अजित डोभाल के संघी बोल

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:02
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11 जनवरी को दिल्ली में भारत मंडपम में एक कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। कार्यक्रम था ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलाग’। इस कार्यक्रम में अजित डोभाल जो कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं, ने देश के युवाओं को सम्बोधित किया। और देश के युवाओं को उन्होंने भारत को फिर से विकसित और महान बनाने पर जोर दिया।
    
देश के युवाओं को सम्बोधित करते हुए अजित डोभाल ने कहा कि हमारा देश जैसा है वैसा हमेशा से नहीं था। इसको आजाद कराने में हमारे पूर्वजों ने काफी कष्ट सहे। इन पूर्वजों में उन्होंने भगत सिंह, सुभाष, महात्मा गांधी आदि का नाम लिया। यहां तक तो ठीक था लेकिन वे इससे आगे बढ़कर जो बोले तो ऐसा लगा कि उनके शरीर में मोहन भागवत की आत्मा प्रवेश कर गयी हो। अजित डोभाल ने कहा कि सदियों पहले हमारे पुरुखों पर बहुत जुल्म किये गये, हमारे मंदिर तोड़े और लूटे गये। उस समय हमारे पूर्वज असहाय थे। और अब युवाओं का यह कर्तव्य है कि वे इन सबका प्रतिशोध लें। वे अपने अंदर आग भरें। युवा अब भारत को विकसित और महान बनाएं। 
    
अब ये युवा किस तरह भारत को विकसित बनाएं, महान बनाएं इसका रास्ता अजित डोभाल ने नहीं बताया। चलिए मान लेते हैं कि अजित डोभाल का कहने का मकसद युवाओं को उच्च शिक्षा हासिल कर, ज्ञान विज्ञान से लैस होकर नई-नई खोजें कर देश को महान राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल करने से था। लेकिन जब ठेके और आउटसोर्स पर युवाओं को नौकरी पर रखा जा रहा हो, देशी-विदेशी कंपनियों का बंधुवा मजदूर बनाया जा रहा हो, तब देश के युवाओं से कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे देश को महान और विकसित बनाएंगे। 
    
जब अजित डोभाल प्रतिशोध के लिए युवाओं को ललकार रहे थे तो उनका आशय वही था जो आर एस एस प्रमुख मोहन भगवत, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल या भाजपा के बड़े-छोटे नेता बोलते हैं। वे जब मंदिरों के लूटने की बात करते हैं, हिंदू सभ्यता-संस्कृति के नष्ट होने की बात करते हैं तो उनका निशाना इस देश के अल्पसंख्यक खासकर मुसलमान और ईसाई होते हैं। हां, जब वे युवाओं को प्रतिशोध लेने की बात कर रहे थे तो अपने सहित उन तमाम नेताओं-अधिकारियों के बेटों के बारे में बात नहीं कर रहे थे जो विदेशों में बैठकर व्यापार कर रहे हैं, पढ़ाई कर रहे हैं या भारत में ही उच्च पदों पर हैं। (बताया जाता है कि अजित डोभाल के दो बेटे हैं जिनमें एक ब्रिटिश नागरिकता ले चुका है और दूसरा सऊदी अरब के सुल्तान की कम्पनी संभालता है।)
    
जब अजित डोभाल कार्यक्रम में प्रतिशोध लेने की बात करते हुए युवाओं को अपने अंदर आग जलाने की बात करते हैं तो वे उन युवाओं को सम्बोधित कर रहे होते हैं जो बेरोजगार हैं, जो अशिक्षित हैं, जिनके घर में दो वक्त का खाना नहीं है। आखिर इन युवाओं को कोई काम तो चाहिए ही सो ये युवा प्रतिशोध लेने के लिए उपयुक्त पात्र हैं। ये युवा कांवड यात्रा, राम नवमी, गणेश पूजा, नवरात्रि आदि आदि हिंदू त्यौहारों के अवसर पर प्रतिशोध लेने के लिए तैयार किये जा रहे हैं। उन्हें मस्जिदों और चर्चों के सामने अपनी फूहड़ता और नग्नता का प्रदर्शन करना सिखाया जा रहा है। बस अजित डोभाल को वह उपयुक्त समय बताना है जब इन्हें प्रतिशोध लेने के लिए जाना है। 
    
दरअसल जब अजित डोभाल देश के युवाओं को प्रतिशोध लेने के लिए तैयार कर रहे हैं तो वे युवाओं को भटकाने का प्रयास कर रहे हैं। पिछले दिनों में जिस तरह बांग्लादेश और खासकर नेपाल में जेन जी विद्रोह हुए हैं उससे भारतीय शासक वर्ग भयभीत है। युवा आबादी को हजारों साल पहले मंदिरों को लूटे जाने के नाम पर प्रतिशोध लेने के लिए तैयार कर उनके आज के मकसद यानी रोजगार पाने के उद्देश्य से भटकाना है। उनको एक छदम लक्ष्य देना है जिसका न तो आज कोई मतलब है और न सार्थकता। देश के युवाओं को अजित डोभाल के इन बयानों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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