जम्मू में मेडिकल कालेज बंद और हिंदूवादी संगठनों का जश्न

Published
Fri, 01/16/2026 - 07:04
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जम्मू में श्री वैष्णों देवी माता श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित मेडिकल कालेज श्री माता वैष्णों देवी इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल एक्सलेंस को नेशनल मेडिकल काउंसिल ने बंद करने का फरमान आखिरकार सुना ही दिया। नेशनल मेडिकल काउंसिल के इस फैसले के बाद जम्मू में हिंदूवादी संगठनों ने खुशी जताई, पटाखे फोड़े और मिठाई बांटी। ये हिंदूवादी संगठन नवंबर महीने से वैष्णों देवी संघर्ष समिति बनाकर इस कालेज को बंद करने के लिए संघर्ष चला रहे थे। 
    
दरअसल मामला यह था कि पिछले साल ही इस मेडिकल कालेज को एम बी बी एस की पढ़ाई के लिए 50 सीटों के लिए मान्यता मिली थी। जब नीट की परीक्षा हुई तो उसके बाद इस कालेज में 42 मुस्लिम छात्र, 7 हिन्दू और 1 सिख छात्र को यहां प्रवेश मिला। यह बात जम्मू के हिंदूवादी संगठनों को रास नहीं आयी। वे तर्क (सही कहें तो कुतर्क) करने लगे कि चूंकि ट्रस्ट माता वैष्णों देवी को चढ़ाये गये चंदे से चलता है अतः या तो गैर हिंदू छात्रों का चयन रद्द किया जाये या फिर कालेज ही बंद कर दिया जाये। उनकी मांग में यह निहित ही था कि गैर हिंदू से आशय मुस्लिम छात्रों से था।
    
नेशनल मेडिकल काउंसिल ने इसे बंद करने का आधार यहां बुनियादी इंतजामों का अभाव बताया। स्टाफ की कमी, संसाधनों का अभाव आदि आदि। यह बहुत मजेदार बात है कि जिस कालेज को एक साल पहले ही एम बी बी एस की मान्यता मिली हो उसकी 1 साल के अंदर ही बुनियादी इंतजामों के अभाव में मान्यता रद्द कर दी जाये। यह कोई भी सामान्य बुद्धि का व्यक्ति समझ सकता है कि इसकी मान्यता रद्द करवाने के पीछे हिंदूवादी संगठनों का दबाव ही था। और हिंदूवादी संगठनों द्वारा मनाया गया जश्न इस बात की तस्दीक करता है। 
    
हिंदूवादी संगठनों का दबाव किस तरह काम कर रहा था इसे एक तथ्य से और समझा जा सकता है। मेडिकल कालेज को संचालित करने वाले बोर्ड का कहना है कि जब कालेज का निरीक्षण किया गया तो अधिकांश स्टाफ छुट्टी पर गया था और उन्हें निरीक्षण से मात्र 15 मिनट पहले ही फोन के माध्यम से सूचना दी गयी थी। ऐसे में स्टाफ को तुरंत बुलाना संभव नहीं था। यह दिखाता है कि कालेज को बंद करने की कार्यवाही साजिशन थी। 
    
ऐसे देश में जहां अभी भी स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है एक मेडिकल कालेज का बंद होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। लेकिन हिंदू फासीवादियों को इससे कोई मतलब नहीं है। उनके लिए एक धर्म विशेष के खिलाफ प्रचार करना, समाज में नफरत फैलाना ही मुख्य एजेंडा है। अभी हाल में जब दिल्ली में बम विस्फोट हुआ था तो उसके बाद मुस्लिम डाक्टरों के खिलाफ एक दुष्प्रचार चलाया गया था और अब चूंकि इस कालेज में 42 मुस्लिम छात्रों ने नीट की परीक्षा पास कर अपनी काबिलियत के दम पर प्रवेश पा लिया तो उन्होंने इन छात्रों का प्रवेश रद्द करने की मांग ही उठा दी। अन्यथा मेडिकल कालेज बंद करने का संघर्ष छेड़ दिया। 
    
अगर मेडिकल कालेज में सुविधाओं का अभाव था तो नेशनल मेडिकल काउन्सिल को कालेज को मौका देना चाहिए था कि वह सुविधाओं को दुरुस्त करे। आनन-फानन में मान्यता रद्द करना यह ही साबित करता है कि बंद करने के पीछे के कारण केवल बहाना थे असल मकसद हिंदू फ़ासीवादियों को खुश करना था। अब हिन्दू फासीवादी कश्मीर में प्रस्तावित विधि विश्वविद्यालय को जम्मू स्थानांतरित करने की मांग करने में जुट गये हैं। 

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