8 मई को बिहार की राजधानी पटना में बी पी एस सी टी आर ई -4 के विज्ञापन को निकाले जाने की मांग कर रहे बेरोजगारों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। और इतना ही नहीं आगे से बेरोजगारों के आंदोलन न हों इसके लिए पुलिस ने आंदोलन के लिए 4 युवाओं को साजिशकर्ता बताते हुए जेल भेज दिया है। अभी हाल ही में नोयडा और मानेसर में फूटे मज़दूर संघर्षों में भी नेतृत्वकारी मज़दूर कार्यकर्ताओं को इसी तरह फ़र्ज़ी आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया है। अब अपने हकों के लिए जेल भेजना मोदी की पक्की गारंटी बन चुकी है। इसलिए बिहार सरकार ने 4 नामजद लोगों सहित कुल 5000 अज्ञात लोगों पर एफ आई आर दर्ज की है।
दरअसल मामला यह है कि बिहार लोक सेवा आयोग 2024 से चार विभागों में 46,882 पद निकालने की बात कर रहा है। हर बार तारीख़ तय होने से पहले ही टल जाती रही है। अभी आयोग ने यह घोषणा की थी कि 19 अप्रैल को विज्ञापन प्रकाशित होगा और 25-26 अप्रैल से फार्म भरने शुरु हो जाएंगे। लेकिन जब 8 मई तक भी विज्ञापन प्रकाशित नहीं हुआ तो बेरोजगारों का 2 साल का आक्रोश फूट गया और वे विज्ञापन को प्रकाशित करने की मांग को लेकर सड़क पर उतर आये। बदले में उन्हें पुलिस की लाठियां मिलीं।
जिन चार विभागों में नौकरी के लिए आवेदन होने हैं उनमें शिक्षा विभाग, पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग तथा अल्पसंख्यक कल्याण विभाग हैं। इनमें सर्वाधिक पद शिक्षा विभाग में ही हैं। इनमें प्राथमिक (1-5) में 10,778, मध्य विद्यालय (6-8) में 8,583, माध्यमिक विद्यालय (9-10) में 9,082 और उच्च माध्यमिक (11-12) में 16,774 पदों पर भर्ती होनी है।
मोदी राज में सरकारी नौकरी युवाओं के लिए अब एक दुस्वप्न बन चुकी है। अब तक बेरोजगारों पर केवल लाठीचार्ज ही होता था लेकिन अब आंदोलनों का अपराधीकरण किया जा रहा है। मोदी सरकार द्वारा बनाये गये तीन अपराधिक कानून इसमें अपनी पूरी भूमिका निभा रहे हैं।