
मानेसर(गुड़गांव)/ एजी फैक्टरी में स्थाई श्रमिकों की छंटनी की प्रक्रिया वर्ष 2022 से जारी है। इस समय फैक्टरी में केवल 48 मजदूर स्थाई व लगभग 300 श्रमिक ठेका मजदूर हैं। वर्ष 2022 में एजी फैक्टरी में 147 स्थाई श्रमिक थे।
एजी फैक्टरी, मारुति व होण्डा जैसी मदर कम्पनियों के लिए कल-पुर्जे बनाने का काम करती है। एजी फैक्टरी के हरियाणा में गुड़गांव, मानेसर, धारूहेड़ा व बावल में प्लांट हैं तथा केवल मानेसर के प्लांट में ही यूनियन है। एजी फैक्टरी की यूनियन एच.एम.एस. ट्रेड यूनियन सेंटर से सम्बद्ध है।
वर्ष 2022 से एजी फैक्टरी का प्रबंधन स्थाई श्रमिकों की छंटनी करने पर लगा हुआ है। वर्ष 2020 से यूनियन का तीन साल का सामूहिक मांग पत्र लम्बित है तथा यह अब लेबर कोर्ट गुड़गांव में लम्बित है। लेकिन प्रबंधन चार वर्ष बीत जाने के बाद भी सामूहिक मांग पत्र पर कोई समझौता करने को तैयार नहीं है। यूनियन ने दूसरा तीन साल का समझौता श्रम विभाग में अप्रैल 2024 से डाल रखा है जिस पर प्रबंधन का कहना है कि प्रबंधन 6 वर्ष का समझौता करेगा तथा 6 वर्ष के लिए वह सिर्फ 5500 रुपये की बढ़ोत्तरी करेगा। इसके अलावा वह अन्य किसी भी चीज में कोई बढ़ोत्तरी नहीं करेगा।
एजी प्रबंधन ने वर्ष 2022 में स्थाई श्रमिकों की छंटनी करने के लिए मानेसर फैक्टरी में कुछ लाइनों के उत्पादन को बंद करके गुड़गांव, धारूहेड़ा व बावल शिफ्ट कर दिया और मानेसर प्लांट में ले ऑफ दिखा कर 48 स्थाई श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। उसके बाद प्रबंधन ने 51 श्रमिकों का तबादला गुजरात, चेन्नई व हरिद्वार कर दिया। जब इन श्रमिकों ने तबादले का विरोध किया तो इन श्रमिकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया। प्रबंधन ने ले ऑफ व तबादला कर लगभग 100 श्रमिकों को बाहर निकाल दिया था। जिसमें से प्रबंधन ने लगभग 83 श्रमिकों को वी.आर.एस. देकर मामले को रफा-दफा कर दिया। इन बाहर निकाले गए श्रमिकों में यूनियन बॉडी के सात पदाधिकारी भी शामिल थे।
वर्ष 2022 में प्रबंधन ने यूनियन के प्रधान व महासचिव को वी.आर.एस. देकर छंटनी को सफल कर दिया। 17 अगस्त 2023 को श्रम विभाग की मध्यस्थता में यूनियन व प्रबंधन के मध्य समझौता हुआ जिसमें कि 17 श्रमिकों को काम पर वापिस ले लिया गया लेकिन प्रबंधन ने श्रमिकों के ऊपर शर्तें थोप दीं। जिसमें कि इन 17 श्रमिकों का तबादला हरियाणा के अन्य प्लांटों में कर दिया। यूनियन के महासचिव का तबादला भी कर दिया। बाकी किसी भी मुद्दे पर बात करने से प्रबंधन ने मना कर दिया। यूनियन ने एच.एम.एस. के नेता से ऐसा समझौता करने पर एतराज जताया तो एच.एम.एस. के नेता ने कहा कि आप अभी जाओ आगे ठीक हो जाएगा।
प्रबंधन ने यूनियन के महासचिव का तबादला भी कर दिया। जिसके कारण यूनियन के महासचिव की यूनियन की सदस्यता को भी खारिज करवा दिया तथा यूनियन के प्रधान व महासचिव को आरोप पत्र देकर उनकी जांच कार्यवाही की जा रही है। प्रबंधन इन 48 स्थाई श्रमिकों को फैक्टरी में रखने के लिए भी तैयार नहीं है। प्रबंधन इन 48 श्रमिकों की छंटनी करना चाहता है। एजी प्रबंधन यूनियन को खत्म करना चाहता है। यूनियन की स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि वह प्लांट में प्रबंधन का विरोध करने की स्थिति में नहीं है। क्योंकि यूनियन ने उन 300 ठेका श्रमिकों को लम्बे समय से छोड़ रखा है। ‘‘यूनियन तो केवल स्थाई श्रमिकों की होती है’’ के मालिकों के तर्क को यूनियन स्वीकार कर अपनी वर्गीय एकता का रास्ता छोड़ चुकी थी। आज जब यूनियन के ऊपर प्रबंधन का छंटनी का हमला हो रहा है तो यूनियन इस हमले का मुकाबला करने की स्थिति में नहीं है। वहीं दूसरी तरफ एच.एम.एस., यूनियन को वर्गीय एकता बनाकर संघर्ष करने की बजाय ‘‘जो मिल रहा है उसे लेने’’ की बात कर रहा है। आज जब यूनियन के अस्तित्व पर ही खतरा मंडरा रहा है तो एच.एम.एस. संघर्ष की बजाय पलायन का रास्ता यूनियन को बता रहा है। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों का यह चरित्र एजी फैक्टरी के मजदूरों के साथ अन्य मजदूरों को भी समझाना होगा।
एक फैक्टरी के भीतर मजदूरों की वर्गीय एकता बनाकर संघर्ष करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता न तो इस यूनियन के पास है और ना ही किसी दूसरी यूनियन के पास। क्योंकि छंटनी के हमले सभी फैक्टरियों के स्थाई मजदूरों के ऊपर हो रहे हैं और यह हमले लेबर कोड्स की रोशनी में हो रहे हैं। केन्द्रीय ट्रेड यूनियनें संघर्ष के रास्ते को छोड़कर ‘‘मालिकों के साथ मिलकर चलो की नीति’’ अपना चुकी हैं। लेबर कोड्स के खिलाफ केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों से प्रतिरोध की आशा पालना बेमानी होगी। लेबर कोड्स व छंटनी के खिलाफ मजदूरों को फैक्टरी स्तर पर वर्गीय एकता बनाकर तथा इलाकाई एकता बनाकर लड़ना होगा।
यह पहल वर्ग सचेत मजदूरों को करनी होगी। -मानेसर संवाददाता