उत्तराखंड में सुरंग हादसे में मजदूरों की गई जान

Published
Sun, 01/04/2026 - 15:50
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सरकार वाहवाही करवाने में लगी

गोपेश्वर, चमोली के पीपलकोटी में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट की सुरंग में मलवा आने से मजदूर फंस गए। 28 मजदूरों के सुरंग में होने की खबर है। 9 मजदूरों के मारे जाने और 6 के लापता होने की खबर है। बचाव दल द्वारा निकाले गए मजदूरों का अस्पताल में इलाज चल रहा है।

उत्तराखंड में सड़क चौड़ीकरण, पनबिजली परियोजना, सीमा क्षेत्र तक रेलवे ट्रैक बनाने आदि का कार्य जोरों पर है। तमाम पर्यावरणीय चेतावनियों को नजरअंदाज कर सरकार मनमाने तरीके से पहाड़ों में सुरंगें खुदवा रही है। उच्च हिमालयी क्षेत्र पहाड़ों के कटान के मामले में संवेदनशील है। इसके बावजूद विकास, सुरक्षा आदि नामों पर पहाड़ों में सुरंग खोदने का काम जारी है। कभी सिलक्यारा, कर्णप्रयाग तो अब पीपलकोटी में सुरंग हादसे में मजदूर फंस गए मारे गये।

सुरंग में काम कर रहे अधिकांश मजदूर बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड से हैं। सरकार ने बचाव कार्य मे लगे एनडीआरएफ -एसडीआरएफ के कार्यों की प्रशंसा शुरू कर दी है। सरकार अपने को बहुत संवेदनशील बताने की कोशिश कर रही है। सच्चाई यह है कि बरसात के मौसम में जब उत्तराखंड में लगभग रोज ही मौसम की चेतावनियां जारी हो रही हैं, मजदूरों की सुरक्षा का क्या इंतजाम था? लगभग सभी कार्यस्थलों में ऐसी ही आपराधिक लापरवाही की जिम्मेदार सरकार, निर्माण कंपनी, ठेकेदार सब हैं। दूरदराज से आजीविका के लिए जान जोखिम में डालकर काम कर रहे मजदूरों की यही त्रासदी है।

उत्तराखंड सरकार को बचाव कार्य के लिये शाबासी से पहले मजदूरों की जान जाने के लिए अपनी आपराधिक लापरवाही का अपराध कबूलना चाहिए।

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