मैं विद्रोही हूं और
आजादी मेरा लक्ष्य
तुममें से बहुतों ने किये हैं ऐसे संघर्ष
इसलिए तुम्हें जुड़ना चाहिए मेरे काम से।
मेरा काम है
आजादी का सपना।
और तुम्हें मददगार होना चाहिए
कि बने मेरा सपना एक हकीकत।
मैं क्यों सपना न देखूं और
उम्मीद न करूं?
क्रांति क्या उम्मीदों को हकीकत में बदलना नहीं है?
हम साथ-साथ रहें
ताकि
पूरा हो सपना
और मैं अपने लोगों के संग
निष्कासन से लौटूं
और जीऊं एक
पुरसुकून जम्हूरियत में।
क्या मेरा सपना
इतना भव्य नहीं
कि वह हर कहीं लड़ी जा रही
आजादी की लड़ाई के संग देखा जा सके?
(अनुवाद : नरेन्द्र जैन, साभार कविता कोश)