15 अप्रैल की दोपहर को छत्तीसगढ़ में सक्ति जिले में सिंघितराई गांव में वेदांता के पावर प्लांट में विस्फोट होने से 14 मज़दूरों की मौत हो गयी है। इसके अलावा 20 अन्य मज़दूर घायल हो गये। यह विस्फोट बायलर से भाप के जाने वाली हाई प्रेसर ट्यूब में हुआ।
यह घटना दिखाती है कि फैक्ट्रियों में किस तरह सुरक्षा नियमों में ढील दी जा रही है। फैक्टरी प्रबंधन द्वारा फैक्ट्रियों में सुरक्षा मानकों में ढिलाई देने, उस पर खर्चा न करने का परिणाम दुर्घटनाओं के रूप में सामने आता है।
इस घटना पर प्रधानमंत्री मोदी ने "गहरा दुख" व्यक्त करते हुए मरने वाले मज़दूर के परिवार को 2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देने की घोषणा की है।
मज़दूर मर जाता है और सरकार 2 लाख रुपया देकर सो जाती है। फैक्टरी चलती रहती है। न तो दुर्घटनाओं की जांच होती है न किसी को इन मौतों के लिए सजा मिलती है।