूर भी शामिल हैं, जिन्हें यह भुखमरी वेतन भी नहीं मिलता है।
मानेसर, नोएडा, हरिद्वार और अन्य जगहों पर मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं पर सरकारें दमन चक्र चला रही हैं। मानेसर में इंकलाबी मजदूर केंद्र के 6 कार्यकर्ताओं सहित 61 लोगों को संगीन धाराओं में फर्जी मुकदमे दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया जिनमें महिला मजदूर भी शामिल हैं। वहीं नोएडा में बिगुल के कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है। एक तरफ मजदूर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन वहीं लाखों मजदूरों की सदस्यता का दावा करने वाले केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन इस आंदोलन से नदारद हैं।
लेबर एक्टिविस्ट राखी सहगल ने कहा कि ये उभार ठेका मजदूरों द्वारा भुखमरी की स्थिति में पहुंच जाने पर स्वतः स्फूर्त तरीके से शुरू हुआ। आज रोजगार के साथ मजदूरों के आत्मसम्मान पर भी संकट के बादल छाये हुए हैं। आज इन मजदूरों को संगठित करने की जरूरत सबसे अधिक है। केंद्रीय ट्रेड यूनियन फेडरेशन द्वारा मजदूरों को नेतृत्व न दे पाना नोएडा में साफ दिखाई दे रहा है।
नोएडा में कई मजदूरों को 151 के तहत गिरफ्तार किया गया था जो शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी संभावित अपराध को रोकने के लिए की जाती है। यह भी मजदूरों की आवाज को दबाने के लिए किया गया है जिससे वे अब डर कर वापस अपने गांव की तरफ जा रहे हैं। बेल पर छूटे और धारा 151 की गिरफ्तारी से लौटे मजदूरों से कंपनी मालिक जबरन इस्तीफे लिखवा रहे हैं। उन्हें काम पर नहीं रखा जा रहा है। नोएडा में लगभग 1100 मजदूरों को गिरफ्तार किया गया जिसमें बड़ी संख्या में 17 साल से कम के बच्चे और महिलाएं थीं। गिरफ्तारी के बाद मजदूरों के परिवारों का उत्पीड़न किया गया। गिरफ्तार मजदूरों के साथ प्रशासन ने पशुवत व्यवहार किया। लेकिन इस सबके बावजूद मजदूरों के हौंसले नहीं टूटे हैं वो आज भी अपने हक के लिए आवाज उठा रहे हैं।
भारतीय किसान यूनियन-एकता (उग्राहां) से कामरेड जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि कारपोरेट द्वारा लूट के खिलाफ मजदूर अभी बहुत कम संगठित हैं। याद रहे कि 2020-2021 में किसान आंदोलन की जीत में समाज के हर तबके ने भूमिका निभाई थी। वैसे ही आज मजदूर आंदोलन में सभी हिस्सों के शामिल होने की जरूरत है। देश के प्रधानमंत्री जहां एक तरफ देश को बड़ी आर्थिक शक्ति बोलते हैं वहीं दूसरी लाइन में वो बताते हैं कि देश की एक बड़ी आबादी को मुफ्त राशन बांटा जाता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। मजदूर सुई से जहाज तक बनाता है वो अपने अधिकार के लिए लड़ भी सकता है। सरकार द्वारा लागू श्रम संहिताओं ने मजदूरों से हड़ताल करने और यूनियन बनाने का हक छीन लिया है। आज जो मजदूरी मिल रही है वो मजदूरों के लिए जिंदा रहने के लिए काफी नहीं है और हमला सिर्फ मजदूरों पर नहीं, देश के हर मेहनतकश तबके पर हो रहा है।
हमारे देश के प्रधानमंत्री खुद कह रहे हैं कि देश में महंगाई की वजह से लाॅकडाउन की स्थिति बनने वाली है। सरकार भले ही आंदोलन का कितना दमन कर ले लेकिन आंदोलन अपने मुकाम तक पहुंचेगा क्योंकि मजदूर के पास गंवाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मजदूर आंदोलन के समर्थन में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा कार्यक्रम लिया जाएगा। जेल, थाने, अदालत उनकी हैं, इनसे टकराने के लिए आंखों में आंखें डालकर जीना सीखना होगा। कितनी भी रुकावटें क्यों न हों, लेकिन हमको बहादुरी से लड़ना सीखना होगा। हमारी ताकत बिखरी हुई है इसको इकट्ठा करने की जरूरत है, हमें संग-संग आना होगा।
आईआईएफटीयू (न्यू) से पी के शाही ने कहा कि आज मजदूर वर्ग के पास लड़ने के सिवाय कोई रास्ता नहीं है। स्थिति जहां पहुंची हुई है वहां पहले ही मजदूर का पूरा परिवार काम कर रहा है तब भी पेट नहीं भर रहा। ऐसी स्थिति में मजबूरी में मजदूर हड़ताल पर उतरा जिसके जवाब में मजदूरों का दमन किया जा रहा है। जो संकट बढ़ रहा है उसमें मजदूरों की स्थिति और खराब होगी, ऐसे में ट्रेड यूनियन नेतृत्व पर जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। यूनियनों को न सिर्फ मजदूर वर्ग को संगठित करना होगा बल्कि समाज के अन्य हिस्सों को भी संगठित करना होगा। आज का यह संकट पूरे समाज का संकट बन गया है इसलिए इस संघर्ष में सबको आगे आना होगा।
दिल्ली पीपल्स फोरम से अर्जुन प्रसाद सिंह ने कहा कि आज इस आंदोलन पर जो दमन हो रहा है वो सरकार का पुराना तरीका है। पुलिस द्वारा दंगे करवा कर उसका इल्जाम मजदूरों पर थोप दिया जाता है। आज सवाल यह है कि मजदूर खुद को संगठित कैसे करेगा और अपनी मुक्ति का संघर्ष आगे बढ़ाना होगा तभी हम दमन से मुक्ति पा सकते हैं।
मजदूर एकता कमिटी से संतोष ने कहा आज देश में मजदूर-मेहनतकश के श्रम की लूट जारी है। इस लूट से देश के पूंजीपति दुनिया के सबसे बड़े धनाढ्यों में शामिल हो चुके हैं। इसके बदले वो मजदूरों को भुखमरी वेतन तक देने के लिए तैयार नहीं हैं।
इफ्टू से अनिमेष ने कहा कि बरौनी से शुरू हुआ यह उभार फैलते-फैलते आज देश के कई राज्यों में पहुंच गया है। यह उभार मजदूरों के इस निर्णय को दिखाता है कि अब मजदूर ने भागने के बजाय लड़ना चुना है। आन्दोलन ने दमन को जन्म दिया और नोएडा से मानेसर तक मजदूरों और मजदूर कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। लेकिन दमन जितना बढ़ेगा आंदोलन उतना तेज होगा।
अलग-अलग संगठनों से आये वक्ताओं ने मासा की इस मुहिम को अपना समर्थन दिया और जोर देकर कहा कि दमन के खिलाफ संयुक्त आन्दोलन की जरूरत महसूस हो रही है जिसे आगे बढाया जाना चाहिए। हम सभी के सामने सवाल है कि मौजूदा मजदूर आन्दोलन को एकजुट और वर्गीय चेतना से लैस कैसे करें? इस कार्यभार में ही भविष्य की सफलताओं के बीज छिपे हुए हैं।
इन वक्ताओं के अलावा, कन्वेंशन को जागृत आदिवासी दलित संगठन की माधुरी, समाजवादी लोक मंच से मुनीष कुमार, मजदूर पत्रिका से संतोष, पीयूसीएल से सीमा आजाद, क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा से सत्यवीर सिंह, वरिष्ठ मानवाधिकार कार्यकर्ता नरभिंदर सिंह, टीयूसीआई से विमल, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र से नीता, अग्रगामी छात्र नौजवान सभा से अमित बेरा, आईसीटीयू से नरेंदर, बेलसोनिका यूनियन से अजीत, मजदूर एकता केंद्र से भीम और ग्रामीण सफाई कर्मचारी यूनियन से सुभाष चन्द्र ने संबोधित किया।
इंकलाबी मजदूर केंद्र, मजदूर संघर्ष संगठन और पछास के कार्यकर्ताओं ने क्रांतिकारी गीत पेश किये। श्रोताओं के नारे से सभा भवन गूंज उठा।
मासा की ओर से सेंटर फाॅर स्ट्रगलिंग ट्रेड यूनियंस के मुकुल ने कन्वेंशन का समापन वक्तव्य दिया। कन्वेंशन का संचालन मजदूर संघर्ष संगठन के विक्रम प्रताप, जन संघर्ष मंच हरियाणा के सोमनाथ और बीएनएएमयू के अनिरुद्ध ने किया।
कन्वेंशन में हरिद्वार सिडकुल में इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ताओं पर गुंडा एक्ट की कार्यवाही के विरोध में प्रस्ताव पास किया गया।
-दिल्ली संवाददाता