हरिद्वार में मजदूर नेताओं और मजदूरों पर मुकदमा दर्ज
दिनांक 8 मई और 9 मई को हरिद्वार में पिलेट और हेमिल्टन कंपनी में वेतन वृद्धि के लिए मजदूर आंदोलन में इंकलाबी मजदूर केंद्रों के आदेश और मजदूरों को हरिद्वार पुलिस ने गठबंधन के साथ मिलकर साजिश के तहत फ़ोरिज़ी इंस्टिट्यूट ग्रुप में शामिल किया है।
माह अप्रैल में जब मानेसर नोएडा में वेतन वृद्धि का संकट आया तो हजारों की संख्या में मजदूर सड़क पर उतर आए। मजदूरों को न केवल न्यूनतम वेतन लागू करना बल्कि न्यूनतम वेतनमान में वृद्धि की भी मांग कर रहे थे। मजदूरों के संघर्ष की तपिश वैज्ञानिक उपेक्षा नहीं कर पायें। और उन्हें मजदूरों के वेतनमान में मामूली सी घोषणा करनी पड़ी। लेकिन साथ ही उन्होंने मजदूरों का दमन भी किया। कई मजदूर नेताओं और हजारों मजदूरों को जेल में डाल दिया गया। अभी भी कई मजदूर और श्रमिक नेता जेल में हत्या के प्रयास में जेल में बंद हैं। हरियाणा और योगी सरकार की मान्यता पर ठीक ऐसा ही व्यवहार अब उत्तराखंड की धामी सरकार कर रही है। उन्होंने इंकलाबी मजदूर केंद्र के आदेश के साथ 15 मजदूरों पर मुकदमा दर्ज कराया है।
लेकिन घटकपति वर्ग और उसकी सरकार बार-बार यह भूल जाती है कि दमन से कभी मजदूर आंदोलन नहीं होते। वे कुछ मजदूर नेताओं और मजदूरों को जेल में डाल सकते हैं, मई दिवस के शहीदों की तरह फाँसी पर लटका सकते हैं लेकिन एक वर्ग के बेकार मजदूर वर्ग अजेय हैं। मजदूर वर्ग हर दमन के बाद और बड़ी संख्या में मजदूरों को बलिदान देने की तैयारी करता है।
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