हूतियों से अपनी भद पिटवाते साऊदी शासक

Published
Fri, 10/16/2026 - 07:50
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साऊदी अरब व यमन के हूती विद्रोहियों के बीच लड़ाई तेज होती जा रही है। जहां साऊदी अरब व यमन की कठपुतली सरकार की सेनाएं हूती विद्रोहियों के इलाके में बमबारी कर रही हैं वहां हूतियों ने साऊदी अरब की नाक में दम किया हुआ है। वे आये दिन साऊदी अरब की राजधानी रियाद में हमले कर रहे हैं। और उसके तेल रिफाइनरी व पाइप लाइन को गहरा नुकसान पहुंचा रहे हैं। 
    
खाड़़ी के देशों में साऊदी अरब अपने तेल भण्डारों के कारण सबसे धनी देश है। यहीं पर इस्लाम धर्म के पवित्र स्थान मक्का और मदीना स्थित हैं। साऊदी अरब में साऊदी शासकों का निरंकुश राज्य है। उसने अपने पड़ोसी देश यमन पर अपना नियंत्रण कायम रखने के लिए लगातार प्रयास किये हैं। यमन के उत्तरी हिस्से में अंसारउल्लाह जिन्हें हूतियों के नाम से भी जाना जाता है, का शासन हैै। यमन के दक्षिणी हिस्से पर साऊदी समर्थक सत्ता में हैं। 2014 से साऊदी अरब के नेतृत्व में बने अंतर्राष्ट्रीय गठबंधन के विरुद्ध अंसारउल्लाह (हूती) यमन में युद्ध चला रहा था। 
    
2016 में राजधानी सना के एक हाल पर साऊदी अरब द्वारा बमबारी करके 1000 से ज्यादा लोगों की हत्या कर दी गयी थी। तब से यमन पर आर्थिक नाकेबंदी के चलते हजारों-लाखों लोग कुपोषण, भुखमरी, दवाओं के अभाव के कारण मारे गये। 2022 में संयुक्त राष्ट्र संघ की मध्यस्थता में युद्ध विराम हुआ। इससे साऊदी हमले तो रुक गये लेकिन नाकेबंदी जारी रही। यमन में लोग भूख, कुपोषण और दवाओं के अभाव में मरते रहे। यमन में हूतियों का प्रभाव इस सबके बीच बढ़ता गया। 
    
इस वर्ष जब एक विमान सना हवाई अड्डे पर उतर रहा था तो उसी समय हवाई अड्डे पर साऊदी अरब द्वारा हवाई हमला किया गया। उस जहाज में कुछ बीमार लोग और कुछ खामनेई के शोक कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोग वापस सना आ रहे थे। एक और हवाई अड्डे पर हमला किया गया। तब से अब तक नागरिक आबादी के इलाकों में साऊदी अरब द्वारा 2000 से अधिक हवाई हमले किये गये हैं और ये हमले आज भी जारी हैं। 
    
इसके जवाब में अंसारउल्लाह की सेना ने साऊदी अरब के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे और तेल संयंत्रों के ठिकानों पर बमबारी की है। दक्षिणी यमन की साऊदी समर्थक सरकार और उत्तर यमन की हूती सरकार की सेनाओं के बीच गृहयुद्ध तेज हो गया है। इस गृहयुद्ध में साऊदी समर्थक यमनी सरकार के सैकड़ों सैनिक मारे गये या घायल हुए हैं। अंसारउल्लाह की सेना नये इलाकों को जीत रही है। इसने बाब अल मंदेब के इर्द गिर्द के इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
    
अंसारउल्लाह ने साऊदी अरब के तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगा दिये हैं। साऊदी अरब अब अदन की खाड़ी से बाब अल मंदेब होकर लाल सागर तक नहीं पहुंच पायेंगे। ईरान द्वारा होरमुज जल डमरूमध्य के रास्ते को बंद करने के बाद साऊदी अरब के पास बाब अल मंदेब का वैकल्पिक रास्ता था, इसे हूतियों ने बंद कर दिया। इसके साथ ही हूतियों ने ईस्ट-वेस्ट पाइप लाइन को भी नष्ट कर दिया। इस पाइप लाइन के जरिये साऊदी अरब अपना तेल देश के पूर्वी हिस्से से लेकर पश्चिम में लाल सागर तट तक ले जाता था। यह भी बंद हो गया। अब क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अपनी जान बचाने के लिए अपने शाही महल के एक बंकर से दूसरे बंकर तक भारी सुरक्षा के घेरेबंदी में रहने को मजबूर हैं। 
    
इस समय बड़ी तबाही को झेल रहे साऊदी अरब की मदद करने में अमरीकी साम्राज्यवादी भी आनाकानी कर रहे हैं। ट्रम्प ने कहा है कि साऊदी अरब खुद अपनी रक्षा कर सकता है। अब साऊदी अरब के शासकों को अमरीकी साम्राज्यवादियों को अपनी सुरक्षा देने की गारण्टी का भी खुलासा हो गया है। साऊदी अरब के पास वायु रक्षा प्रणाली की कमी हो गयी है। वह सभी से वायु रक्षा प्रणाली मांगने की गुहार कर रहा है। उसने पाकिस्तान और तुर्की के साथ नाटो की तर्ज पर एक सुरक्षा समझौता कर रखा है। हो सकता है कि तुर्की और पाकिस्तान साऊदी अरब की मदद में आयें। लेकिन उनको भी यह खतरा साफ-साफ दिख रहा है कि हूती लोग इस इलाके में प्रतिरोध की धुरी के अहम हिस्से हैं। इस प्रतिरोध की धुरी के केन्द्र में ईरान की सत्ता है। यह प्रतिरोध की धुरी गाजा में हमास और अन्य संगठन, लेबनान में हिजबुल्ला और इराक व सीरिया के अंदर मौजूद अन्य प्रतिरोध संगठनों की संयुक्त साझेदारी से बना है। क्या तुर्की और पाकिस्तान साऊदी अरब की मदद में जाकर ईरान के विरोध में खड़े होने का जोखिम उठायेंगे? इसकी संभावना कम दिखाई पड़ती है। तुर्की और पाकिस्तान के युद्ध में कूदने पर इन  देशों के भीतर किस्म-किस्म के सवाल खड़े हो जायेंगे। पहले से ही मुसीबतों में घिरे शासक नयी मुसीबतों में फंस जायेंगे। तुर्की यद्यपि सुन्नी बहुल देश है परन्तु पाकिस्तान में शिया आबादी ठीक-ठाक है। और फिर पाकिस्तान का पड़ोसी देश ईरान शिया बहुल है। और हूती भी शिया हैं। 
    
होरमुज जल डमरूमध्य के बंद होने से दुनिया में तेल का संकट पहले से है। पहले ही साऊदी अरब का तेल उत्पादन कम हो गया था। अब बाब अल मंदेब की नाकाबंदी से साऊदी अरब का तेल उत्पादन और कम हो गया है। इसके अतिरिक्त अरामको तेल संयंत्रों पर लगातार हूतियों के हमलों के कारण इसके तेल उत्पादन में फिलहाल भारी गिरावट आयी है। साऊदी अरब की अर्थव्यवस्था गिरावट की ओर जा रही है। मोहम्मद बिन सलमान की 2030 की महत्वाकांक्षी योजना पहले ही खटाई में पड़ गयी है। मोहम्मद बिन सलमान की योजना रही है कि साऊदी अरब की अर्थव्यवस्था को सिर्फ तेल पर निर्भर न रहकर इसे विविध क्षेत्रों में विस्तारित किया जाये। वह रियाद और अन्य नये शहरों को बसाकर इसे पर्यटन केन्द्र के तौर पर विकसित करने की योजना रखते थे। ये सारी योजनायें धरी की धरी रह जाने का खतरा बढ़ गया है। अंतर्राष्ट्रीय निवेशक साऊदी अरब में निवेश करने से कतरा रहे हैं। बार-बार हवाई अड्डों पर बमबारी के कारण पर्यटक आने में हिचक रहे हैं। साऊदी अरब में मौजूद दूसरे देशों के लोग वहां से लौटने का इंतजार कर रहे हैं। 
    
इधर साऊदी अरब के विदेश मंत्री ने ईरान के विदेश मंत्री से बात करके उनसे हूती लोगों के मामले में मदद की अपील की। ईरान के विदेश मंत्री अरागची ने कहा कि साऊदी अरब और यमन के मसले को राजनयिक तरीके से हल किया जा सकता है। सैन्य तरीका कोई समाधान नहीं है। राजनयिक तरीके से हल करने में ईरान ने मदद की पेशकश की है। 
    
अब साऊदी अरब के शासकों को भी समझ में आ रहा है कि अमरीकी साम्राज्यवादियों की छतरी उनकी कोई मदद नहीं कर सकती। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा संगठन बनने में मददगार होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है। 
    
फिर भी, साऊदी अरब एक क्षेत्रीय बड़ी ताकत है। उसे यमन जैसे छोटे व कमजोर देश से मात खानी पड़ रही है, यह उसे स्वीकार नहीं है। इससे उसकी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को धक्का लग रहा है। 

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