पेरिस कम्यून दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन

Published
Wed, 04/01/2026 - 15:50
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18 मार्च, 1871 को फ्रांस की राजधानी पेरिस में मजदूरों ने अपना पहला राज कायम किया था, जो कि मानव इतिहास के गौरवशाली पन्नों में ‘‘पेरिस कम्यून’’ के नाम से दर्ज है। फ्रांस और प्रशा (जर्मनी) के पूंजीवादी शासकों ने भले ही पेरिस कम्यून को खून में डुबोकर इसका अंत कर दिया परन्तु महज 72 दिनों के मजदूरों के इस पहले राज के सबक आज भी क्रांतिकारी आंदोलन के लिये बेहद महत्वपूर्ण बने हुये हैं। क्रांतिकारी संगठन प्रतिवर्ष पेरिस कम्यून दिवस पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन कर शहीद कम्यूनार्डों को अपना सलाम पेश करते हैं। 
    
दिल्ली की शाहबाद डेरी में इस मौके पर क्रांतिकारी संगठनों द्वारा प्रभात फेरी निकाली गई। इस दौरान पेरिस कम्यून के शहीदों को याद करने के साथ ईरान पर जारी साम्राज्यवादी हमलों का भी विरोध किया गया।
    
फरीदाबाद में पेरिस कम्यून दिवस पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा आयोजित इस विचार गोष्ठी के दौरान वक्ताओं ने कहा कि पेरिस कम्यून ने धर्म को राज्य से अलग कर इसे व्यक्ति का निजी मामला बना दिया था; और जनता की अपेक्षाओं पर खरे न उतरने वाले जन प्रतिनिधियों को वापस बुलाने का अधिकार भी जनता को दिया था। मजदूरों का यह पहला राज वास्तव में एक जनतान्त्रिक शासन था। 
    
हरिद्वार में इस अवसर पर इंकलाबी मजदूर केंद्र द्वारा सुबह प्रभात फेरी निकाली गई और दिन में एक परिचर्चा आयोजित कर पेरिस कम्यून के घटनाक्रम और सबकों पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि पेरिस कम्यून ने सभी अधिकारियों, मंत्रियों और मजदूरों का वेतन लगभग बराबर कर वास्तविक समानता कायम की थी।
    
काशीपुर में पेरिस कम्यून दिवस पर मजदूर बस्ती हिम्मतपुर में एक सभा का आयोजन किया गया। सभा में वक्ताओं ने अमेरिकी साम्राज्यवादियों द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध की चर्चा करते हुये कहा कि जब तक साम्राज्यवाद है तब तक मानवता को युद्ध की विभीषिका से मुक्ति नहीं मिल सकती।     -विशेष संवाददाता

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