कर्नाटक: दुकान अधिनियम में महिला मजदूर विरोधी बदलाव

Published
Tue, 09/15/2026 - 22:47
/karnatak-dukan-adhiniyam-mein-mahila-workers-virodhi-badalav

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने हाल ही में दुकान अधिनियम में कुछ ऐसे बदलाव किये जो महिला मजदूरों की सुरक्षा को बुरी तरह प्रभावित करते हैं। साथ ही ये बदलाव 4 श्रम संहिताओं में महिला मजदूरों की सुरक्षा के नाम मात्र के प्रावधानों के भी खिलाफ हैं।

इस बदलाव से देश भर में खुद को मजदूरों की रहनुमा बताने वाली कांग्रेस का असली रुख समझा जा सकता है। कर्नाटक सरकार पूंजीपतियों को खुश करने के लिए मानो भाजपा सरकारों से मुकाबला सा कर रही है। क्योंकि ऐसा बदलाव अभी तक किसी भाजपा सरकार ने भी नहीं किया था।

किये गये बदलावों के तहत रात्रि की पाली में काम पर आने वाली महिलाओं की सुरक्षा व परिवहन सुविधा से जुड़े कई प्रावधान समाप्त कर दिये गये हैं। पहले प्रावधान था कि रात की पाली की महिलाओं के परिवहन का इंतजाम मालिक करेगा। व परिवहन के साधन के ड्राइवरों की पृष्ठभूमि की जांच, महिला कामगार के अनुरूप पिकअप व ड्रापरूट व गाड़ी की ट्रैकिंग का मालिक इंतजाम करेगा। अब किये गये बदलाव के तहत ड्राइवरों की जांच, पिकअप व ड्रापरूट कामगार के अनुरूप होने व ट्रैकिंग करने के प्रावधान हटा दिये गये हैं। यानी अब महिला कामगार के लिए आवागमन अधिक असुरक्षित बना दिया गया है। इसी तरह महिलाकर्मी को सबसे पहले पिकअप करने व सबसे बाद में ड्राप किये जाने पर रोक का प्रावधान था, अब इस प्रावधान को हटा दिया गया है।

पहले सुरक्षा गार्ड व पर्यवेक्षकों द्वारा आकस्मिक तौर पर वाहनों की जांच का प्रावधान था इसे भी हटा दिया गया है। पहले रात में यात्रा कर रही महिला कामगार की आकस्मिक मदद हेतु आपातकालीन तंत्र या नियंत्रण कक्ष सहायता का प्रावधान था जिसे अब हटा दिया गया है। पहले महिला कामगारों के फोन नं. व घर के पते अनाधिकृत कर्मियों से सुरक्षित रखने का प्रावधान था, अब इसे हटा दिया गया है।

इन बदलावों का आई टी सेक्टर की यूनियन ने महिला विरोधी कहते हुए विरोध किया है। वहीं सरकार व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के पंजीकरण को आसान करने के लिए इन बदलावों की वकालत कर रही है।

ये सभी बदलाव रात्रिकालीन ड्यूटी पर आ रही महिलाओं की सुरक्षा की प्रबंधन की जिम्मेदारी को कमजोर करते हैं। ये पहले से यौन हिंसा की शिकार हो रही महिलाओं को और हिंसा सहने की ओर धकेलते हैं।

कांग्रेस सरकार की बड़े प्रतिष्ठानों के मालिकों को खुश करने की नीति के तहत किये गये इन बदलावों का खामियाजा भविष्य में महिला कामगारों को उठाना पड़ेगा।

आलेख

/uddharak-ideology-ki-talaas

इस मजदूर आंदोलन की विचारधारा मार्क्सवाद का यह स्पष्ट कहना था कि महान फ्रांसीसी क्रांति के जमाने से ही पूंजीपति वर्ग ने अपने समाज के लिए जो आदर्श घोषित कर रखा है- स्वतंत्रता, समता, बंधुत्व का आदर्श- वह पूंजीवाद की निजी सम्पत्ति के कारण कभी भी हासिल नहीं किया जा सकता। पूंजी के रूप में निजी सम्पत्ति के रहते स्वतंत्रता का मतलब होगा बाजार में खरीद-बेच की स्वतंत्रता, समता का मतलब होगा बाजार में खरीददार व विक्रेता की समता तथा बंधुत्व का मतलब होगा खरीद-बेच की व्यवस्था पर सहमति।

/war-and-diplomacy-uthal-puthal-se-bhari-duniyaa

गाजापट्टी में इजरायल की कत्लेआम करने की मुहिम जारी है। इजरायली यहूदी नस्लवादी न तो किसी समझौते को मान रहे हैं और न ही वे अपनी विनाश लीला को रोक रहे हैं। वे नस्लीय सफाये की मुहिम चला रहे हैं। इसके जवाब में हमास और अन्य प्रतिरोध संगठन इजरायली कब्जाकारी सेना पर प्रहार कर रहे हैं। 

/amerika-ka-iran-par-operation-d-day-hatasha-ka-parinam

अपने व्यापक नुकसान को देखते हुए अमरीकी साम्राज्यवादियों ने अप्रैल महीने में युद्ध विराम किया और फिर पाकिस्तान की मध्यस्थता में एक ज्ञापन समझौता किया। इस ज्ञापन समझौते में अधिकांशतः ईरान की मांगें स्वीकार की गयीं। यह वस्तुतः अमरीका की पराजय थी। इस समझौते के थोड़े ही दिनों बाद अमरीका ने इसका उल्लंघन शुरू कर दिया। इजरायल ने एक भी दिन इस समझौते को नहीं माना।

/education-and-emplyoment-dasha-aur-durdasha

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अजीबोगरीब विरोधाभास नजर आता है। एक ओर उच्च शिक्षा में आई आई टी, एम्स और आई आई एम जैसे सरकारी संस्थान हैं जो क्रमशः इंजीनियरिंग, चिकित्सा और

/cocoroach-saradar-and-samajvadi-janataantrik-morcha

उदारवादी या वाम-उदारवादी अपनी प्रकृति से ही पूंजीवादी समाज के मूल अंतर्विरोधों को देखने में असमर्थ होते हैं। इसीलिए वे इसकी आम गति को देखने में असमर्थ होते हैं। उनका निजी सम्पत्ति, पैसे, प्रतियोगिता, इत्यादि में दृढ़़ विश्वास होता है। इनके बिना वे किसी समाज की कल्पना नहीं कर पाते। और ठीक इसी कारण वे यह नहीं देख पाते कि भ्रष्टाचार निजी सम्पत्ति, पैसा और प्रतियोगिता का अनिवार्य परिणाम है। कि इस समाज में भ्रष्टाचार को कानूनी वैधता प्रदान की जा सकती है, उसे खत्म नहीं किया जा सकता।