छात्रों-मजदूरों ने उठाई न्याय के लिए आवाज

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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दिल्ली/ 7 सितंबर को जब दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में एक इमारत के गिरने से मारे गए छात्रों को न्याय दिलाने और दिल्ली सरकार व दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए जा रहे थे, उसी दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के परिसर में एक मजदूर रंजीत कुमार गौतम, जिनकी उम्र महज 34 वर्ष थी, की मृत्यु हो गई। रंजीत कुमार गौतम साउथ कैंपस के परिसर में मैसर्स एक्सीलेंट होम्स एंड गार्डेंस कम्पनी (M/S Excellent Homes and Gardens) के तहत माली के रूप में कार्यरत थे, जबकि उनसे बिजली का काम भी कराया जाता था। 7 सितंबर को जब रंजीत काम कर रहे थे, तो काम के दौरान ही लगभग 4 बजे उन्हें बिजली की तार से करंट लगा और वह वहीं पर बेसुध होकर गिर पड़े। बिजली का खतरनाक काम करते समय उनके पास न तो सुरक्षा उपकरण थे और न ही उनके साथ में अन्य कोई कर्मचारी था। कुछ समय बाद जब कुछ कर्मचारी उस घटना स्थल पर पहुंचे तो उन्हें रंजीत बेहोश पड़ा मिला। वह उसे पास के ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ले गए और उसके बाद चरक पालिक अस्पताल ले गए। जहां डाॅक्टर ने रंजीत को मृत घोषित कर दिया गया।  इस समय तक न तो परिवारजनों को और न ही पुलिस को सूचना दी गई थी। यह घटना दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन पर संदेह खड़ा करती है। जब घटना लगभग 4 बजे की थी तो उन्हें लगभग 5 बजे अस्पताल, इतनी देर से क्यों ले जाया गया, इस समय तक परिवारजन व पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया। 
    
यह सारी बातें दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रशासन व सुरक्षा अधिकारियों पर संदेह पैदा करती हैं कि इस घटना को रफा-दफा करने के लिए प्रशासन ने इतनी देर लगाई। 
    
जब इस घटनाक्रम की जानकारी पास में ही सत्य निकेतन में गिरी इमारत और उसमें मारे गए छात्रों को न्याय दिलवाने और दिल्ली सरकार और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन की जवाबदेही के लिए प्रदर्शन कर रहे छात्रों तक पहुंची तो परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ता और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस में पढ़ रहे छात्रों ने रंजीत की दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के प्रशासन की गैर जिम्मेदाराना और लापरवाही के कारण हुई हत्या के खिलाफ प्रदर्शन किया और रंजीत को न्याय दिलाने की मांग की।
    
श्री राम जे जे कैंप नानकपुरा, (जहां रंजीत रहते थे) से रंजीत के जानकार पहुंच गए और न्याय की इस लड़ाई में शामिल हो गए। प्रदर्शन के दबाव में रात लगभग 10ः00 बजे FIR लिखी गई। छात्रों और मजदूरों ने 1. दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन पर जिम्मेदारी व जवाबदेही तय करने  2. रंजीत की पत्नी को नौकरी देने की और 3. रंजीत के आश्रितों को 25 लख रुपए मुआवजा देने की  मांग उठाई। रात भर छात्र और मजदूर रंजीत को न्याय दिलाने की लड़ाई में लगे रहे पर दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन अपनी जवाबदेही और जिम्मेदारियों से बचता रहा। रात लगभग 3 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस प्रशासन को छात्र और मजदूरों के सामने झुकना पड़ा और तीनों मांगों को मानने के संदर्भ में उसने एक पत्र दिया।
    
सुबह के समय रंजीत के माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी जो कि गांव में थे, आ गए। रंजीत के परिवार में माता-पिता, दादा भाई और पत्नी हैं। रंजीत परिवार में एकमात्र कमाने वाला था। रंजीत की पत्नी अभी 4 महीने की गर्भवती है। परिवार वालों का रो रो कर हाल बेहाल था। उनकी माताजी और पत्नी बेसुध हो जा रही थी। 
    
सुबह तक पता चला कि दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस द्वारा जो पत्र दिया गया था जिसे कहा जा रहा था कि मांगें मान ली गई हैं वह मात्र आश्वासन पत्र है। जिस पर विचार करने के लिए आगे भेजा जाएगा। FIR में भी हल्की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया।
    
सुबह के समय बस्ती में इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता और पी यू डी आर के प्रतिनिधि भी पहुंच गए। परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ता तो रात से ही यहां मौजूद थे।
    
रंजीत के पिताजी भाई, जीजा और परिवार के अन्य जनों के साथ बातचीत की गई और सभी बातों पर गौर करते हुए नए सिरे से एक मांग पत्र और थ्प्त् के लिए पत्र लिखा गया।
    
नये मांग पत्र में 1. घटना की जल्द से जल्द जांच कर कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई 2. रंजीत की पत्नी को दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस में सरकारी नौकरी 3. नौकरी  लगने तक रंजीत की गर्भवती पत्नी व परिवार के भरण-पोषण का खर्च विश्वविद्यालय प्रशासन वहन करे। 4. रंजीत परिवार का मात्र एक कमाने वाला था और उनकी पत्नी गर्भवती है, अतः रंजीत को एक करोड रुपए मुआवजा दिया जाए। 5. FIR में लापरवाही से मौत की जगह गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा लगाया जाए।
    
इन मांगों को लेकर रंजीत के परिवार माता-पिता, भाई-बहन, पत्नी समेत बस्तीवासी जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के गेट पर पहुंच गए। परिवर्तनकामी छात्र संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के कार्यकर्ता भी साथ थे। कार्यकर्ताओं ने रंजीत को न्याय देने, रंजीत की मृत्यु पर मुआवजा देने और दोषियों को सजा दिलाने की मांगों के नारे लगाए। इस दौरान दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस में पढ़ रहे छात्र भी वहां पहुंच गए। लोग बहुत आक्रोशित थे। डायरेक्टर के गेट के बाहर खड़े होकर वह जोरदार तरीके से अपनी मांगें और दोषियों को सजा देने के नारे लगाते रहे।
    
इस दौरान रंजीत की मां-बहन और पत्नी बार-बार रोते-बिलखते रहे। वहां मौजूद बस्तीवासियों समेत छात्र और मजदूर भावुक हो गए पर विश्वविद्यालय प्रशासन के कान पर जूं तक न रेंगी। इस बीच SHO समेत पुलिस प्रशासन भी वहां पहुंच गया।
    
लगभग तीन-चार घंटे बाद प्रशासन ने एक प्रतिनिधिमंडल से मिलने की बात की। प्रतिनिधि मंडल से लगभग 1 घंटे तक बातचीत चली। बाहर आकर प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि प्रशासन का  रवैया मानवीयता और न्याय की बड़ी-बड़ी बातें करते हुए, टाल-मटोल करने वाला व सिर्फ कोरे आश्वासन देने वाला ही रहा। यहां तक कि जो मांग पत्र दिया गया था उसमें सिर्फ आश्वासन दिया और रिसीविंग ले ली गई। प्रशासन की मोहर तक उस पर नहीं लगाई।
    
इस पर बाहर खड़े छात्र-नौजवानों और बस्तीवासियों ने उप रजिस्ट्रार को घेर लिया और उनसे सवाल करने लगे। लगभग आधे घंटे तक उन्हें घेरे रखा और तीखी बहस होती रही। मजबूर होकर उप रजिस्ट्रार ने विश्वविद्यालय के लेटर पैड में सभी मांगों को लिख कर दिया और हस्ताक्षर के साथ मोहर भी लगाई और मांगों को जल्द से जल्द हल करने का आश्वासन दिया। 
    
रंजीत के परिवारवालों, बस्तीवासियों, छात्र- नौजवानों और मजदूरों की एकता से लड़ी गई इस लड़ाई में एक छोटी सी जीत मिली। इस लड़ाई में छात्रों ने नेतृत्वकारी भूमिका निभाई और सभी ने उनकी भूमिकाओं को सराहा। बस्तीवालों ने भी अच्छा साथ निभाया। सब एक राय पर थे कि यदि मांगों को नहीं माना गया तो रंजीत को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।
    
10 सितंबर को दिल्ली विश्वविद्यालय साउथ कैंपस के छात्रों ने रंजीत को याद करते हुए  परिसर में एक कैंडल मार्च निकाला। मार्च को समाप्त करते हुए एक छोटी सी सभा की जिसमें रंजीत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, प्रशासन की अव्यवस्थाओं पर चर्चा की। साथ ही रंजीत के लिए जल्द से जल्द न्याय मिलने की मांगों को दोहराया गया। -दिल्ली संवाददाता

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