महात्मा बुद्ध की आड़़ में छुपते मोहन भागवत

Published
Wed, 09/16/2026 - 15:50
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बेचारे मोहन भागवत जी! अमेरिका में जाकर वह नहीं कह सके जो रोज उनके चेले शाखा या आफीसर्स ट्रेनिंग कैम्प (ओ टी सी) या अपनी गुप्त मीटिंगों में कहते हैं। मोहन भागवत को कहां तो हेडगेवार, सावरकर, गोलबलकर को याद करना था और कहां याद करने लगे महात्मा बुद्ध को। सनातन धर्म, सनातन संस्कृति, हिन्दू धर्म के महान ध्वजवाहक को एक वेद विरोधी, नास्तिक की याद आने लगी। कहने लगे कि भारत महात्मा बुद्ध का देश है। और आगे जाकर कहने लगे ‘‘अगर कोई हिंदू सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह हिंदू नहीं रहेगा’’ (29 अगस्त, न्यूयार्क)।
    
पुरानी कहावत है, ‘‘हाथी के दांत खाने के और व दिखाने के और’’। यह कहावत मोहन भागवत-मोदी एण्ड कंपनी पर ठीक से लागू होती है। मोहन, मोदी, योगी यानी कि इनमें से जो कोई विदेश जायेगा तो यही कहेगा। इन्हें विदेशों में शांति-अहिंसा की महात्मा बुद्ध की, ‘अनेकता में एकता’ वाली नेहरू की बातें ही याद आयेंगी। और यह भी ठीक ही जिस समय हाथी अपने दिखाने के दांत दिखा रहा था ठीक उसी समय वह अपने खाने के दांत से ‘भोजन’ भी चबा रहा था। उधर अभी भागवत का अमेरिका-यूरोप में महात्मा बुद्ध वाला प्रवचन बंद भी नहीं हुआ था इधर सहारनपुर में सौ साल पुरानी मस्जिद को कानून को धता बताते हुए योगी प्रशासन ने मिट्टी में मिला दिया। और मोहन भागवत के मुंह से एक शब्द तक विरोध में नहीं निकला। देश के भीतर अंगुलिमाल बने हुए संघी बाहर जाकर महात्मा बुद्ध का चोला ओढ़ लेते हैं। 
    
मोहन भागवत एण्ड कम्पनी का छल न्यूयार्क में भी उजागर हो गया। न्यूयार्क में मोहन भागवत की प्रवचन सभा में अन्य धर्म के नेताओं को यह कहकर धोखे से बुलाया गया कि वहां एक विशेष सामुदायिक सभा होगी। यह भी उन्हें नहीं बताया गया कि वहां संघ प्रमुख भागवत का सम्मान और उनका प्रवचन होगा। संघी अपनी फितरत से न्यूयार्क में बाज नहीं आया। जब गुरू महात्मा बुद्ध की आड़ ले सकते हैं तो चेले भी अन्य धर्म के लोगों को धोखा देकर अपने गुरू का प्रवचन सुना ही सकते हैं। वैसे भी संघी नीति है कि वह हर चीज अच्छी है जो संघ का काम आगे बढ़ाये। और ऐसा करने में इनके लिए झूठ, आडम्बर, छल आदि करने से भी पाप नहीं लगता है। 

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