मोदी और भागवत के मुंह में दही जम जाना

Published
Wed, 07/01/2026 - 15:50
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हमारे देश में धर्म, राष्ट्रवाद, नैतिकता, संस्कृति, संस्कार आदि के दो सबसे बड़े ठेकेदार हैं। एक श्रीमान मोदी जी हैं जो देश की सरकार चलाते हैं और अपनी पार्टी के अघोषित सर्वेसर्वा हैं। दूसरे श्रीमान मोहन भागवत हैं जो कथित राष्ट्रवादी, सांस्कृतिक संगठन आर एस एस के प्रमुख हैं। इन दोनों महानुभावों के अलावा और भी कई छोटे-बड़े ठेकेदार हैं परन्तु देश में फिलहाल इन दोनों की ही तूती बोलती है। 
    
पिछले दिनों ऐसा बहुत कुछ देश में हुआ कि धर्म, राष्ट्रवाद, नैतिकता, संस्कृति व संस्कार के इन दोनों सबसे बड़े ठेकेदारों को जब खुलकर बोलना चाहिए था तब इनमें मुंह में दही जम गयी। 
    
पहली घटना राम मंदिर में करोड़ों रुपये की चोरी नहीं डकैती से संबंधित है। इस घटना में करोड़ों रुपये की डकैती करने वाले संघ की महान धार्मिक-सांस्कृतिक-संस्कारी पाठशाला में पले-बढ़े थे। एक भी ऐसा नहीं था जिसकी संस्तुति संघ ने न की हो। चंपत राय नाम के सज्जन को ही नहीं ट्रस्ट के सर्वेसर्वा नृपेन्द्र मिश्रा को बचाने के लिए सारी कवायद इतने खुले ढंग से होने लगी कि जांच का मतलब कुल मिलाकर कुछ खटमलों को मारना भर रह गया। देश के दोनों बड़े ठेकेदार जब-तब बात-बात पर नैतिक, धार्मिक उपदेश देने लगते हैं इस मामले में तुरंत गूंगे-बहरे बन गये। 
    
दूसरी घटना अमेरिकी सेना द्वारा तीन निर्दोष भारतीय नागरिकों की निर्मम हत्या से संबंधित है। इस मामले में भी राष्ट्रवाद के दोनों महान ठेकेदार चुप लगा गये। मानो तीनों भारतीय भारत के रहने वाले न होकर पाकिस्तान या बांग्लादेश के हों जिनकी हत्या से भारत को कोई फर्क नहीं पड़ता हो। बात-बात पर राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाने वाले इन दोनों महानुभावों के मुंह से दो शब्द भी नहीं निकले। जब राष्ट्रवाद के सूरमा कुछ नहीं बोले तो उनके दो टके के चेले, अन्धभक्त क्या बोलते। 
    
तीसरी घटना सत्ता में बैठकर परिवारवाद, भाई-भतीजावाद, भ्रष्टाचार से जुड़ी है। हर वक्त माथे मेें टीका लगाये रखने वाले मध्य प्रदेश के धार्मिक-प्रपंची मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मुख्यमंत्री बनते ही अरबों रुपये का जमीन घोटाला कर डाला। बात-बात पर भ्रष्टाचार, परिवारवाद, भाई-भतीजावाद के खिलाफ जंग का ऐलान करने वाले दोनों बड़े ठेकेदारों के मुंह में अलीगढ़ी ताला लगा गया। देश की सरकार का प्रमुख और संघ प्रमुख दोनों चुप्प। 
    
ऐसी अनगिनत घटनाओं की सूची बनायी जा सकती है जहां दोनों महानुभावों को सांप सूंघ जाता है। धर्म, राष्ट्र, नैतिकता, संस्कृति, संस्कार, चाल, चरित्र, चेहरा यानी सब कुछ दूसरों को सुनाने को ही होता है। 

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